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महंगे कच्चे तेल से पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ीं
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Updated Thu, 11 Jan 2018 04:58 AM IST
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अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 68 डॉलर प्रति बैरल से भी ऊपर जाने के चलते घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल की कीमतें आसमान पर पहुंच गई हैं। इसी वजह से बुधवार को दिल्ली में पेट्रोल की कीमत जहां 70.62 रुपये पर चली गईं, वहीं डीजल की कीमत 60.81 रुपये पर पहुंच गई। उल्लेखनीय है कि दिल्ली के इतिहास में डीजल की कीमत पहली बार इस स्तर पर पहुंची है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इन ईंधनों की कीमत आसमान पर चढ़ने के लिए भले ही कच्चे तेल की कीमत में बढोतरी को जिम्मेदार ठहराया जा रहा हो, लेकिन केंद्र और राज्य सरकारें भी इन दोनों ईंधनों पर भारी भरकम कर थोपे हुए हैं। इस समय केंद्र सरकार जहां पेट्रोल पर प्रति लीटर करीब 20 रुपये का कर वसूलती है, वहीं डीजल पर भी 15.33 रुपये का कर है।
बताया जाता है कि इस समय कच्चे तेल की कीमत चढ़ने के पीछे ओपेक देशों द्वारा कच्चे तेल के उत्पादन को नियंत्रित करना है।
पढ़ें- छत्तीसगढ़ सरकार ने पेट्रोल-डीजल पर VAT घटाने से किया इंकार, नहीं मानी केंद्र सरकार की सलाह
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तेल उत्पादन करने वाले देशों के संगठन (ओपेक) देश लगातार कच्चे तेल के उत्पादन को अपने हिसाब से ज्यादा और कम कर रहे हैं। इसके चलते बढ़ती मांग और कम आपूर्ति के चलते कच्चे तेल के दाम तेजी से बढ़ने लगे हैं। भारत में कुल खपत का करीब दो तिहाई हिस्सा कच्चा तेल बाहर से खरीदना पड़ता है, इसलिए यहां घरेलू बाजार में भी कीमतें उसी हिसाब से बढ़ रही हैं।
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विशेषज्ञों का कहना है कि इन ईंधनों की कीमत आसमान पर चढ़ने के लिए भले ही कच्चे तेल की कीमत में बढोतरी को जिम्मेदार ठहराया जा रहा हो, लेकिन केंद्र और राज्य सरकारें भी इन दोनों ईंधनों पर भारी भरकम कर थोपे हुए हैं। इस समय केंद्र सरकार जहां पेट्रोल पर प्रति लीटर करीब 20 रुपये का कर वसूलती है, वहीं डीजल पर भी 15.33 रुपये का कर है।
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बताया जाता है कि इस समय कच्चे तेल की कीमत चढ़ने के पीछे ओपेक देशों द्वारा कच्चे तेल के उत्पादन को नियंत्रित करना है।
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तेल उत्पादन करने वाले देशों के संगठन (ओपेक) देश लगातार कच्चे तेल के उत्पादन को अपने हिसाब से ज्यादा और कम कर रहे हैं। इसके चलते बढ़ती मांग और कम आपूर्ति के चलते कच्चे तेल के दाम तेजी से बढ़ने लगे हैं। भारत में कुल खपत का करीब दो तिहाई हिस्सा कच्चा तेल बाहर से खरीदना पड़ता है, इसलिए यहां घरेलू बाजार में भी कीमतें उसी हिसाब से बढ़ रही हैं।