{"_id":"654e7954ad902995d0031d74","slug":"parliamentary-standing-committee-recommends-to-government-regarding-new-criminal-laws-2023-11-11","type":"story","status":"publish","title_hn":"Criminal Laws: संसदीय स्थायी समिति ने सरकार से की सिफारिश, धारा- 377 को लेकर कही यह बात","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
Criminal Laws: संसदीय स्थायी समिति ने सरकार से की सिफारिश, धारा- 377 को लेकर कही यह बात
Sat, 11 Nov 2023 12:11 AM IST
जलज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: जलज मिश्रा
Updated Sat, 11 Nov 2023 12:11 AM IST
सार
भाजपा सांसद बृजलाल की अध्यक्षता वाली समिति ने बीएनएस सहित अन्य दो कानूनों की जांच की। यह तीनों कानून पुराने कानूनों की जगह लेंगे। समिति ने शुक्रवार को अपनी रिपोर्ट राज्यसभा को सौंपी।
विज्ञापन
Court Room
- फोटो : Social Media
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
गृह मामलों की संसदीय स्थायी समिति ने सरकार से सिफारिश की है। समिति का कहना है कि भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) में नाबालिगों के साथ शारीरिक संबंध और पाशविक कृत्य करने वाले आरोपियों के खिलाफ धारा- 377 के प्रवाधानों को बरकरार रखा जाए। इसके अलावा, समिति का कहना है कि आईपीसी प्रावधान को विवाह की संस्था की रक्षा के लिए संहिता में बरकरार रखा जाना चाहिए।
राज्यसभा को सौंपी रिपोर्ट
भाजपा सांसद बृजलाल की अध्यक्षता वाली समिति ने बीएनएस सहित अन्य दो कानूनों की जांच की। यह तीनों कानून पुराने कानूनों की जगह लेंगे। समिति ने शुक्रवार को अपनी रिपोर्ट राज्यसभा को सौंपी। संसदीय पैनल ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की बेंच ने सर्वसम्मति से माना कि आईपीसी की धारा- 377 संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 19 और 21 का उल्लंघन है। भारतीय न्याय संहिता में पुरुष, महिला और ट्रांसजेंडर के खिलाफ यौन अपराध के लिए कोई प्रावधान नहीं किया गया है।
हत्या की सजा को लेकर भी सिफारिश
हत्या की सजा के मामले में समिति ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की सिफारिश के आधार पर धारा 101 (2) के तहत अपराध के लिए एक नया प्रावधान शामिल है। समिति ने सिफारिश की कि धारा से सात साल की सजा को हटाया जाए। समिति का कहना है कि मामले में देश के अटॉर्नी जनरल और सॉलिसिटर जनरल की राय ली जा सकती है।
विज्ञापन
विज्ञापन
राज्यसभा को सौंपी रिपोर्ट
भाजपा सांसद बृजलाल की अध्यक्षता वाली समिति ने बीएनएस सहित अन्य दो कानूनों की जांच की। यह तीनों कानून पुराने कानूनों की जगह लेंगे। समिति ने शुक्रवार को अपनी रिपोर्ट राज्यसभा को सौंपी। संसदीय पैनल ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की बेंच ने सर्वसम्मति से माना कि आईपीसी की धारा- 377 संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 19 और 21 का उल्लंघन है। भारतीय न्याय संहिता में पुरुष, महिला और ट्रांसजेंडर के खिलाफ यौन अपराध के लिए कोई प्रावधान नहीं किया गया है।
विज्ञापन
हत्या की सजा को लेकर भी सिफारिश
हत्या की सजा के मामले में समिति ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की सिफारिश के आधार पर धारा 101 (2) के तहत अपराध के लिए एक नया प्रावधान शामिल है। समिति ने सिफारिश की कि धारा से सात साल की सजा को हटाया जाए। समिति का कहना है कि मामले में देश के अटॉर्नी जनरल और सॉलिसिटर जनरल की राय ली जा सकती है।
विज्ञापन