हैलो! मैं नरेंद्र मोदी बोल रहा हूं... सिस्टर आप जैसी तपस्वी कोरोना मरीजों का डर कैसे दूर करती हैं
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कोरोना से जंग लड़ रहे योद्धाओं का मनोबल बढ़ाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद सबको फोन कर रहे हैं। 21 दिनों के लॉकडाउन में चिकित्सा सेवा समेत कई जरूरी सेवाओं को लोगों की मदद के लिए जारी रखा गया है। इनमें डॉक्टर, नर्स, लैब टेक्नीशियन और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े लोग शामिल हैं।
ऐसे कर्मचारियों का हौसला बढ़ाने के लिए पीएम मोदी ने पुणे के एक सरकारी अस्पताल में पूरी निष्ठा और लगन के साथ जुटी नर्स छाया जगताप से बात की। पीएम मोदी ने सिस्टर से पूछा कि जब कभी भी कोई मरीज कोरोना से पीड़ित आता है तो वह काफी डरा हुआ होता होगा? पीएम ने आभार जताते हुए कहा, आप जैसी नर्स, डॉक्टर और चिकित्साकर्मी सही मायनों में तपस्वी हैं, जो पूरे देश में मरीजों की सेवा कर रहे हैं।
पीएम के इस सवाल पर डॉ. नायडू अस्पताल में ड्यूटी कर रहीं सिस्टर छाया ने कहा, हां बेहद डरे होते हैं। एडमिट करने के लिए बोलते ही वह और डर जाते हैं। इसके बाद हम उनसे बात करते हैं और उनका डर खत्म करने की कोशिश करते हैं। हम उनको समझाते हैं कि अगर उनकी पॉजिटिव आए तो भी डरने की जरूरत नहीं है।
उन्होंने बताया कि इस अस्पताल से सात मरीज अच्छे होकर जा चुके हैं। सिस्टर छाया ने बताया कि हर मरीज ठीक हो सकता है बस वह डॉक्टरों का साथ दे। उन्होंने बताया कि अभी नौ मरीज हैं उनकी तबीयत भी अच्छी है। ऐसे में डरने की बात नहीं है। पीएम की बातचीत का यह ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है।
छाया से मराठी में बातचीत की शुरुआत करते हुए पीएम ने उनसे हालचाल पूछा। फोन पर पांच मिनट की बातचीत में मोदी ने सिस्टर से पूछा कि वह अपना ध्यान अच्छे से रख रही हैं या नहीं? इस पर सिस्टर ने उन्हें बताया कि वह पूरी तरह से स्वस्थ हैं और मरीजों के साथ ही अपना भी ध्यान रख रही हैं। बातचीत के आखिर में नर्स छाया बेहद भावुक होते हुए कहा, हमारे लिए तो आप भी देवता हैं। पूरे देश को आपके जैसा प्रधानमंत्री मिलना चाहिए।
मरीजों की देखभाल के लिए आप परिवार को कैसे मना पाईं
पीएम मोदी ने उनसे पूछा कि वह अपने परिवार को यह मनाने में कैसे सफल हुईं कि वह कोरोना के मरीजों की देखभाल करने जा रही हैं। उन्होंने पूछा कि जब आप अस्पताल के लिए निकलती हैं तो आपके परिवार के सदस्यों को चिंता तो होती होगी।
इस पर सिस्टर छाया ने कहा जी सर, चिंता तो होती है, लेकिन देश जिस दौर से गुजर रहा है उसमें हमारा काम पहले जरूरी है। हमें लोगों की मदद के लिए आगे आना ही होगा। मेरा परिवार समझता है कि मेरी जरूरत पहले क्या है।
सिस्टर बोलीं, यह वक्त कोरोना को भगाने का है, देश को जिताने का है
प्रधानमंत्री मोदी ने सिस्टर से पूछा कि मरीज के परिवार वाले नाराजगी जाहिर करते होंगे तो उन्होंने कहा, हम मरीजों के परिवार वालों को अंदर नहीं आने देते हैं। प्रधानमंत्री ने पूछा कि देशभर में काम करने वाली महिला और पुरुष नर्सों के लिए सिस्टर छाया का क्या संदेश है तो सिस्टर छाया ने कहा-डरने का नहीं, काम करने का। यह समय कोरोना जैसी बीमारी को भगाने का है और देश को जिताने का है।
वुहान से लौटे कश्मीरी छात्र से पीएम ने की बात
प्रधानमंत्री ने चीन के वुहान से लौटे 60 कश्मीरी छात्रों में से एक छात्र निजामुर रहमान से बात की। वुहान से लौटे सभी छात्र वहां एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे थे। निजामुर कश्मीर के कसकूट बनिहाल के रहने वाले हैं। रहमान ने पीएम को बताया कि वुहान में स्थिति भयंकर है।
रहमान ने पीएम का शुक्रिया करते हुए कहा कि समय रहते उनको और उनके मित्रों को वुहान शहर से सुरक्षित निकाल लिया गया। जब पीएम मोदी ने रहमान से अपना अनुभव साझा करने को कहा कि तो निजाम ने बताया कि 14 दिन अलग थलग रहने के दौरान उन्हें कोई समस्या नही हुई, उन्हें अच्छा खाना दिया गया, खेलने को गेम्स दिए गए। इसलिए जो लोग क्वारंटीन के दौरान रहते हैं वे न डरें।
आयुष पेशेवरों से भी की चर्चा
पीएम ने शनिवार को आयुष पेशेवरों से भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से चर्चा की। प्रधानमंत्री ने आयुष दवा निर्माताओं को अपने संसाधनों का उपयोग कर सैनिटाइजर जैसी आवश्यक वस्तुओं के उत्पादन का सुझाव दिया। साथ ही टेलीमेडिसिन के प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर महामारी से लड़ने के लिए जागरूकता फैलाने के लिए कहा है।
उन्होंने कहा, इस महामारी की चुनौती से निपटने के लिए देश को सारे स्वास्थ्य सेवा कर्मचारियों का उपयोग करने के लिए तैयार रहना चाहिए। सरकार जरूरत पड़ने पर आयुष से जुड़े निजी डॉक्टरों से भी मदद लेगी।