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75th Amrut Mahotsav: पीएम मोदी बोले- नई शिक्षा नीति के जरिये बनाई गई भविष्योन्मुखी शिक्षा प्रणाली
Sat, 24 Dec 2022 12:08 PM IST
संजीव कुमार झा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, राजकोट
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, राजकोट
Published by: संजीव कुमार झा
Updated Sat, 24 Dec 2022 12:08 PM IST
सार
पीएम मोदी ने कहा कि देश आजाद होने के बाद हम पर जिम्मेदारी थी कि शिक्षा के क्षेत्र में हम अपने प्राचीन वैभव और महान गौरव को पुनर्जीवित करें। स्वामीनारायण गुरुकुल इसी गौरव का उत्कृष्ट उदहारण है।
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पीएम मोदी ने 75वें 'अमृत महोत्सव' को किया संबोधित
- फोटो : Twitter@bjp4 india
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विस्तार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को वीडियो लिंक के जरिये गुजरात के राजकोट स्थित श्री स्वामीनारायण गुरुकुल के 75वें अमृत महोत्सव को संबोधित किया। उन्होंने अपने संबोधन में कई अहम मुद्दों पर चर्चा कीं। पीएम मोदी ने स्वामीनारायण गुरुकुल के 75 वर्षों की यात्रा पूरी होने के अवसर पर बधाई देते हुए कहा कि देश आजाद होने के बाद हम पर जिम्मेदारी थी कि शिक्षा के क्षेत्र में हम अपने प्राचीन वैभव और महान गौरव को पुनर्जीवित करें। स्वामीनारायण गुरुकुल इसी गौरव का उत्कृष्ट उदहारण है।
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खोया गौरव हासिल करने के लिए पहले की सरकारों ने कुछ नहीं किया...
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को कहा कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के जरिये देश में पहली बार भविष्योन्मुखी और दूरदर्शी शिक्षा प्रणाली बनाई गई है। साथ ही उन्होंने पूर्ववर्ती सरकारों पर ‘गुलामी की मानसिकता’ के चलते देश के खोए गौरव को हासिल करने के लिए कुछ नहीं करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, आजादी के इस अमृतकाल में देश, शिक्षा इंफ्रास्ट्रक्चर हो या शिक्षा नीति, हम हर स्तर पर तेज गति से विस्तार के काम में जुटे हैं।
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उन्होंने कहा, 2014 में केंद्र की सत्ता में आने के बाद उनकी सरकार में देश में आईआईटी, आईआईआईटी, आईआईएम, एम्स और मेडिकल कॉलजों जैसे प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों की संख्या काफी बढ़ी है। इस दौरान मेडिकल कॉलेजों की संख्या में 65 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है। नई शिक्षा नीति के जरिये देश में पहली बार एक ऐसी शिक्षा प्रणाली तैयार की जा रही है जो दूरदर्शी और भविष्योन्मुखी है।
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गुलामी की मानसिकता के दबाव में थीं पूर्ववर्ती सरकारें
पीएम ने कहा कि जब देश आजाद हुआ तो देश के प्राचीन गौरव और शिक्षा के क्षेत्र में महान वैभव को पुनर्जीवित करना हम सबका दायित्व था लेकिन गुलामी की मानसिकता के दबाव में सरकारें उस दिशा में आगे नहीं बढ़ीं। इतना ही नहीं, कुछ मामलों में वे उल्टी दिशा में चली गईं। इन परिस्थितियों में, एक बार फिर संतों और आचार्यों ने देश के प्रति इस कर्तव्य को निभाने का बीड़ा उठाया है। स्वामीनारायण गुरुकुल इसी सुयोग का जीवंत उदाहरण है।
पीएम ने कहा, जब नई पीढ़ी बचपन से ही बेहतर शिक्षा व्यवस्था में पलेगी और बढ़ेगी तो आदर्श नागरिकों का निर्माण भी स्वत: होता चला जाएगा। यही आदर्श नागरिक, आदर्श युवा 2047 में जब देश आजादी के 100 साल मनाएगा, विकसित भारत के सपने को सिद्धि तक लेकर जाएंगे।
देश के उज्ज्वल भविष्य के लिए शिक्षा नीति और संस्थानों की बड़ी भूमिका
पीएम मोदी ने भारत की प्राचीन ‘गुरुकुल’ (आवासीय स्कूली शिक्षा) प्रणाली की प्रशंसा करते हुए कहा, ज्ञान देश में जीवन का सर्वोच्च उद्देश्य रहा है। हमारे संतों और आध्यात्मिक गुरुओं ने शिक्षा के क्षेत्र में देश की खोई हुई महिमा को पुनर्जीवित करने में मदद की। उन्होंने कहा, भारत के उज्ज्वल भविष्य के लिए हमारी मौजूदा शिक्षा नीति और संस्थानों को बड़ी भूमिका निभानी है। इसलिए देश के शिक्षा इंफ्रास्ट्रक्चर की बात हो या नीति की, हम हर स्तर पर तेजी से काम करने में लगे हैं।
शोध से दुनिया को दिखाया मार्ग
पीएम ने कहा, भारत ने ‘आत्मतत्व’ से ‘परमात्मा’ तक, अध्यात्म से आयुर्वेद तक, सामाजिक विज्ञान से सौर विज्ञान, गणित से धातु विज्ञान और शून्य से अनंत तक के क्षेत्रों में शोध कर दुनिया को मार्ग दिखाया। विदुषियों ने पुरुष समकक्षों के साथ तब बहस की, जब ‘लैंगिक समानता’ शब्द का जन्म भी नहीं हुआ था। भारत ने अंधकार से भरे उन युगों में मानवता को प्रकाश की वे किरणें प्रदान कीं जिनसे आधुनिक विश्व और विज्ञान की यात्रा शुरू हुई।
गुरुकुल ने छात्रों के मन-मस्तिष्क को अच्छे विचारों और मूल्यों से सींचा है: पीएम मोदी
श्री स्वामीनारायण गुरुकुल राजकोट की यात्रा के 75 वर्ष ऐसे कालखंड में पूरे हो रहे हैं, जब देश अपनी आजादी के 75 वर्ष मना रहा है। इस गुरुकुल ने छात्रों के मन-मस्तिष्क को अच्छे विचारों और मूल्यों से सींचा है, ताकि उनका समग्र विकास हो सके। जिस कालखंड में दुनिया के दूसरे देशों की पहचान वहां के राज्यों और राज-कुलों से होती थी, तब भारत को भारतभूमि के गुरुकुलों से पहचाना जाता था। खोज और शोध भारत की जीवन पद्धति का हिस्सा थे। नालंदा और तक्षशिला जैसे विश्वविद्यालय हमारी गुरुकुल परंपरा के वैश्विक वैभव के पर्याय हुआ करते थे।