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पेगासस कांड: जांच समिति को अब तक सिर्फ दो लोगों ने दिए फोन, आरोप लगाकर भाग रहा विपक्ष?

Fri, 04 Feb 2022 07:51 AM IST
सुरेंद्र जोशी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: सुरेंद्र जोशी Updated Fri, 04 Feb 2022 07:51 AM IST
सार

इस जासूसी कांड को लेकर देश में विपक्ष व कई अन्य संगठन भारी बवाल मचा रहे हैं, लेकिन उच्च स्तरीय जांच में मदद के लिए आगे नहीं आ रहे हैं।

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Pegasus spyware case: So far only two devices given to the Supreme Courts inquiry committee
पेगासस जासूसी कांड - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

इस्राइली कंपनी एनएसओ के पेगासस स्पाईवेयर (Pegasus spyware) के जरिए सरकार द्वारा नेताओं, पत्रकारों व एक्टिविस्ट की कथित जासूसी की जांच कर रही सुप्रीम कोर्ट की समिति को अब तक सिर्फ दो लोगों ने अपने मोबाइल जांच के लिए सौंपे हैं। समिति ने लोगों से अपील की है कि वे अंतिम तिथि आठ फरवरी तक जांच के लिए मोबाइल सौंप दें। इससे लगता है कि जासूसी को लेकर शोर मचाने वाले इसकी जांच से कतरा रहे हैं। सवाल उठ रहा है कि क्या विपक्ष भी आरोप लगाकर भाग रहा है?

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इस कथित जासूसी कांड को लेकर देश में विपक्ष व कई अन्य संगठन भारी बवाल मचा रहे हैं, लेकिन उच्च स्तरीय जांच में मदद के लिए आगे नहीं आ रहे हैं। जांच समिति को शिकायतों की जांच के लिए मोबाइल फोन चाहिए। पहले 7 जनवरी मोबाइल सौंपने की अंतिम तिथि थी। उसे बढ़ाकर 8 फरवरी किया गया है, लेकिन अब तक समिति को मात्र दो लोगों ने जांच के लिए अपने फोन सौंपे हैं। 
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सुप्रीम कोर्ट ने इस बहुचर्चित मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की है। समिति का कहना है कि उसे जांच के लिए अब तक मात्र दो उपकरण (मोबाइल फोन आदि) मिले हैं। समिति ने लोगों को जांच के लिए अपने फोन सौंपने का आठ फरवरी तक का वक्त दिया है। जांच समिति ने 3 फरवरी को सार्वजनिक सूचना जारी कर लोगों से अपील की है कि वे मोबाइल सौंपें।
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पिछले साल फ्रांस स्थित पत्रकारों के एक समूह ने 50 हजार फोन नंबरों की एक लीक हुई सूची जारी की थी। दुनियाभर के ये वो नंबर बताए गए थे, जिनकी इस्राइली कंपनी एनएसओ के पेगासस स्पाईवेयर के ग्राहकों द्वारा निगरानी की गई थी। इसमें भारत के भी कुछ लोगों के नाम होने का दावा किया गया है। इसे लेकर विपक्ष व अन्य संगठनों ने काफी शोर मचाया था। बीते दिनों आई एक अन्य मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि भारत सरकार ने भी यह स्पाईवेयर खरीदा है। सरकार ने इसका खंडन किया है और कहा है कि मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट की कमेटी कर रही है। 

जांच समिति में गांधीनगर स्थित फोरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय के डीन नवीन कुमार चौधरी, केरल के अमृता विश्व विद्यापीठम के प्रोफेसर प्रभाहरण पी, और आईआईटी बॉम्बे में संस्थान के अध्यक्ष और एसोसिएट प्रोफेसर अश्विन अनिल गुमास्ते शामिल हैं।


आईटी मंत्री वैष्णव ने कहा था- भारत को बदनाम करने की साजिश
पेगासस मामले में बवाल मचने पर 19 जुलाई, 2021 को केंद्रीय आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने संसद में उन रिपोर्टों का खंडन किया था, जिनमें कहा गया था कि केंद्र सरकार ने पत्रकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, विपक्षी नेताओं तथा मंत्रियों के फोन हैक करने व उनकी जासूसी के लिए पेगासस स्पाईवेयर का इस्तेमाल किया। वैष्णव ने जासूसी मामले को भारतीय लोकतंत्र और संवैधानिक संस्थानों को बदनाम करने की साजिश बताया था। 

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