PM Modi US Visit: मोदी की यूएस और ब्लिंकन की चीन यात्रा का यह है नाता! व्हाइट हाउस में होगी इन मुद्दों पर बात
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विस्तार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी अमेरिका की पहली राजकीय यात्रा पर रवाना हो गए। वहीं दूसरी ओर अमेरिका के विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने चीन के राष्ट्रपति से मुलाकात कर चीन और अमेरिका के रिश्तों पर जमी बर्फ को पिघलाने की कोशिश शुरू की है। विदेशी मामलों के जानकारों का मानना है कि प्रधानमंत्री मोदी की यूएस की राजकीय यात्रा ब्लिंकन की चीन यात्रा का आपस में गहरा नाता जुड़ा है। इसके पीछे विशेषज्ञों के अपने तर्क हैं और वह यह मानते हैं कि प्रधानमंत्री मोदी के व्हाइट हाउस में होने वाले डिनर के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति हाल ही में हुई ब्लिंकन और शी जिनपिंग के बीच हुई मुलाकात का भी जिक्र करेंगे। ताकि भारत और अमेरिका के रिश्ते और मजबूती के साथ आगे बढ़ सकें। इसके अलावा पाकिस्तान समेत दक्षिण एशिया के मुद्दों पर भी दोनों नेताओं के बीच बातचीत की संभावना बताई जा रही है।
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कई देशों की निगाहें लगी हैं इस यात्रा पर
प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा को लेकर पूरी दुनिया खासतौर से दक्षिण एशिया के कई मुल्कों की निगाहें लगी हुई हैं। विदेशी मामलों के जानकार और रिटायर्ड भारतीय विदेश सेवा के अधिकारी अमरेंद्र कठुवा कहते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यात्रा कई मायनों में बहुत महत्वपूर्ण है। खासतौर से यात्रा तब और ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाती है जब अमेरिका के विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन चीन में मौजूद हों और वह वहां के राष्ट्रपति से मुलाकात कर रहे हों। अमरेंद्र कठुवा कहते हैं कि प्रधानमंत्री मोदी की अमेरिका यात्रा और ब्लिंकन की चीन यात्रा का आपस में इतना जबरदस्त नाता है कि इसका भारत और अमेरिका की दोस्ती पर बहुत गहरा प्रभाव पड़ने वाला है। वह कहते हैं कि अमेरिका को भारत और चीन के रिश्तों के बारे में बखूबी अंदाजा है। वह जानता है कि भारत के किन मुद्दों को लेकर चीन से टकराव बना रहता है। विदेशी मामलों से जुड़े वरिष्ठ सूत्रों का मानना है कि अमेरिका के विदेश मंत्री ब्लिंकन की चीन यात्रा के दौरान भारत से जुड़े वह मुद्दे भी चीन के नेताओं ने चर्चा किए हैं, जो टकराव पैदा करते हैं।
चीन से हुई चर्चा को अमेरिका साझा करेगा मोदी से
अमरेंद्र कठुआ का कहना है कि अमेरिका के विदेश मंत्री भारत के संबंध में की गई तमाम डिप्लोमेटिक डिस्कशन को प्रधानमंत्री मोदी के साथ साझा कर सकते हैं। अमरेंद्र कठुआ के मुताबिक ब्लिंकन के चीन में होने और वहां पर उनके अपने समकक्षों समेत राष्ट्रपति से मुलाकात के दौरान भारत के संबंध में हुई चर्चाओं को वह अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडन के साथ चर्चा भी करेंगे। उनका कहना है कि बीते चार दशकों के उनके अनुभव यही बताते हैं कि जब कुछ ताकतवर देशों के नेता आपस में मिलते हैं, तो उनके देशों संबंध में की गई चर्चाएं आपसी समझ और तालमेल के साथ साझा की जाती है। ऐसे में अनुमान यही लगाया जा रहा है कि प्रधानमंत्री मोदी के साथ अमेरिकी राष्ट्रपति, चीन में उनके विदेश मंत्री के साथ हुई भारत के संबंध में चर्चाएं साझा होंगी। इससे अमेरिका भारत के साथ अपने मजबूत रिश्तों को और आगे बढ़ाने के प्रयास भी करेगा।
रूस से तेल ज्यादा खरीदने का उठ सकता है मामला
इसके अलावा विदेशी मामलों के जानकारों का मानना है कि प्रधानमंत्री मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति की बातचीत के दौरान रूस एक बड़ा मुद्दा रहेगा। दिल्ली विश्वविद्यालय में प्रवक्ता और विदेशी मामलों के जानकार अभिषेक सिंह कहते हैं कि जिस तरीके से रूस और यूक्रेन के युद्ध में भारत की भूमिका रही है, वह अमेरिका के लिए निश्चित तौर पर प्रधानमंत्री मोदी के साथ चर्चा का विषय होगी। अभिषेक कहते हैं कि युद्ध में भारत की भूमिका के अलावा ऑयल ट्रेड डील को लेकर चर्चा हो सकती है। उनका मानना है कि बीते कुछ समय में जिस तरीके से भारत ने रूस से तेल के आयात की मात्रा बढ़ाई है वह न सिर्फ अमेरिका बल्कि दुनिया के और भी कई मुल्कों के लिए परेशानी बनता जा रहा है। विदेशी मामलों के जानकारों का मानना है कि इस दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस संबंध में चर्चा कर आगे की रणनीति पर विचार कर सकते हैं। इंटरनेशनल रिलेशन ऑफ साउथ एशियन कंट्रीज के डायरेक्टर एसएस सिद्धू मानते हैं कि प्रधानमंत्री मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति के बीच रूस को लेकर होने वाली चर्चा में युद्ध से ज्यादा भारत और रूस के व्यापारिक रिश्ते की बात हो सकती है। इसके अलावा रूस से तेल की ज्यादा खरीद पर भी अमेरिका अपना नजरिया भारत के साथ साझा कर सकता है।
अमेरिका से कैसे बेहतर हों भारत के रिश्ते, इस पर होगा जोर
दुनिया के अलग-अलग देशों में राजदूत के तौर पर जिम्मेदारी निभा चुके वरिष्ठ राजनयिक अमरेंद्र कठुआ कहते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति की मुलाकात में चार सबसे महत्वपूर्ण प्वाइंट हैं। जिन पर चर्चा होना लाजिमी है। इसमें सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा तो यही है कि भारत और अमेरिका के साथ अच्छे रिश्ते और कैसे आगे बढ़ाए जाएं। इसके लिए तमाम तरह के व्यापारिक समझौतों के अलावा दोनों एकदूसरे की प्रमुख कंपनियों के सीईओ के साथ बैठकें और तकनीकी समझौते शामिल हैं। इसके अलावा रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध पर भी चर्चा होगी। तीसरे और सबसे महत्वपूर्ण मुद्दे में भारत और रूस के रिश्तों को लेकर अमेरिका खुल कर बात कर सकता है। क्योंकि रूस और यूक्रेन के युद्ध के चलते पश्चिमी मुल्कों के तमाम प्रतिबंधों के बाद भी भारत और रूस के बीच व्यापारिक रिश्तो में न तो कोई सख्ती बरती गई है और न ही कोई समझौते हुए हैं।
पाकिस्तान में अमेरिका का बना रहेगा दखल
वरिष्ठ राजनयिक अमरेंद्र मानते हैं कि भारत और पाकिस्तान को लेकर दोनों बड़े नेताओं के बीच में चर्चा तो होगी, लेकिन अमेरिका इस मामले में पूरी तरह न्यूट्रल ही रहेगा। वह कहते हैं भारत, पाकिस्तान के आपसी रिश्तों में अमेरिका बिल्कुल दखल नहीं देगा। पाकिस्तान में अमेरिका की दखलंदाजी पहले से और ज्यादा बढ़ेगी। अमरेंद्र कहते हैं कि इस दखलंदाजी को लेकर वह भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अफगानिस्तान का तर्क देकर अपनी मौजूदगी को सही साबित भी करना चाहेंगे। विदेशी मामलों के जानकार आरएन आहूजा कहते हैं कि दो नेताओं के बीच में भारत-पाकिस्तान को लेकर की जाने वाली बातचीत निश्चित तौर पर बेहद गुप्त ही रहेगी। लेकिन अनुमान यही लगाया जा रहा है कि अमेरिका, पाकिस्तान से पीछे नहीं हटेगा। इसी बहाने अमेरिका, पाकिस्तान को थोड़ी बहुत वित्तीय मदद की सिफारिश भी करेगा, लेकिन ये रिश्ते भारत और अमेरिका के रिश्तों की तुलना में न के बराबर ही रहेंगे।