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महाराष्ट्र: सतारा में सरकारी डॉक्टर की मौत, आत्महत्या की कोशिश के बाद चल रहा था इलाज; क्या था पूरा विवाद?
Tue, 01 Sep 2026 05:29 AM IST
निर्मल कांत
पीटीआई, मुंबई।
पीटीआई, मुंबई।
Published by: निर्मल कांत
Updated Tue, 01 Sep 2026 05:29 AM IST
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जांच में जुटी पुलिस
- फोटो : अमर उजाला
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महाराष्ट्र के सतारा जिले के फलटण उप-जिला अस्पताल में तैनात एक डॉक्टर की सोमवार को मुंबई में इलाज के दौरान मौत हो गई। डॉक्टर ने कुछ दिन पहले आत्महत्या की कोशिश की थी। उन्होंने खुद को परेशान किए जाने का आरोप लगाया था।
डॉक्टर राजेंद्र रुपनवर ने गुरुवार सुबह मुंबई के सायन रेलवे स्टेशन पर हाईटेंशन बिजली के टावर पर चढ़कर आत्महत्या करने की कोशिश की थी।
एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि पुलिस और दमकल विभाग के कर्मचारियों ने उन्हें बचाया। इसके बाद उन्हें र्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (सीपीआर) दिया गया। फिर उन्हें अस्पताल ले जाया गया। उनकी हालत गंभीर बनी हुई थी। सोमवार दोपहर इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
जुलाई में शुरू हुआ था विवाद
जुलाई में प्रसाद कोंडे देशमुख नाम का एक व्यक्ति कथित तौर पर फलटण उप-जिला अस्पताल पहुंचा था। उसने खुद को एक पूर्व मंत्री का निजी सहायक बताया था। वह हथियार का लाइसेंस लेने के लिए मेडिकल फिटनेस प्रमाणपत्र चाहता था। उसने डॉक्टर से नियम से अलग जाकर यानी अपनी बारी के बिना प्रमाणपत्र देने की मांग की थी।
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डॉक्टर रुपनवर ने प्रमाणपत्र देने से इनकार कर दिया था। उन्होंने नियमों का हवाला दिया। इसके बाद दोनों के बीच तीखी बहस हुई। बाद में अस्पताल के अधिकारियों ने प्रमाणपत्र जारी कर दिया। लेकिन आरोप है कि देशमुख ने डॉ. रुपनवर को गंभीर नतीजे भुगतने की धमकी दी।
इन धमकियों से डॉ. रुपनवर परेशान हो गए। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक संदेश पोस्ट किया। इसमें उन्होंने अपनी जिंदगी खत्म करने की बात कही। इसके बाद फाल्टन शहर पुलिस ने देशमुख के खिलाफ मामला दर्ज किया। उन पर सरकारी कर्मचारी को उसके काम करने से रोकने का आरोप लगाया गया।
डॉक्टर के खिलाफ भी शुरू हुई जांच
हालांकि, चिकित्सा अधीक्षक ने डॉ. रुपनवर के खिलाफ ही आंतरिक जांच शुरू कर दी। आरोप है कि जांच रिपोर्ट को जारी करने में देरी की गई। डॉ. रुपनवर को भी जांच रिपोर्ट की एक प्रति नहीं दी गई। पिछले हफ्ते वह मुंबई गए। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी किया। इसमें उन्होंने चिकित्सा अधीक्षक के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की। इसके बाद उन्होंने आत्महत्या की कोशिश की।
अधिकारियों ने बताया कि सरकार ने चिकित्सा अधीक्षक को निलंबित कर दिया है। मामले की आगे की जांच जारी है।
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डॉक्टर राजेंद्र रुपनवर ने गुरुवार सुबह मुंबई के सायन रेलवे स्टेशन पर हाईटेंशन बिजली के टावर पर चढ़कर आत्महत्या करने की कोशिश की थी।
एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि पुलिस और दमकल विभाग के कर्मचारियों ने उन्हें बचाया। इसके बाद उन्हें र्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (सीपीआर) दिया गया। फिर उन्हें अस्पताल ले जाया गया। उनकी हालत गंभीर बनी हुई थी। सोमवार दोपहर इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
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जुलाई में शुरू हुआ था विवाद
जुलाई में प्रसाद कोंडे देशमुख नाम का एक व्यक्ति कथित तौर पर फलटण उप-जिला अस्पताल पहुंचा था। उसने खुद को एक पूर्व मंत्री का निजी सहायक बताया था। वह हथियार का लाइसेंस लेने के लिए मेडिकल फिटनेस प्रमाणपत्र चाहता था। उसने डॉक्टर से नियम से अलग जाकर यानी अपनी बारी के बिना प्रमाणपत्र देने की मांग की थी।
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डॉक्टर रुपनवर ने प्रमाणपत्र देने से इनकार कर दिया था। उन्होंने नियमों का हवाला दिया। इसके बाद दोनों के बीच तीखी बहस हुई। बाद में अस्पताल के अधिकारियों ने प्रमाणपत्र जारी कर दिया। लेकिन आरोप है कि देशमुख ने डॉ. रुपनवर को गंभीर नतीजे भुगतने की धमकी दी।
इन धमकियों से डॉ. रुपनवर परेशान हो गए। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक संदेश पोस्ट किया। इसमें उन्होंने अपनी जिंदगी खत्म करने की बात कही। इसके बाद फाल्टन शहर पुलिस ने देशमुख के खिलाफ मामला दर्ज किया। उन पर सरकारी कर्मचारी को उसके काम करने से रोकने का आरोप लगाया गया।
डॉक्टर के खिलाफ भी शुरू हुई जांच
हालांकि, चिकित्सा अधीक्षक ने डॉ. रुपनवर के खिलाफ ही आंतरिक जांच शुरू कर दी। आरोप है कि जांच रिपोर्ट को जारी करने में देरी की गई। डॉ. रुपनवर को भी जांच रिपोर्ट की एक प्रति नहीं दी गई। पिछले हफ्ते वह मुंबई गए। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी किया। इसमें उन्होंने चिकित्सा अधीक्षक के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की। इसके बाद उन्होंने आत्महत्या की कोशिश की।
अधिकारियों ने बताया कि सरकार ने चिकित्सा अधीक्षक को निलंबित कर दिया है। मामले की आगे की जांच जारी है।