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श्रमिकों को लेकर गरमाई राजनीति, पीयूष गोयल, संजय राउत और योगी आदित्यनाथ में हुई बयानबाजी

Mon, 25 May 2020 11:10 PM IST
Rajeev Rai न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Rajeev Rai Updated Mon, 25 May 2020 11:10 PM IST
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Political comments on Shramik Special train and migrant workers amid coronavirus crisis and lockdown
पीयूष गोयल, संजय राउत, योगी आदित्यनाथ - फोटो : अमर उजाला

देशभर में कोरोना महामारी का प्रकोप अभी कम नहीं हुआ है लेकिन इसे लेकर राजनीति बढ़ने लगी है। लॉकडाउन के चौथे चरण में दिशानिर्देशों में ढील के साथ राजनीति पर पकड़ सभी ने तेज कर दी है। फिलहाल राजनीति का मुद्दा बने हैं प्रवासी श्रमिक जिन्हें लेकर हर कोई मौके को भुनाने में लगा हुआ है। इसमें भी सबसे ज्यादा वाद-विवाद इस वक्त उत्तरप्रदेश, महाराष्ट्र और केंद्र सरकार के बीच हो रहा है। इस पूरे विवाद में एक तरफ हैं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, केंद्रीय रेल मंत्री पीयूष गोयल तो दूसरी तरफ हैं महाराष्ट्र सरकार की प्रमुख गठबंधन पार्टी शिवसेना के नेता संजय राउत। 

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ऐसे में आइए एक नजर डालते हैं श्रमिकों के नाम पर हो रहे पूरे विवाद और उसपर हो रही नेताओं की बयानबाजी पर।

संजय राउत बनाम योगी आदित्यनाथ

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योगी आदित्यनाथ और संजय राउत - फोटो : अमर उजाला

सीएम आदित्यनाथ ने रविवार को ट्वीट किया और महाराष्ट्र सरकार पर सवाल उठाते हुए श्रमिकों के साथ दुर्व्यवहार का आरोप लगाया और कहा कि उद्धव ठाकरे को जनता माफ नहीं करेगी। उन्होंने कहा, 'अपने खून पसीने से महाराष्ट्र को सींचने वाले कामगारों को शिवसेना-कांग्रेस की सरकार से सिर्फ छलावा ही मिला। लॉकडाउन में उनसें धोखा किया, उन्हें उनके हाल पर छोड़ दिया और घर जाने को मजबूर किया। इस अमानवीय व्यवहार के लिए मानवता श्री उद्धव ठाकरे जी को कभी माफ नहीं करेगी।



इसके बाद योगी ने शिवसेना के नेता संजय राउत को टैग करते हुए लिखा, 'एक भूखा बच्चा ही अपनी माँ को ढूंढता है। यदि महाराष्ट्र सरकार ने 'सौतेली माँ' बन कर भी सहारा दिया होता तो महाराष्ट्र को गढ़ने वाले हमारे उत्तर प्रदेश के निवासियों को प्रदेश वापस न आना पड़ता।



इसपर संजय राउत ने योगी को जवाब देते हुए कहा, 'हम आदित्यनाथ के श्रमिकों के साथ बुरे बर्ताव वाले दावे को अस्वीकार करते हैंं, आदित्यनाथ को इस तरह के दावे नहीं करने चाहिए और उन्हें अब वहां लौटे प्रवासी कामगारों के लिए भोजन और पानी सुनिश्चित करने पर अपना अधिकांश समय खर्च करना चाहिए। 

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पीयूष गोयल बनाम संजय राउत

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रेल मंत्री पीयूष गोयल - फोटो : ani

केंद्रीय रेल मंत्री पीयूष गोयल ने रविवार को श्रमिक स्पेशल ट्रेनों को लेकर महाराष्ट्र सरकार से ट्रेनों को चलवाने की अनुमति मांगी, साथ ही सीएम उद्धव ठाकरे से श्रमिकों की लिस्ट मांगी। रेल मंत्री ने सीएम उद्धव से रात के दो बजे तक सोशल मीडिया के जरिए ट्रेनों को लेकर सवाल किए और श्रमिकों की जानकारी मांगी।

गोयल ने कहा, 'उद्धव जी, आशा है आप स्वस्थ है, आपके अच्छे स्वास्थ्य के लिए शुभेच्छा। कल हम महाराष्ट्र से 125 श्रमिक स्पेशल ट्रेन देने के लिए तैयार है। अपने बताया की आपके पास श्रमिकों की लिस्ट तैयार है। इसलिए आपसे अनुरोध है: सभी निर्धारित जानकारी जैसे, कहाँ से ट्रेन चलेगी, यात्रियों की ट्रेनों के हिसाब से सूची, उनका मेडिकल सर्टिफ़िकेट और कहाँ ट्रेन जानी है, यह सब सूचना अगले एक घंटे में मध्य रेलवे के महाप्रबंधक को पहुँचाने की कृपा करे, जिससे हम ट्रेनों की योजना समय पर कर सके।



इसके बाद पीयूष गोयल ने रात के दो बजे तक कई ट्ववीट किए और जानकारियां मांगी और कहा कि इस वक्त तक मुझे 125 ट्रेनों की जगह 46 ट्रेनें चलाने की लिस्ट ही मिले जिसमें पांच ट्रेनें पश्चिम बंगाल और ओडिशा के लिए है जिसे अभी नहीं चलाया जा सकता है।



पीयूष गोयल के इन सवालों पर संजय राउत ने जवाब देते हुए तंज किया कि महाराष्ट्र सरकार ने रेलवे मंत्रालय को अपेक्षित गाड़ियों की सूची दी है। पीयूष जी से सिर्फ विनती यही है कि ट्रेन जिस स्टेशन पर पहुंचनी चाहिए उसी स्टेशन पर पहुंचे। गोरखपुर के लिए जाने वाली ट्रेन उड़ीसा न पहुंच जाए।

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योगी आदित्यनाथ बनाम राज ठाकरे

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राज ठाकरे 2

योगी आदित्यनाथ ने रविवार को प्रदेश के श्रमिकों को लेकर एक बड़ा ऐलान करते हुए कहा, 'अगर दूसरे राज्य चाहते हैं कि यहां के श्रमिक उनके यहां काम करें तो इसके लिए पहले उन्हें प्रदेश सरकार से अनुमति लेनी होगी। उन्होंने रविवार को कहा था कि जो भी राज्य चाहता है कि प्रदेश के प्रवासी कामगार उनके यहां वापस आएं, उन्हें राज्य सरकार से इसकी इजाजत लेनी होगी और उन कामगारों के सामाजिक, कानूनी और आर्थिक अधिकार सुनिश्चित करने होंगे।

इस पर प्रतिक्रिया देते हुए महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे ने कहा कि, 'अगर योगी आदित्यनाथ इस बात पर जोर दे रहे हैं कि उत्तर प्रदेश के लोगों को काम देने के लिए अनुमति लेनी होगी तो उन्हें भी यहां काम करने के लिए महाराष्ट्र सरकार से अनुमति लेनी होगी। महाराष्ट्र सरकार को इस तरह की बातों को गंभीरता से लेना चाहिए। कोई भी कर्मी जो यहां काम करने के लिए आएंगे उन्हें सरकार के साथ-साथ स्थानीय प्रशासन के पास भी पंजीकरण कराना चाहिए। इन श्रमिकों को अपने दस्तावेज और तस्वीरें भी यहां जमा करानी होंगी।'

फडणवीस का जवाबी हमला

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देवेंद्र फडणवीस- उद्धव ठाकरे - फोटो : social media
देवेन्द्र फडणवीस, नेता प्रतिपक्ष विधानसभा

रेल मंत्रालय ने महाराष्ट्र को अब 525 ट्रेने उपलब्ध कराई है। जिससे करीब 7.30 लाख श्रमिक अपने गांव जा चुके हैं। महाराष्ट्र सरकार अपनी असफलता छुपाने के लिए बार-बार केंद्र सरकार को निशाना बना रहा है जो गलत है।


बालासाहेब थोरात, महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष

दूसरे राज्यों के मजदूरों को गांव भेजने के लिए रेल मंत्रालय पर्याप्त ट्रेनें नहीं भेज रहा है। यह सचाई स्वीकार करने की बजाए रेलमंत्री ट्वीटर पर अतिवाद कर रहे हैं। यह दुखद है। 

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