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अमेरिकी हमलों से भड़का ईरान: गंभीर परिणाम भुगतने की दी चेतावनी, बोला- किसी भी हमले का देंगे मुंहतोड़ जवाब
Tue, 26 May 2026 07:55 PM IST
अमन तिवारी
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, दुबई
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, दुबई
Published by: अमन तिवारी
Updated Tue, 26 May 2026 07:55 PM IST
सार
ईरान ने अमेरिकी हमलों को संघर्ष विराम का उल्लंघन बताते हुए जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है। हालांकि, होर्मुज जलडमरूमध्य और बंदरगाहों की नाकेबंदी को लेकर बातचीत जारी है।
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अमेरिका-ईरान
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
ईरान ने सोमवार को हुए अमेरिकी हमलों की कड़े शब्दों में निंदा की है। ईरान का कहना है कि ये हमले अमेरिका के बुरे इरादे और अविश्वसनीयता को दर्शाते हैं। यह सब ऐसे समय में हो रहा है जब दोनों देशों के बीच युद्ध खत्म करने के लिए बातचीत चल रही है।
अमेरिका ने क्या कहा?
वहीं, अमेरिकी सेना ने दक्षिण ईरान में किए गए इन हमलों को रक्षात्मक बताया है। अमेरिका का कहना है कि उन्होंने मिसाइल लॉन्च करने वाली जगहों और बारूदी सुरंग बिछाने वाली नावों को निशाना बनाया। अमेरिका ने यह भी दावा किया कि हफ्तों से चल रहे संघर्ष विराम को देखते हुए उसने काफी संयम से काम लिया है।
ईरान ने दी चेतावनी
दूसरी ओर, ईरान के विदेश मंत्रालय ने इन हमलों को संघर्ष विराम का सीधा उल्लंघन बताया है। ईरान ने चेतावनी दी है कि इन हमलों से होने वाले सभी परिणामों की जिम्मेदारी वॉशिंगटन की होगी। ईरान ने अपने बयान में साफ कहा कि वह किसी भी आक्रामक कार्रवाई का जवाब दिए बिना नहीं रहेगा। इस बीच, ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड ने दावा किया कि उन्होंने अपनी हवाई सीमा में घुसने वाले ड्रोन और एक लड़ाकू विमान को मार गिराया और उन्हें खदेड़ दिया। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि यह घटना ठीक किस समय हुई।
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इन हमलों का असर चल रही बातचीत पर क्या पड़ेगा, यह अभी साफ नहीं है। यह तनाव तब बढ़ा है जब ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालिबाफ कतर में बातचीत के लिए मौजूद थे। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी सोमवार को कहा था कि बातचीत अच्छी दिशा में आगे बढ़ रही है। सात अप्रैल से शुरू हुआ संघर्ष विराम अब तक काफी हद तक बना हुआ था, लेकिन इन हमलों ने इसे कमजोर कर दिया है।
ये भी पढ़ें: बकरीद से पहले हमलों पर बिफरा ईरान: खामेनेई बोले-पश्चिम एशिया में अमेरिकी सेना को कहीं पनाह नहीं, बढ़ेगा तनाव?
बातचीत का एक मुख्य हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य है। यह दुनिया के कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति का सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता है। युद्ध शुरू होने के बाद ईरान ने इसे बंद कर दिया था, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था को बड़ा झटका लगा। अब ईरान चाहता है कि अमेरिका उसके बंदरगाहों की सैन्य नाकेबंदी खत्म करे, जो 17 अप्रैल से जारी है।
संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन ने दी चेतावनी
होर्मुज के बंद होने से दुनिया भर में खाद की आपूर्ति भी बुरी तरह प्रभावित हुई है। संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन (FAO) ने चेतावनी दी है कि यह संकट वैश्विक खाद्य प्रणाली के लिए एक बड़ा झटका है। इस बीच, डोनाल्ड ट्रंप ने समझौते में एक नया मोड़ जोड़ दिया है। वह चाहते हैं कि सऊदी अरब और पाकिस्तान जैसे देश भी अब्राहम समझौते का हिस्सा बनें, ताकि इस्रायल के साथ संबंध सामान्य हो सकें। ट्रंप ने यह भी संकेत दिया है कि भविष्य में ईरान भी इस समझौते में शामिल हो सकता है।
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अमेरिका ने क्या कहा?
वहीं, अमेरिकी सेना ने दक्षिण ईरान में किए गए इन हमलों को रक्षात्मक बताया है। अमेरिका का कहना है कि उन्होंने मिसाइल लॉन्च करने वाली जगहों और बारूदी सुरंग बिछाने वाली नावों को निशाना बनाया। अमेरिका ने यह भी दावा किया कि हफ्तों से चल रहे संघर्ष विराम को देखते हुए उसने काफी संयम से काम लिया है।
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ईरान ने दी चेतावनी
दूसरी ओर, ईरान के विदेश मंत्रालय ने इन हमलों को संघर्ष विराम का सीधा उल्लंघन बताया है। ईरान ने चेतावनी दी है कि इन हमलों से होने वाले सभी परिणामों की जिम्मेदारी वॉशिंगटन की होगी। ईरान ने अपने बयान में साफ कहा कि वह किसी भी आक्रामक कार्रवाई का जवाब दिए बिना नहीं रहेगा। इस बीच, ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड ने दावा किया कि उन्होंने अपनी हवाई सीमा में घुसने वाले ड्रोन और एक लड़ाकू विमान को मार गिराया और उन्हें खदेड़ दिया। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि यह घटना ठीक किस समय हुई।
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इन हमलों का असर चल रही बातचीत पर क्या पड़ेगा, यह अभी साफ नहीं है। यह तनाव तब बढ़ा है जब ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालिबाफ कतर में बातचीत के लिए मौजूद थे। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी सोमवार को कहा था कि बातचीत अच्छी दिशा में आगे बढ़ रही है। सात अप्रैल से शुरू हुआ संघर्ष विराम अब तक काफी हद तक बना हुआ था, लेकिन इन हमलों ने इसे कमजोर कर दिया है।
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बातचीत का एक मुख्य हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य है। यह दुनिया के कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति का सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता है। युद्ध शुरू होने के बाद ईरान ने इसे बंद कर दिया था, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था को बड़ा झटका लगा। अब ईरान चाहता है कि अमेरिका उसके बंदरगाहों की सैन्य नाकेबंदी खत्म करे, जो 17 अप्रैल से जारी है।
संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन ने दी चेतावनी
होर्मुज के बंद होने से दुनिया भर में खाद की आपूर्ति भी बुरी तरह प्रभावित हुई है। संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन (FAO) ने चेतावनी दी है कि यह संकट वैश्विक खाद्य प्रणाली के लिए एक बड़ा झटका है। इस बीच, डोनाल्ड ट्रंप ने समझौते में एक नया मोड़ जोड़ दिया है। वह चाहते हैं कि सऊदी अरब और पाकिस्तान जैसे देश भी अब्राहम समझौते का हिस्सा बनें, ताकि इस्रायल के साथ संबंध सामान्य हो सकें। ट्रंप ने यह भी संकेत दिया है कि भविष्य में ईरान भी इस समझौते में शामिल हो सकता है।