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शराब से दूरी बना दिया बहुतों को रोगी, हॉस्पिटल में लंबी लग रही है लाइन
राकेश कुमार गौंड़/पडरौना
Updated Wed, 31 Aug 2016 05:20 AM IST
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पड़ोसी प्रांत बिहार में शराब पर पूर्णतया प्रतिबंध से शराब का सेवन करने वाले ज्यादातर लोग बीमार पड़ने लगे हैं। बिहार के ऐसे बहुत से लोग पडरौना नगर के कुछ निजी डॉक्टरों से इलाज करा रहे हैं। शराब से वंचित बिहार के करीब 100 लोग इन अस्पतालों में इलाज करा रहे है। ऐसे लोगों में धड़कन, घबराहट और बेचैनी के साथ हाथ-पैर कांपने, मूर्छा जैसी स्थिति उत्पन्न हो जा रही है।
बिहार में पंचायत चुनाव से पूर्व ही सरकार ने शराब की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया है। शराब पर प्रतिबंध लगने से इसके शौकीनों में बेचैनी के साथ अन्य बीमारियां पनपने लगी। बिहार के सीमावर्ती इलाकों के ऐसे रोगी कुशीनगर जनपद के बाजारों, कस्बों के अलावा पडरौना नगर में इलाज कराने पंहुच रहे हैं।
इस रोग को चिकित्सकीय शब्दों में ‘एल्कोहल विड्रॉल सिंड्रोम’ कहते हैं। ऐसे मरीजों का इलाज करने वाले कुछ डॉक्टरों ने अपना नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर बताया कि उनके यहां ऐसे लोगों की संख्या 50 से लेकर 100 तक है, जिनका इलाज किया जा रहा है।
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बिहार में पंचायत चुनाव से पूर्व ही सरकार ने शराब की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया है। शराब पर प्रतिबंध लगने से इसके शौकीनों में बेचैनी के साथ अन्य बीमारियां पनपने लगी। बिहार के सीमावर्ती इलाकों के ऐसे रोगी कुशीनगर जनपद के बाजारों, कस्बों के अलावा पडरौना नगर में इलाज कराने पंहुच रहे हैं।
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इस रोग को चिकित्सकीय शब्दों में ‘एल्कोहल विड्रॉल सिंड्रोम’ कहते हैं। ऐसे मरीजों का इलाज करने वाले कुछ डॉक्टरों ने अपना नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर बताया कि उनके यहां ऐसे लोगों की संख्या 50 से लेकर 100 तक है, जिनका इलाज किया जा रहा है।
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जानें क्या कहते हैं एक्सपर्ट
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वरिष्ठ फिजिशियन, संयुक्त जिला चिकित्सालय डॉ. राजेश कुमार ने कहा कि नियमित शराब का सेवन करने वाले लोगों को अचानक शराब मिलनी बंद हो जाए तो उनमें हाथ-पैर कांपना, मूर्छा आना, घबराहट, बेचैनी, अनायास घर से बाहर निकल जाना और पागलपन जैसी स्थिति उत्पन्न हो जाती है। ऐसे लोगों को नशा निवारण केंद्र में रखा जाता है। उन्हें घबराहट-बेचैनी नियंत्रित करने और नींद की दवा दी जाती है। इस लत को छुड़ाने में 15 दिन से एक माह का समय लगता है।
फिजिशियन डॉ. संदीप अरुण श्रीवास्तव ने कहा कि नियमित शराब का सेवन करने वाले व्यक्ति को यदि न मिले तो ऐसी स्थिति आती है। इसे एल्कोहल विड्रॉल सिंड्रोम कहते हैं। ऐसे लोग शराब पिला देने पर नार्मल हो जाते हैं। इसकी लत छुड़ाने के लिए धीरे-धीरे सेवन की मात्रा कम कराई जाती है। साथ में घबराहट, बेचैनी आदि लक्षणों को नियंत्रित करने के लिए दवा दी जाती है। क्योंकि शराब ज्यादा पीने या अचानक छोड़ने से लीवर, ब्रेन, किडनी और हर्ट प्रभावित होता है।
फिजिशियन डॉ. संदीप अरुण श्रीवास्तव ने कहा कि नियमित शराब का सेवन करने वाले व्यक्ति को यदि न मिले तो ऐसी स्थिति आती है। इसे एल्कोहल विड्रॉल सिंड्रोम कहते हैं। ऐसे लोग शराब पिला देने पर नार्मल हो जाते हैं। इसकी लत छुड़ाने के लिए धीरे-धीरे सेवन की मात्रा कम कराई जाती है। साथ में घबराहट, बेचैनी आदि लक्षणों को नियंत्रित करने के लिए दवा दी जाती है। क्योंकि शराब ज्यादा पीने या अचानक छोड़ने से लीवर, ब्रेन, किडनी और हर्ट प्रभावित होता है।