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PMO: पीएम मोदी ने ऑस्ट्रेलिया-जापान के विदेश मंत्रियों से की मुलाकात, इंडो-पैसिफिक में शांति और सुरक्षा पर जोर
Tue, 26 May 2026 11:07 PM IST
अमन तिवारी
एएनआई, नई दिल्ली
एएनआई, नई दिल्ली
Published by: अमन तिवारी
Updated Tue, 26 May 2026 11:07 PM IST
सार
प्रधानमंत्री मोदी ने जापानी विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोतेगी से मुलाकात कर भारत-जापान रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने पर जोर दिया। इसके बाद पीएम मोदी ने ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग से भी मुलाकात की। इस दौरान दोनों देशों ने इस बात पर सहमति जताई कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखना उनकी साझा प्राथमिकता है।
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पीएम मोदी ने ऑस्ट्रलिया और जापान के विदेश मंत्रियों से मुलाकात की
- फोटो : ANI
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विस्तार
नई दिल्ली में कूटनीतिक हलचल के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को ऑस्ट्रेलिया और जापान के विदेश मंत्रियों से मुलाकात कर इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति, स्थिरता और समृद्धि को लेकर भारत की प्रतिबद्धता दोहराई। इस दौरान भारत ने साफ किया कि वह अपने साझेदार देशों के साथ मिलकर इस क्षेत्र को सुरक्षित, खुला और संतुलित बनाए रखने के लिए लगातार काम करता रहेगा।
इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में स्थिरता साझा प्राथमिकता
प्रधानमंत्री मोदी ने ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग से बातचीत में दोनों देशों के बीच बढ़ती 'व्यापक रणनीतिक साझेदारी' पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत और ऑस्ट्रेलिया रक्षा, व्यापार, तकनीक और सप्लाई चेन जैसे अहम क्षेत्रों में सहयोग बढ़ा रहे हैं। दोनों देशों ने इस बात पर सहमति जताई कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखना उनकी साझा प्राथमिकता है।
यह भी पढ़ें- भारत-ऑस्ट्रेलिया रिश्तों को नई रफ्तार: 'व्यापार समझौते से रक्षा सहयोग तक...', जयशंकर-पेनी वोंग के बीच हुई बैठक
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इसके अलावा प्रधानमंत्री मोदी ने जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोटेगी से भी मुलाकात की। इस दौरान भारत-जापान के 'विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी' को और मजबूत करने पर चर्चा हुई। मोदी ने कहा कि भारत और जापान की साझेदारी इंडो-पैसिफिक ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी शांति और विकास को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रही है।
क्या बोले पीएम मोदी?
पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर इस मुलाकात की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि जापानी विदेश मंत्री से मिलकर उन्हें बहुत खुशी हुई। मोतेगी राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में आयोजित 'क्वाड' (Quad) विदेश मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लेने के लिए भारत आए थे।
क्वाड विदेश मंत्रियों की यह 11वीं बैठक थी। इसकी अध्यक्षता भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने हैदराबाद हाउस में की। इस बैठक में जापान के विदेश मंत्री के साथ ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग और अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो भी मौजूद रहे। बैठक के बाद क्वाड देशों ने मिलकर चार महत्वपूर्ण दस्तावेजों को मंजूरी दी। इनमें एक साझा बयान, एक फैक्ट शीट, हिंद-प्रशांत ऊर्जा सुरक्षा पर संयुक्त बयान और क्वाड महत्वपूर्ण खनिज पहल का ढांचा शामिल है।
जापान के विदेश मंत्री ने क्या कहा?
जापानी विदेश मंत्री मोतेगी ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र के देशों से अपनी मजबूती बढ़ाने की अपील की। उन्होंने बताया कि क्वाड विदेश मंत्रियों की यह बैठक साझेदारों के बीच सहयोग को और आगे ले जाती है। संयुक्त प्रेस बयान के दौरान मोतेगी ने कहा कि सभी नेताओं ने क्षेत्रीय विकास पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने इस बात पर सहमति जताई कि ताकत या दबाव का इस्तेमाल करके मौजूदा स्थिति को एकतरफा बदलने की किसी भी कोशिश का कड़ा विरोध किया जाएगा।
ये भी पढ़ें: अमेरिकी हमलों से भड़का ईरान: गंभीर परिणाम भुगतने की दी चेतावनी, बोला- किसी भी हमले का देंगे मुंहतोड़ जवाब
मोतेगी ने ऊर्जा सुरक्षा पहल को बहुत सही समय पर उठाया गया कदम बताया। उन्होंने कहा कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में ऊर्जा की स्थिर आपूर्ति सुनिश्चित करना बहुत जरूरी है। इसके अलावा, महत्वपूर्ण खनिजों की सप्लाई चेन को मजबूत करने के लिए बनाया गया ढांचा भी एक बड़ा कदम है। उन्होंने कहा कि क्वाड देश मिलकर काम करना चाहते हैं ताकि इस क्षेत्र की क्षमता बढ़े और ऐसा सहयोग हो जिससे इस पूरे क्षेत्र को असली फायदा मिले।
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इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में स्थिरता साझा प्राथमिकता
प्रधानमंत्री मोदी ने ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग से बातचीत में दोनों देशों के बीच बढ़ती 'व्यापक रणनीतिक साझेदारी' पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत और ऑस्ट्रेलिया रक्षा, व्यापार, तकनीक और सप्लाई चेन जैसे अहम क्षेत्रों में सहयोग बढ़ा रहे हैं। दोनों देशों ने इस बात पर सहमति जताई कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखना उनकी साझा प्राथमिकता है।
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इसके अलावा प्रधानमंत्री मोदी ने जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोटेगी से भी मुलाकात की। इस दौरान भारत-जापान के 'विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी' को और मजबूत करने पर चर्चा हुई। मोदी ने कहा कि भारत और जापान की साझेदारी इंडो-पैसिफिक ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी शांति और विकास को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रही है।
क्या बोले पीएम मोदी?
पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर इस मुलाकात की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि जापानी विदेश मंत्री से मिलकर उन्हें बहुत खुशी हुई। मोतेगी राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में आयोजित 'क्वाड' (Quad) विदेश मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लेने के लिए भारत आए थे।
Delighted to receive Mr. Toshimitsu Motegi, Minister for Foreign Affairs of Japan. Reaffirmed the vital role of the India-Japan Special Strategic and Global Partnership in advancing peace, stability and prosperity across the Indo-Pacific and beyond.@moteging pic.twitter.com/39AB2xN6FD
— Narendra Modi (@narendramodi) May 26, 2026
क्वाड विदेश मंत्रियों की यह 11वीं बैठक थी। इसकी अध्यक्षता भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने हैदराबाद हाउस में की। इस बैठक में जापान के विदेश मंत्री के साथ ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग और अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो भी मौजूद रहे। बैठक के बाद क्वाड देशों ने मिलकर चार महत्वपूर्ण दस्तावेजों को मंजूरी दी। इनमें एक साझा बयान, एक फैक्ट शीट, हिंद-प्रशांत ऊर्जा सुरक्षा पर संयुक्त बयान और क्वाड महत्वपूर्ण खनिज पहल का ढांचा शामिल है।
जापान के विदेश मंत्री ने क्या कहा?
जापानी विदेश मंत्री मोतेगी ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र के देशों से अपनी मजबूती बढ़ाने की अपील की। उन्होंने बताया कि क्वाड विदेश मंत्रियों की यह बैठक साझेदारों के बीच सहयोग को और आगे ले जाती है। संयुक्त प्रेस बयान के दौरान मोतेगी ने कहा कि सभी नेताओं ने क्षेत्रीय विकास पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने इस बात पर सहमति जताई कि ताकत या दबाव का इस्तेमाल करके मौजूदा स्थिति को एकतरफा बदलने की किसी भी कोशिश का कड़ा विरोध किया जाएगा।
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मोतेगी ने ऊर्जा सुरक्षा पहल को बहुत सही समय पर उठाया गया कदम बताया। उन्होंने कहा कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में ऊर्जा की स्थिर आपूर्ति सुनिश्चित करना बहुत जरूरी है। इसके अलावा, महत्वपूर्ण खनिजों की सप्लाई चेन को मजबूत करने के लिए बनाया गया ढांचा भी एक बड़ा कदम है। उन्होंने कहा कि क्वाड देश मिलकर काम करना चाहते हैं ताकि इस क्षेत्र की क्षमता बढ़े और ऐसा सहयोग हो जिससे इस पूरे क्षेत्र को असली फायदा मिले।