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'साहिबजादों' को दीवार में चुनवा दिया पर नहीं छोड़ी गुरु परंपरा की सीख, पीएम ने गुरु गोबिंद सिंह को किया याद
Sun, 27 Dec 2020 11:45 AM IST
अनवर अंसारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अनवर अंसारी
Updated Sun, 27 Dec 2020 11:45 AM IST
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दिल्ली के गुरुद्वारा रकाब गंज में पीएम मोदी
- फोटो : Twitter/@narendramodi
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को 'मन की बात' कार्यक्रम में साहिबजादों की कहानी का जिक्र किया। यह कहानी सिखों के दसवें गुरु 'गुरु गोबिंद सिंह' से जुड़ी हुई है। माना जा रहा है कि पीएम मोदी ने इस कहानी के जरिए दिल्ली की सीमाओं पर कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसानों को साधने का प्रयास किया।
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साहिबजादे की कहानी का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने 'मन की बात' कार्यक्रम में कहा, हमारे देश में आतताइयों से, अत्याचारियों से, देश की हजारों साल पुरानी संस्कृति, सभ्यता, हमारे रीति-रिवाज को बचाने के लिए कितने बड़े बलिदान किए गए हैं, आज उन्हें याद करने का भी दिन है।
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उन्होंने कहा, आज के ही दिन गुरु गोबिंद जी के पुत्रों, साहिबजादे जोरावर सिंह और फतेह सिंह को दीवार में जिंदा चुनवा दिया गया था। अत्याचारी चाहते थे कि साहिबजादे अपनी आस्था छोड़ दें, महान गुरु परंपरा की सीख छोड़ दें।
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पीएम ने कहा, लेकिन हमारे साहिबजादाेेें ने इतनी कम उम्र में भी गजब का साहस दिखाया, इच्छाशक्ति दिखाई। दीवार में चुने जाते समय, पत्थर लगते रहे, दीवार ऊंची होती रही, मौत सामने मंडरा रही थी, लेकिन फिर भी वो टस-से-मस नहीं हुए।
यह है साहिबजादों की कहानी
दरअसल, गुरु गोबिंद सिंह के चार साहिबजादे अजीत सिंह, जुझार सिंह, जोरावर सिंह और फतेह सिंह दिसंबर, 1704 में चमकौर युद्ध में शहीद हो गए थे। यह युद्ध पंजाब के चमकौर में गुरु गोबिंद सिंह और वजीर खान की अगुवाई में मुगलों की सेना से हुआ था। मुगलों ने विशाल सेना लेकर चमकौर पर चढ़ाई की थी। मुगलों की सेना के सामने सिख सेना हथियार लिए खड़ी थी। इस युद्ध में सिखों ने वीरता दिखाते हुए मुगलों की सेना को भारी क्षति पहुंचाई। इस युद्ध में गुरुजी के दो पुत्र शहीद हो गए। वहीं, अन्य दो को पकड़ लिया गया। जिन्हें पकड़ा गया उनमें साहिबजादे जोरावर सिंह और फतेह सिंह शामिल थे, जिन्हें मुगलों ने दीवार में जिंदा चुनाव दिया था। हालांकि, मुगलों की सेना गुरु गोबिंद सिंह को पकड़ने में कामयाब नहीं हो सकी।