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अध्ययन: आयुष्मान से राहत...कैंसर के जानलेवा होने से पहले इलाज मिलने के मामले 33% बढ़े, पीजीआईएमईआर का खुलासा
Tue, 24 Dec 2024 05:18 AM IST
दीपक कुमार शर्मा
एजेंसी, नई दिल्ली
एजेंसी, नई दिल्ली
Published by: दीपक कुमार शर्मा
Updated Tue, 24 Dec 2024 05:18 AM IST
सार
पीजीआईएमईआर के शोधकर्ताओं ने यह भी पाया कि 2018 में इस योजना के शुरू होने के बाद से कैंसर से पीड़ित मरीजों में 30 दिनों के अंदर वक्त पर इलाज शुरू होने की संभावना 1995 और 2017 के बीच जांच के बाद सामने आये मरीजों के मुकाबले 36 फीसदी अधिक रही।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला/एजेंसी
विस्तार
आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (पीएम-जेएवाई) के पंजीकरण ने कैंसर के मरीजों का इलाज वक्त पर शुरू करने में खासी मदद की है। इलाज वक्त से शुरू होने के मामलों में 33 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। चंडीगढ़ के पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (पीजीआईएमईआर) के शोधकर्ताओं के अध्ययन में यह खुलासा हुआ है।
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शोधकर्ताओं के अध्ययन के नतीजे द लैंसेट रीजनल हेल्थ साउथ ईस्ट एशिया में प्रकाशित हुए हैं। इनके मुताबिक पीएम-जेएवाई की शुरुआत के परिणामस्वरूप कैंसर के जानलेवा होने से पहले इलाज से अहम सुधार दर्ज किया है। पीजीआईएमईआर के शोधकर्ताओं ने यह भी पाया कि 2018 में इस योजना के शुरू होने के बाद से कैंसर से पीड़ित मरीजों में 30 दिनों के अंदर वक्त पर इलाज शुरू होने की संभावना 1995 और 2017 के बीच जांच के बाद सामने आये मरीजों के मुकाबले 36 फीसदी अधिक रही। इसके लिए शोधकर्ताओं ने छह राज्यों के सात प्रमुख कैंसर अस्पतालों से अक्तूबर 2020 और मार्च 2022 के बीच भर्ती 6,700 कैंसर मरीजों की प्रतिक्रियाओं का विश्लेषण किया।
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योजना का सकारात्मक असर
शोधकर्ताओं ने देखा की बीते कुछ वर्षों के मुकाबले कैंसर का इलाज शुरू करने में लगने वाले वक्त में कमी दर्ज की गई है। इलाज के मामले में हीलाहवाली न बरतने और कैंसर का पता लगने के बाद जल्द ही इलाज शुरू करने में यह तेजी एबीपीएमजेएवाई का लाभ उठाने वाले मरीजों से अधिक देखी गई।
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पता लगने के 20 दिन बाद इलाज शुरू करते हैं मरीज
मरीजों का साक्षात्कार 2018 में विकसित और ब्रिटिश मेडिकल जर्नल ओपन में प्रकाशित एक अध्ययन में बताए गए प्रोटोकॉल नेशनल कैंसर डेटाबेस फॉर कॉस्ट एंड क्वालिटी ऑफ लाइफ के हिस्से के तहत लिया गया। इसमें मरीजों की सेहत की देखभाल में आने वाली लागत और जीवन की गुणवत्ता सहित कई पहलुओं पर बात की गई। कुल मिलाकर जांच के दौरान बीमारी का पता लगने के बाद मरीजों ने कैंसर का इलाज शुरू करने से पहले 20 दिन का वक्त लिया। मतलब 20 दिन बाद इलाज शुरू किया।