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OROP: वन रैंक वन पेंशन को 10 साल पूरे; PM मोदी बोले- यह योजना हमारे दिग्गजों के साहस और बलिदान को श्रद्धांजलि

Thu, 07 Nov 2024 03:10 PM IST
काव्या मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: काव्या मिश्रा Updated Thu, 07 Nov 2024 03:10 PM IST
सार

वन रैंक वन पेंशन योजना के तहत सशस्त्र बलों के कार्मिकों को समान पद और सेवा अवधि के लिए समान पेंशन का भुगतान किया जाता है, चाहे उनकी सेवानिवृत्ति की तिथि कुछ भी हो। इस योजना को आज ही के दिन लागू किया गया था। 
 

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PM Modi on implementation of OROP scheme says Tribute to the courage, sacrifices of our veterans
पीएम मोदी (फाइल फोटो) - फोटो : पीटीआई

विस्तार

आज के ही दिन 10 साल पहले केंद्र की मोदी सरकार ने वन रैंक वन पेंशन (OROP) लागू की थी। पीएम ने इस ऐतिहासिक दिन को याद करते हुए बताया कि इस योजना से लाखों पेंशनधारकों को फायदा पहुंचा है। उन्होंने गुरुवार को कहा कि पूर्व सैनिकों के लिए ‘वन रैंक वन पेंशन’ योजना लागू करना देश की अपने नायकों के प्रति कृतज्ञता की पुष्टि करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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क्या है ओआरओपी योजना?
बता दें, ओआरओपी योजना के तहत सशस्त्र बलों के कार्मिकों को समान पद और सेवा अवधि के लिए समान पेंशन का भुगतान किया जाता है, चाहे उनकी सेवानिवृत्ति की तिथि कुछ भी हो। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने 2014 के लोकसभा चुनाव में इस योजना को लागू करने का वादा किया था। सत्ता में आने के बाद, मोदी ने सेवानिवृत्त रक्षा कर्मियों की प्रमुख शिकायतों को दूर करने के लिए इस योजना को लागू करने को प्राथमिकता दी थी।
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साहस और बलिदान के लिए एक श्रद्धांजलि: पीएम
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट में दिग्गजों को याद किया और कहा कि ओआरओपी उनके बलिदान और साहस को श्रद्धांजलि देने का एक तरीका है। उन्होंने कहा, 'आज ही के दिन वन रैंक वन पेंशन (ओआरओपी) लागू किया गया था। यह हमारे सैनिकों और पूर्व सेवा कर्मियों के साहस और बलिदान के लिए एक श्रद्धांजलि थी, जिन्होंने हमारे राष्ट्र की रक्षा के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया।’
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उन्होंने कहा, ‘ओआरओपी को लागू करने का निर्णय इस लंबे समय से चली आ रही मांग को पूरा करने और हमारे नायकों के प्रति हमारे देश की कृतज्ञता की पुष्टि करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम था। पिछले दशक में लाखों पेंशनभोगी और पेंशनभोगी परिवार इस ऐतिहासिक पहल से लाभान्वित हुए हैं। संख्या से परे, ओआरओपी हमारे सशस्त्र बलों की भलाई के लिए सरकार की प्रतिबद्धता का प्रतिनिधित्व करता है। हम हमेशा अपने सशस्त्र बलों को मजबूत करने और हमारी सेवा करने वालों के कल्याण को आगे बढ़ाने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे।’

पीएम की सशस्त्र सेनाओं के प्रति नीति का एक महत्वपूर्ण स्तंभ रहा ओआरओपी: रक्षा मंत्री
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी ओआरओपी को सशस्त्र बलों के प्रति प्रधानमंत्री की नीति का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बताया। उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर कहा, वन रैंक वन पेंशन (ओआरओपी) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सशस्त्र सेनाओं के प्रति नीति का एक महत्वपूर्ण स्तंभ रहा है। उनके नेतृत्व में सरकार सैनिकों और उनके परिवारों की देखभाल करने के लिए प्रतिबद्ध है। ओआरओपी के क्रियान्वयन से 25 लाख से अधिक भूतपूर्व सैनिकों को लाभ मिला है। देश के भूतपूर्व सैनिकों से की गई प्रतिबद्धता को पूरा करने के लिए प्रधानमंत्री का आभार।'


2015 में लिया था फैसला
ओआरओपी को लागू करने का फैसला नरेंद्र मोदी सरकार ने सात नवंबर 2015 को लिया था, जिसके लाभ एक जुलाई, 2014 से प्रभावी हुए। ओआरओपी सशस्त्र बलों की लंबे समय से चली आ रही मांग थी और इसका तात्पर्य यह है कि समान रैंक के सेवानिवृत्त सैनिक, जो समान सेवा अवधि के बाद सेवानिवृत्त हुए हैं, उन्हें उनकी सेवानिवृत्ति की तिथि और वर्ष पर ध्यान दिए बिना समान पेंशन मिलेगी।

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