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Covid Second Wave: संसदीय समिति ने कहा- केंद्र सरकार समय पर कदम उठाती तो बच जातीं कई जानें

Wed, 14 Sep 2022 05:52 AM IST
देव कश्यप अमर उजाला ब्यूरो/एजेंसी, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो/एजेंसी, नई दिल्ली। Published by: देव कश्यप Updated Wed, 14 Sep 2022 05:52 AM IST
सार

समिति ने कहा कि महामारी की दूसरी लहर बड़ी संख्या में मामलों, मौतें, अस्पतालों में ऑक्सीजन, बेड और जरूरी दवाओं की कमी, आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं के ध्वस्त होने, ऑक्सीजन सिलिंडरों व दवाओं की कालाबाजारी और जमाखोरी जैसे हालात लेकर आई।

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Parliamentary panel pulls up Centre on handling of COVID second wave
संसद भवन (सांकेतिक तस्वीर)। - फोटो : पीटीआई (फाइल फोटो)

विस्तार

कोविड महामारी की दूसरी लहर में कई जानें बच जातीं अगर केंद्र सरकार समय पर कदम उठाती लेकिन वह हालात की गंभीरता नहीं समझ सकी। यह दावा स्वास्थ्य पर बनी संसदीय स्थायी समिति ने राज्यसभा में अपनी 137वीं रिपोर्ट में किया है।

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समिति ने कहा कि महामारी की दूसरी लहर बड़ी संख्या में मामलों, मौतें, अस्पतालों में ऑक्सीजन, बेड और जरूरी दवाओं की कमी, आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं के ध्वस्त होने, ऑक्सीजन सिलिंडरों व दवाओं की कालाबाजारी और जमाखोरी जैसे हालात लेकर आई। इसके बावजूद सरकार कोरोना वायरस के नये स्वरूप की संक्रामकता व घातक असर को नहीं पहचान सकी। अगर महामारी को रोकने के उचित रणनीतिक कदम उठाए गए होते तो परिणाम इतने भयानक नहीं होते। सरकार को पहली लहर के बाद जब मौतों की संख्या घटने लगी थी तभी से कड़ी निगरानी जारी रखनी चाहिए थी।
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राज्य भी अक्षम साबित हुए
समिति ने कहा, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने राज्यों को कोविड की निगरानी और आपात हालात के लिए स्थानीय रणनीति बनाने को कहा था। फिर भी राज्य अक्षम साबित हुए। यह भी वजह है कि महामारी की दूसरी लहर में पांच लाख से ज्यादा लोग मारे गए।
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बिना ऑक्सीजन लोग मर गए, मंत्रालय का इसे नकारना दुर्भाग्यपूर्ण
ऑक्सीजन की कमी से मारे गए लोगों के मामले में भी समिति ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को फटकार लगाई। उसने लिखा कि इन मौतों को मंत्रालय द्वारा नकारना दुर्भाग्यपूर्ण है। यह व्यथित करता है। कई मामलों में नागरिक अपने मरते परिजनों के लिए ऑक्सीजन की विनती करते हुए लाइनों में खड़े रह गए। कुछ घंटों की ऑक्सीजन बची देख मदद की गुहार तक लगाई। कई अस्पतालों में ऑक्सीजन नहीं थी। प्रेस ने भी इनकी खबरें दीं।

रिपोर्ट के चार बड़े तथ्य

खोखला आश्वासन : समिति ने खुलासा किया कि अपनी 123वीं रिपोर्ट में उसने सरकार को मेडिकल ऑक्सीजन के सिलिंडरों व अस्पतालों में सप्लाई की कमी पर चेताया था। बेहद निराश होकर कहना पड़ रहा है कि स्वास्थ्य मंत्रालय ने ऑक्सीजन सप्लाई व सिलिंडरों के मामले में देश को आत्मनिर्भर बताया। उसके खोखले आश्वासन का खुलासा महामारी की दूसरी लहर में बेहद क्रूरता से हुआ।

वितरण में भी फेल:  जिन राज्यों में ऑक्सीजन की मांग बढ़ी, वहां भी सरकार प्रबंध करवाने, जरूरी आपूर्ति व वितरण जारी रखने में फेल रही। मेडिकल ऑक्सीजन उत्पादन, उपलब्धता, अस्पतालों में वेंटिलेटर बेड आदि पर खराब निगरानी ने हालात और बिगाड़े।

20 राज्यों ने नहीं मानी ऑक्सीजन की कमी से मौत: केंद्र को सौंपी रिपोर्ट में 20 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में से किसी ने भी ऑक्सीजन की कमी से मौतें होना नहीं माना। इस पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय का भी ऑक्सीजन की कमी से कोई मौत न मानना दुर्भाग्यपूर्ण है। समिति ने कहा, यह साबित होता है कि सरकार में संवेदना नहीं थी।

गाइडलाइन ही नहीं दी, कैसे साबित होती मौत? : ऑक्सीजन की कमी पर मौत की पहचान के लिए सरकार ने राज्यों को निश्चित गाइडलाइन नहीं दी। किसी भी चिकित्सा दस्तावेज में मौत की वजह ऑक्सीजन की कमी लिखी ही नहीं गई।



चार सिफारिशें : ऑडिट करवाकर मुआवजा दे सरकार

  • मंत्रालय ऑक्सीजन की कमी से हुई मौतों का ऑडिट करवाए
  • इन सभी मामलों का राज्यों के साथ मिलकर मजबूत दस्तावेजीकरण करे
  • गहन जांच जरूरी है, ताकि मारे गए नागरिकों के परिजनों को मुआवजा मिले
  • सरकारी एजेंसियों की जवाबदेही भी इसी से तय हो सकेगी


कैंसर रोकथाम के लिए मजबूत डाटाबेस जरूरी  
नई दिल्ली। संसद की स्थायी समिति ने कैंसर को अधिसूचित बीमारी (नोटिफाइड डिजीज) घोषित करने की सिफारिश की है। रिपोर्ट में समिति ने कहा, कैंसर को अधिसूचित बीमारी बनाने से न केवल इससे होने वाली मौतों का एक मजबूत डाटाबेस बनेगा, बल्कि देश में बीमारी की व्यापकता तय करने में भी मदद मिलेगी। समिति के मुताबिक, कई बार कैंसर से मौत के उल्लेख के बजाय हृदय-श्वसन तंत्र विफलता को कारण मान लिया जाता है। कैंसर देखभाल योजना व प्रबंधन, बचाव, निदान, अनुसंधान और किफायती उपचार पर 139वीं रिपोर्ट में समिति ने कहा, जब हमें  वास्तविक आंकड़ा और कारण पता होंगे, विश्लेषण के लिए डाटा होगा तभी मरीजों को सही सलाह मिलेगी और बेहतर इलाज हो सकेगा।

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