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क्या उत्तराखंड की सियासी हलचल प्रदेश के नेतृत्व में बदलाव का इशारा है
Mon, 08 Mar 2021 08:55 PM IST
संजीव कुमार झा
शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली
शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: संजीव कुमार झा
Updated Mon, 08 Mar 2021 08:55 PM IST
सार
- उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत ने दिल्ली में की शीर्ष नेताओं से मुलाकात
- मंगलवार को होगा राज्य के नेतृत्व का फैसला
- भाजपा संसदीय दल की बैठक में बदले हालात पर चर्चा के आसार
- बदलाव की सूरत में धन सिंह रावत, सतपाल महाराज, अनिल बलूनी कतार में
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त्रिवेंद्र सिंह रावत(फाइल फोटो)
- फोटो : पीटीआई
विस्तार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहते हुए अमित शाह ने कभी किसी राजनीतिक दबाव में किसी भी राज्य में मुख्यमंत्री को नहीं बदला है। इसलिए मौजूदा अध्यक्ष जेपी नड्डा के कार्यकाल में उत्तराखंड में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत को आखिरी समय में बदले जाने की संभावना कम है। केंद्रीय नेतृत्व ने त्रिवेंद्र सिंह रावत को दिल्ली बुला लिया है। छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह और वरिष्ठ नेता दुष्यंत गौतम ने पर्यवेक्षक के तौर पर उत्तराखंड से लौटकर अपनी रिपोर्ट दे दी है। भाजपा संसदीय दल मंगलवार को सभी पहलुओं पर विचार करेगा। बात बनी तो बीच का रास्ता निकला जाएगा, नहीं तो राज्य को नया मुख्यमंत्री मिलेगा।
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उत्तराखंड के एक वरिष्ठ भाजपा सांसद का कहना है कि निर्णय शीर्ष नेतृत्व को लेना है। त्रिवेंद्र रावत केंद्र और शीर्ष नेतृत्व के साथ तालमेल बिठाकर चलने वाले मुख्यमंत्री हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल का भी उन पर स्नेह रहता है। लेकिन सूत्र बताते हैं कि पिछले दो-तीन महीने से स्थितियां तेजी से बदली हैं। एक पूर्व केंद्रीय मंत्री को भी लग रहा है कि राज्य के नए मुख्यमंत्री के रूप में धन सिंह रावत जगह ले सकते हैं।
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हालांकि पार्टी के नेताओं के बीच इस कतार में धन सिंह रावत के अलावा सतपाल महाराज और राज्यसभा सदस्य अनिल बलूनी का नाम भी नाम चल रहा है। लेकिन सबसे मजबूत नाम धन सिंह रावत का है। ऐसा इसलिए क्योंकि वे त्रिवेंद्र सिंह रावत मंत्रिमंडल में बतौर मंत्री शामिल हें। कामकाज के मामले में उनका प्रभाव है और त्रिवेंद्र के साथ उनका संतुलित तालमेल भी है।
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केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक का नाम भी इस दौड़ नाम चल रहा है। हालांकि निशंक इस समय खुद को खबरों से दूर रखकर चल रहे हैं। वहीं उत्तराखंड से सांसद अजय टम्टा और अजय भट्ट ने भी राजनीतिक चर्चा से परहेज किया। उल्लेखनीय है कि उत्तराखंड में अगले ही साल विधानसभा चुनाव होना है। इसलिए भारतीयज जनता पार्टी काफी फूंक-फूंककर कदम रख रही है।
दबाव में फैसले नहीं करती भाजपा
उत्तराखंड से कुल पांच सांसद हैं। इनमें से तीन का मानना है कि पिछले छह साल से भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने किसी भी राज्य में दबाव में कोई निर्णय नहीं लिया है। इसलिए त्रिवेंद्र सिंह रावत को बदले जाने की संभावना कम है। अब एक साल ही चुनाव में बचे हैं। इसलिए नया चेहरा भी कोई खास करिश्मा नहीं कर पाएगा। इसलिए अभी कुछ कहना ठीक नहीं है।