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पीएम की सलाह: कहा- कोरोना चला गया यह भ्रम न पालें, टीका लगवाएं और मास्क पहनें
Mon, 28 Jun 2021 02:04 AM IST
Jeet Kumar
एजेंसी, नई दिल्ली।
एजेंसी, नई दिल्ली।
Published by: Jeet Kumar
Updated Mon, 28 Jun 2021 02:04 AM IST
सार
पीएम ने रेडियो पर मन की बात के 78वें संस्करण में देशवासियों से अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील करते हुए कहा, मैंने और मेरी मां ने भी 100 साल की उम्र में टीके की दोनों खुराक लगा ली है।
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मन की बात
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
देश में कोरोना महामारी की तीसरी लहर के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, अगर कोई कहता है कि कोरोना चला गया तो ये भ्रम न पालें। यह बहुरूपिया बीमारी है। रूप बदलती है। इससे बचने के दो रास्ते हैं।
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पहला मास्क पहनना, साबुन से बार-बार हाथ धोना, दूरी बनाए रखना जैसे कोरोना प्रोटोकॉल और दूसरा टीका लगवाना, जो सुरक्षा कवच है। हमें जिंदगी बचानी है, गांववालों और देशवासियों को बचाना है।
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पीएम ने मध्यप्रदेश के बैतूल के एक गांव के दो लोगों से बात की, जिन्होंने बताया कि हमारे यहां कोरोना टीके को लेकर भ्रम फैलाया जा रहा है। कहा जा रहा है कि इससे मौत हो रही है। इस पर पीएम ने कहा, हमें भ्रम नहीं फैलने देना है। टीके से डरने की कोई जरूरत नहीं है।
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पीएम ने कहा, साल भर रात-दिन बड़े-बड़े वैज्ञानिकों ने टीके के लिए काम किया है और इसलिए हमें विज्ञान पर भरोसा करना चाहिए। वैज्ञानिकों पर भरोसा करना चाहिए और ये झूठ फैलाने वाले लोगों को बार-बार समझाना चाहिए। अफवाहों से बचें और गांव को भी बचाएं।
कोरोना काल में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि यही होगी कि हम कोविड प्रोटोकॉल का पालन करें और टीका लगवाएं। पीएम ने बताया कि कश्मीर के बांदीपुरा जिले के व्यवन गांव में 18 साल से अधिक उम्र के सभी लोग टीका लगवा चुके हैं और नगालैंड के भी तीन गांव के सभी लोग टीका लगवा चुके हैं।
गांवों में हर व्यक्ति को टीका लगे, यह हो लक्ष्य
पीएम ने कहा, कभी यह अनुसंधान का विषय बनेगा कि गांववालों और हमारे वनवासी-आदिवासी भाई-बहनों ने कोरोना काल अपने सामर्थ्य और सूझबूझ का परिचय दिया। किसी को भूखा नहीं सोने दिया, खेती का काम भी रुकने नहीं दिया। नजदीक के शहरों में दूध-सब्जियां हर रोज पहुंचाते रहे। खुद को संभाला, औरों को भी संभाला। ऐसे ही गांवों में हर एक व्यक्ति को टीका लगे, यह हर गांव का लक्ष्य होना चाहिए।
जल संरक्षण:
पौड़ी गढ़वाल के भारती बना चुके हैं 30 हजार ताल-तलैया
पीएम ने कहा, हमारे देश में अब मानसून का सीजन भी आ गया है। बादल जब बरसते हैं तो केवल हमारे लिए ही नहीं बरसते, बल्कि बादल आने वाली पीढ़ियों के लिए भी बरसते हैं। बारिश का पानी जमीन में जाकर इकठ्ठा भी होता है, जमीन के जलस्तर को भी सुधारता है। और इसलिए मैं जल संरक्षण को देश सेवा का ही एक रूप मानता हूं। ऐसे ही एक शख्स हैं उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल के सच्चिदानंद भारती।
भारती एक शिक्षक हैं और उन्होंने अपने कार्यों से भी लोगों को बहुत अच्छी शिक्षा दी है। आज उनकी मेहनत से ही पौड़ी गढ़वाल के उफरैंखाल क्षेत्र में पानी का बड़ा संकट समाप्त हो गया है। जहाँ लोग पानी के लिए तरसते थे, वहाँ आज साल-भर जल की आपूर्ति हो रही है। प
हाड़ों में जल संरक्षण का एक पारंपरिक तरीका रहा है जिसे ‘चालखाल’ भी कहा जाता है , यानि पानी जमा करने के लिए बड़ा सा गड्ढा खोदना। भारती जी ऐसी 30 हजार से अधिक जल-तलैया बनवा चुके हैं। उनका ये भागीरथ कार्य आज भी जारी है और अनेक लोगों को प्रेरणा दे रहे हैं।
बांदा के गांववासियों ने खेत में ही जमा कर दिया पानी
यूपी के बांदा जिले में अन्धाव गांव के लोगों ने भी एक अलग ही तरह का प्रयास किया है। उन्होंने अपने अभियान को बड़ा ही दिलचस्प नाम दिया है-‘खेत का पानी खेत में, गांव का पानी गांव में’।
इस अभियान के तहत गांव के कई सौ बीघे खेतों में ऊंची-ऊंची मेड़ें बनाई गई हैं। इससे बारिश का पानी खेत में जमा होने लगा और जमीन में जाने लगा। अब ये लोग खेतों की मेड़ पर पेड़ लगाने की भी योजना बना रहे हैं।