संसद : लोकसभा में पारित हुआ नागरिकता संशोधन विधेयक, पीएम मोदी ने शाह को कहा धन्यवाद
- विधेयक के पक्ष में पड़े 311 तो विपक्ष में पड़े 80 मत
- अब बदल जाएगा छह दशक पुराना नागरिकता कानून
- शाह ने कहा : मोदी सरकार का एकमात्र धर्म संविधान
- रोहिंग्याओं को कभी नागरिक स्वीकार नहीं करेंगे : शाह
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विस्तार
नागरिकता संशोधन विधेयक लोकसभा में पारित हो गया। विधेयक के पक्ष में 311 तो इसके विपक्ष में 80 मत पड़े। गृह मंत्री अमित शाह ने आज विधेयक पेश किया। भारी हंगामे के बीच उन्होंने इसे सदन में रखा जिसका विपक्षी दलों खासकर कांग्रेस ने जोरदार विरोध किया। बिल को सदन में पेश किए जाने पर वोटिंग पर भी हुई जिसके बाद इस पर चर्चा शुरू हुई थी।
प्रधानमंत्री मोदी ने जताया हर्ष
लोकसभा में बिल पारित होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस पर खुशी जाहिर की। उन्होंने ट्वीट किया, एक अच्छी और व्यापक बहस के बाद नागरिकता संशोधन विधेयक 2019 विधेयक पारित हो गया। मैं विभिन्न सांसदों और दलों को धन्यवाद कहता हूं जिन्होंने विधेयक का समर्थन किया। यह विधेयक भारत के सदियों पुराने लोकाचार और मानवीय मूल्यों में विश्वास के अनुरूप है।Delighted that the Lok Sabha has passed the Citizenship (Amendment) Bill, 2019 after a rich and extensive debate. I thank the various MPs and parties that supported the Bill. This Bill is in line with India’s centuries old ethos of assimilation and belief in humanitarian values.
विज्ञापन विज्ञापन— Narendra Modi (@narendramodi) December 9, 2019
एक अन्य ट्वीट में प्रधानमंत्री मोदी ने गृहमंत्री अमित शाह को धन्यवाद दिया। उन्होंने लिखा, 'विधेयक के सभी पहलुओं को स्पष्ट तौर पर समझाने के लिए मैं विशेष तौर पर गृहमंत्री अमित शाह को धन्यवाद देता हूं। उन्होंने लोकसभा में चर्चा के दौरान सांसदों द्वारा उठाए गए विभिन्न बिंदुओं पर विस्तृत जवाब भी दिया।'
I would like to specially applaud Home Minister @AmitShah Ji for lucidly explaining all aspects of the Citizenship (Amendment) Bill, 2019. He also gave elaborate answers to the various points raised by respective MPs during the discussion in the Lok Sabha.
— Narendra Modi (@narendramodi) December 9, 2019
यह विधेयक असम के लिए खतरनाक : तरुण गोगोई
वहीं, असम के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता तरुण गोगोई ने इसे असम के लिए खतरनाक बताया है। उन्होंने कहा, 'यह असम के लिए खतरनाक है, हम बांग्लादेश के पास हैं। यह नॉर्थ-ईस्ट की संस्कृति, विरासत और आबादी के ढांचे को बुरी तरह प्रभावित करेगा।'
Former Assam CM & Congress leader Tarun Gogoi on Lok Sabha passes Citizenship (Amendment) Bill: This is dangerous for Assam, we are next door neighbours to Bangladesh. This Bill will adversely affect the culture, heritage, & population structure of the North-East. pic.twitter.com/NuA8EUXJqt
— ANI (@ANI) December 9, 2019
इससे पहले गृहमंत्री अमित शाह ने सरकार का पक्ष सदन के सामने रखा। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दयानिधि मारन को जवाब देते हुए कहा कि हमें सभी की चिंता है। उन्होंने फिर से दोहराया कि पीओके भी हमारा है और उसके नागरिक भी हमारे हैं।
अमित शाह ने कहा...
किसी भी धर्म के लिए कोई नफरत की भावना नहीं है। मोदी सरकार का एकमात्र धर्म संविधान है। शाह ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा, कांग्रेस इतनी सेक्यूलर पार्टी है कि उसने केरल में मुस्लिम लीग और महाराष्ट्र में शिवसेना से गठबंधन कर रखा है।
नागरिकता संशोधन विधेयक को लेकर गृह मंत्री ने कहा, पूरा अरुणाचल प्रदेश और मिजोरम इनर लाइन परमिट (आईएलपी) से सुरक्षित हैं, उनके लिए चिंता की कोई बात नहीं है। दीमापुर के एक हिस्से को छोड़कर पूरा नागालैंड भी इनर लाइन परमिट से सुरक्षित हैं, उन्हें भी चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है।
हम रोहिंग्या शरणार्थियों को कभी भी भारत का नागरिक स्वीकार नहीं करेंगे। उन्होंने कहा, रोहिंग्या बांग्लादेश से होकर आते हैं। रोहिंग्याओं को कभी भी स्वीकार नहीं किया जाएगा, मैं अभी इसे स्पष्ट कर देता हूं। हमें मुसलमानों से नफरत नहीं, इस देश के किसी भी मुसलमान का इस बिल से कोई भी वास्ता नहीं। भारत के नागरिक मुसलमानों का इससे कोई लेना-देना नहीं है।
पाक अधिकृत कश्मीर हमारा है, वहां के लोग भी हमारे हैं। यहां तक कि आज भी हमने उनके लिए जम्मू-कश्मीर विधानसभा में 24 सीटें आरक्षित रखी हैं।
जो शरणार्थी है, वो प्रताड़ित होकर हमारी शरण में आया है। वह घुसपैठिया नहीं है। मैं आपको बताना चाहता हूं कि भारत में क्या हो रहा है। उन्होंने कहा कि भारत में 1951 में 84 फीसदी हिंदू थे लेकिन 2011 में 79 फीसदी हिंदू थे। इसी तरह 1951 में मुस्लिम 9.8 और आज 14.23 प्रतिशत हैं। हम आगे भी धर्म के आधार पर भेदभाव नहीं होगा। उन्होंने कहा कि पड़ोस के देशों में प्रताड़ना होगी तो भारत मूक दर्शक नहीं बनेगा। उन्हें बचाना पड़ेगा और सम्मान देना होगा।
देश का विभाजन धर्म के आधार पर हुआ। इसी वजह से मुझे यह बिल लाना पड़ेगा। जिस हिस्से में मुस्लिम भाई ज्यादा रहते थे, उसे पाकिस्तान बनाया। बचा हुआ हिस्सा भारतीय संघ बना। आगे चलकर पश्चिमी और पूर्वी पाकिस्तान अलग हुआ और बांग्लादेश बना। मगर बीच एक विभीषिका आई, जिसमें मारना-काटना हुआ। जिन्होंने विभाजन को झेला, वही इस दर्द को बता सकते हैं।
गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि सारे लोग बोले हमने धैर्य से सुना। हमें ठीक लगे या न लगे, लेकिन हमने सभी को सुना। मेरा निवेदन है कि अब मुझे बोलने का मौका मिले
उन्होंने कहा कि 48 सदस्यों ने पक्ष और विपक्ष के चर्चा में हिस्सा लिया। यह बिल लाखों करोड़ों शरणार्थियों को यातना से मुक्ति दिलाने का काम करने जा रहा है। नेहरू लियाकत समझौते में बात हुई कि दोनों देश अपने—अपने शरणार्थियों का ख्याल रखेंगे। मगर 1950 में हुए इस समझौते का पालन नहीं हुआ।
शिवसेना सांसद को नहीं मिला मौका
सदन में बहस के दौरान शिव सेना सांसद अरविंद सावंत को बोलने का मौका नहीं मिला। स्पीकर की भूमिका निभा रहीं मीनाक्षी लेखी ने उनका नाम बुलाया, लेकिन उन्होंने सुना नहीं। इसके बाद उन्होंने सांसद भृतहरि महताब का नाम पुकारा।
इसके बाद अरविंद सावंत अपनी सीट से खड़े हुए और कहा कि उन्हें सुनाई नहीं दिया था। मगर मीनाक्षी लेखी ने फिर से मौका नहीं दिया।
सांसद लॉकेट चटर्जी ने विधेयक को जल्द से जल्द पारित कराने की मांग की
हुगली से भाजपा सांसद लॉकेट चटर्जी ने विधेयक को जल्द से जल्द पारित कराने की मांग की। विधेयक के माध्यम से उन्होंने विपक्ष और कांग्रेस पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में हिंदुओं का नहीं बल्कि रोहिंग्या मुसलमानों का स्वागत किया जाता है।
लॉकेट चटर्जी ने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में 70 लाख से ज्यादा घुसपैठिए हैं। राज्य में इन्हीं की वजह से अपराध बढ़ रहा है। वे अपराध करते हैं और बॉर्डर के बाहर भाग जाते हैं। मालदा में हुए दुष्कर्म का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इस मामले में घुसपैठिया शामिल है।
ओवैसी ने सदन में फाड़ा नागरिकता संशोधन बिल
एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने अपना विरोध जताते हुए इस बिल को फाड़ दिया। उन्होंने कहा, 'संविधान की प्रस्तावना भगवान या खुदा के नाम से नहीं है। आप मुस्लिम लोगों को नागरिकता मत दीजिए। मैं गृह मंत्री से बस यह जानना चाहता हूं कि मुसलमानों से इतनी नफरत क्यों है?' ओवैसी ने कहा कि विधेयक को हमें एनआरसी के नजरिए से देखना चाहिए। जो हिंदू छूट गए, उनके लिए विधेयक लाया गया। यह मुसलमानों को राज्य विहीन करने की साजिश है। उन्होंने कहा कि देश एक और बंटवारे की तरफ जा रहा है। यह विधेयक हिटलर के कानून से भी ज्यादा बदतर है।
AIMIM leader Asaduddin Owaisi tore a copy of #CitizenshipAmendmentBill2019 in Lok Sabha. pic.twitter.com/pzU1NtutD8
— ANI (@ANI) December 9, 2019
एनसीपी की सुप्रिया सुले ने कहा: हमारे लोकतंत्र का पूरा चरित्र ही समानता पर आधारित है। मैं गृह मंत्री से सहमत नहीं हूं। ये सुप्रीम कोर्ट में खारिज हो जाएगा। मैं उनसे गुजारिश करती हूं कि वह इस बिल को वापस ले लें।
Supriya Sule, NCP on #CitizenshipAmendmentBill2019 in Lok Sabha: Entire ethos of our democracy is equality and talking about Article 14&15, I am not convinced by Home Minister, it will be struck down in Supreme Court. I request him to rethink of it and please withdraw the bill. pic.twitter.com/Z8POt0vk2y
— ANI (@ANI) December 9, 2019
बीजद के प्रसन्ना आचार्य ने कहा- हम इस बिल का समर्थन करेंगे। लेकिन हमारी मांग है कि इसमें श्रीलंका को भी शामिल करना चाहिए क्योंकि अतीत में वहां अल्पसंख्यकों पर अत्याचार हुआ है। साथ ही सरकार को इस धारणा को भी खत्म करना चाहिए कि ये बिल मुस्लिमों के खिलाफ है।
Prasanna Acharya, BJD: We'll support #CitizenshipAmendmentBill but our suggestion is to include Sri Lanka in it because there were reports about mistreatment towards minorities there in the past. Also, Govt should allay any misunderstanding that bill is against Muslims. pic.twitter.com/yNo2f6Dbe8
— ANI (@ANI) December 9, 2019
जेडीयू के राजीव रंजन सिंह ने कहा- हम इस बिल का समर्थन करेंगे। इस बिल को बहुसंख्यक या अल्पसंख्यक के नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। अगर पाकिस्तान में प्रताड़ना के शिकार अल्पसंख्यकों को नागरिकता दी जाती है तो ये सही कदम है।
Rajiv Ranjan Singh,JDU in Lok Sabha: We support this bill. This bill should not been seen in light of Indian citizens,both majority and minority. If persecuted minorities of Pakistan are given Indian citizenship then I think this is the right thing. #CitizenshipAmendmentBill pic.twitter.com/U4nF6Q2mp7
— ANI (@ANI) December 9, 2019
-तेलंगाना राष्ट्र समिति के सांसद नमा नागेश्वर राव ने कहा- धर्मनिरपेक्ष राजनीति की सोच के तहत हम इस बिल का विरोध करते हैं। हम संविधान के नियमों का पूरी तरह पालन करते हैं।
भाजपा की सोच विभाजनकारी- टीएमसी
लोकसभा में टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी ने कहा- अगर स्वामी विवेकानंद भारत के विचार के खिलाफ पेश हो रहे इस बिल को देखते तो स्तंभित रह जाते। भाजपा का भारत का आइडिया विभाजन का है। महात्मा गांधी के शब्दों को नजरअंदाज करना और सरदार पटेल की सलाह को न मानना दुर्भाग्यपूर्ण होगा।
ये बिल संविधान के खिलाफ: मनीष तिवारी
कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने कहा कि ये विधेयक संविधान के खिलाफ है। हमारा देश सेकुलर है, ये बिल उस अवधारणा को तोड़ता है। अंतर्राष्ट्रीय नियम और संधि भी कहती है कि कोई भी शरणार्थी जो किसी भी धर्म से हो, आप उसे मदद देने से इनकार नहीं कर सकते। जब भी कोई शरणार्थी भारत आता है, हमसे शरण मांगता है, तो हम मानवीय आधार पर उसे मदद देते हैं।
ये बहुत ही विचित्र कानून है, नेपाल-भूटान के लिए एक कानून, बांग्लादेश के लिए दूसरा कानून। अफगानिस्तान के लिए कुछ कानून, तो मालदीव के लिए कुछ और कानून। मैं पूछता हूं कि मालदीव का राजधर्म क्या है। इस बिल में विरोधाभास है और इसे दोबारा देखने की जरूरत है। किसी शरणार्थी का धर्म नहीं देखा जाता, सबको बराबरी का दर्जा दिया जाता है। ये बिल भारत की परंपरा के खिलाफ भी है।
तिवारी ने कहा- आज गृह मंत्री ने सदन में कहा कि कांग्रेस ने धर्म के आधार पर देश का विभाजन किया। मैं साफ करना चाहता हूं कि दो देश का सिद्धांत पहली बार 1935 में अहमदाबाद में हिंदू महासभा में सावरकर ने रखा था, कांग्रेस ने नहीं।
Manish Tewari,Congress in Lok Sabha: Today Home Minister said that Congress is responsible for partition on basis of religion. I want to make it clear that the foundation for two nation theory was laid in 1935 in Ahmedabad by Savarkar in a Hindu Mahasabha session, & not Congress https://t.co/Nvf79LQSW5 pic.twitter.com/vUq5cqnLny
— ANI (@ANI) December 9, 2019
अमित शाह ने याद दिलाया घोषणापत्र
2014 और 2019 में हमने घोषणापत्र में इसका जिक्र किया था। हमने कहा था कि पड़ोसी देशों में प्रताड़ित धार्मिक अल्पसंख्यकों के संरक्षण के लिए इसे लागू करने के लिए हम प्रतिबद्ध हैं। साथ ही पूर्वोत्तर के लोगों की पहचान खत्म होने की आशंका को भी दूर करेंगे। तब विपक्ष विरोध नहीं कर रहा था। क्या पाकिस्तान, बांग्लादेश, अफगानिस्तान के अल्पसंख्यकों को अधिकार नहीं मिलना चाहिए? तो अब क्यों विरोध कर रहे हैं? धार्मिक प्रताड़ना कर इन देशों से लाखों लोगों को भगा दिया गया। कोई अपना देश, क्या अपना गांव भी नहीं छोड़ता। इतने सालों बाद भी भारत में उन्हें नौकरी, शादी, शिक्षा, स्वास्थ्य, घर खरीदने का अधिकार नहीं है। आज नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में उन्हें सम्मान मिलेगा अधिकार मिलेगा।
HM Amit Shah: We are including Manipur in Inner Line Permit system,this big issue has now been resolved. I thank PM Modi on behalf of people of Manipur for fulfilling this long standing demand. #CitizenshipAmendmentBill2019 https://t.co/UrwuJwaqJI
— ANI (@ANI) December 9, 2019
हम सब पंथनिरपेक्षता को स्वीकार करते हैं, किसी के साथ पंथ, धर्म के आधार पर दुर्रव्यवहार नहीं होना चाहिए। मगर किसी भी सरकार का कर्तव्य ये भी है कि वह देश की सुरक्षा करे। घुसपैठियों की पहचान करे, क्या देश को सबके लिए खुला छोड़ देंगे। कौन सा देश है जिसने नागरिकता देने के लिए कानून नहीं बनाया है। हमने भी बनाया है।
अमित शाह ने कहा कि मणिपुर को भी नागरिकता संशोधन बिल से छूट मिलेगी।
नागरिकता संशोधन विधेयक पेश
अमित शाह ने लोकसभा में नागरिकता संशोधन विधेयक पेश। विधेयक को पेश किए जाने के लिए विपक्ष की मांग पर मतदान करवाया गया और सदन ने 82 के मुकाबले 293 मतों से इस विधेयक को पेश करने की स्वीकृति दे दी। शिवसेना ने बिल को पेश करने के समर्थन में वोट किया है। यदि विधेयक लोकसभा से पास हो जाता है तो इसे राज्यसभा में पेश किया जाएगा।
गृह मंत्री शाह ने कहा कि विधेयक कहीं भी देश के अल्पसंख्यकों के खिलाफ नहीं है और इसमें संविधान के किसी अनुच्छेद का उल्लंघन नहीं किया गया।
शाह ने सदन में यह भी कहा ‘अगर कांग्रेस पार्टी देश की आजादी के समय धर्म के आधार पर देश का विभाजन नहीं करती तो इस विधेयक की जरूरत नहीं पड़ती।’ शाह ने जब विधेयक पेश करने के लिए सदन की अनुमति मांगी तो कांग्रेस के अधीर रंजन चौधरी ने विधेयक पेश किए जाने का विरोध करते हुए कहा कि यह अल्पसंख्यकों को लक्ष्य कर लाया गया विधेयक है। इस पर गृह मंत्री ने कहा कि विधेयक देश के अल्पसंख्यकों के 0.001 प्रतिशत भी खिलाफ नहीं है।
उन्होंने चौधरी की टिप्पणियों पर कहा कि विधेयक के गुण-दोषों पर इसे पेश किए जाने से पहले चर्चा नहीं हो सकती। सदन की नियमावली के तहत किसी भी विधेयक का विरोध इस आधार पर हो सकता है कि क्या सदन के पास उस पर विचार करने की विधायी क्षमता है कि नहीं। शाह ने कहा कि विधेयक पर चर्चा के बाद मैं सदस्यों की हर चिंता का जवाब दूंगा। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने कहा कि सदस्यों को विधेयक पर चर्चा के दौरान उनकी विस्तार से बात रखने का मौका मिलेगा। अभी वह अपना विषय संक्षिप्त में रख दें।
विपक्ष के भारी विरोध के बीच नागरिकता संशोधन विधेयक लोकसभा में पेश
करीब एक घंटे तक इस बात पर तीखी नोकझोंक हुई कि इस बिल को सदन में पेश किया जा सकता है या नहीं। विधेयक पेश करने के बाद शाह ने कहा कि यह बिल संविधान के किसी भी अनुच्छेद को प्रभावित नहीं करता है। ऐसा नहीं है कि पहली बार सरकार नागरिकता के लिए कुछ कर रही है। कुछ सदस्यों को लगता है कि समानता का आधार इससे आहत होता है। इंदिरा गांधी ने बांग्लादेश से आए लोगों को नागिरकता देने का निर्णय किया। पाकिस्तान से आए लोगों को नागरिकता फिर क्यों नहीं दी गई। अनुच्छेद 14 की ही बात है तो केवल बांग्लादेश से आने वालों को क्यों नागरिकता दी गई।
गृह मंत्री ने कहा, अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश में हिंदुओं, सिखों, बौद्धों, ईसाइयों, पारसियों और जैनों के साथ भेदभाव किया गया है। इसलिए यह विधेयक इन सताए हुए लोगों को नागरिकता देगा। साथ ही यह आरोप कि विधेयक मुस्लिमों के अधिकारों को छीन लेगा गलत है।
ओवैसी ने शाह के खिलाफ विवादास्पद बयान दिया
लोकसभा में एआईएमआईएम सांसद ने अकबरुद्दीन ओवैसी ने गृहमंत्री अमित शाह के खिलाफ विवादास्पद बयान दिया, जिसके बाद सदन में हंगामा मच गया। उन्होंने लोकसभा में कहा, मैं आपसे (स्पीकर) और गृह मंत्री से अपील करता हूं इस देश को बचा लीजिए। मुस्लिम इसी देश का हिस्सा हैं। उच्चतम न्यायालय के आदेश का उल्लंघन हो रहा है।गृहमंत्री नए हैं, नियमों की जानकारी नहीं- सौगत राय
नागरिकता संशोधन विधेयक पेश होने के बाद लोकसभा में टीएम सांसद सौगत राय ने कहा कि गृहमंत्री नए हैं, उन्हें शायद नियमों की जानकारी नहीं है। इसके बाद लोकसभा में हंगामा हो गया। टीएमसी सांसद सौगत राय ने लोकसभा में कहा कि आज संविधान संकट में है। इसके बाद भाजपा के सदस्यों ने उनके बयान का विरोध किया।अमित शाह और अधीर रंजन के बीच बहस
सियासी विवाद के बीच गृह मंत्री अमित शाह ने आज लोकसभा में नागरिक संशोधन बिल पेश कर दिया। उनके बिल पेश करते ही सदन में हंगामा मच गया। कांग्रेस सहित विपक्षी दलों ने इसका विरोध शुरू कर दिया। लोकसभा में कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि इस बिल के जरिए अल्पसंख्यकों को निशाना बनाया जा रहा है। इस पर अमित शाह ने जवाब दिया कि ये बिल देश के अल्पसंख्यकों के .001 फीसदी खिलाफ भी नहीं है।लोकसभा में कांग्रेस के नेता प्रतिपक्ष अधीर रंजन चौधरी ने बिल के विरोध में कहा कि यह कुछ नहीं बल्कि हमारे देश के अल्पसंख्यक पर लक्षित कानून है। उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 13, अनुच्छेद 14 को कमजोर किया जा रहा है।
इस पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि यह विधेयक अल्पसंख्यकों के खिलाफ नहीं है। हर सवाल का जवाब देने के लिए तैयार हैं। कांग्रेस के अधीर रंजन चौधरी से शाह ने कहा वॉकआउट मत कर जाना।
यह पार्टियां बिल के विरोध और पक्ष में हैं
जहां बिल के पक्ष में भाजपा, जनता दल यूनाइटेड, अकाली और लोक जनशक्ति पार्टी हैं। वहीं कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, वामपंथी दल और समाजवादी पार्टी इसका विरोध कर रही है।
क्या है नागरिकता संशोधन विधेयक: क्यों हो रहा विरोध, किसका फायदा किसे नुकसान
अधीर रंजन की माफी पर अड़ी भाजपा
केंद्रीय मंत्री स्मृत ईरानी से छह दिसंबर को लोकसभा में हुए दुर्व्यवहार पर भाजपा आक्रामक है। गृहमंत्री अमित शाह ने कांग्रेस सांसद अधीर रंजन से माफी की मांग की है।दरअसल शुक्रवार को सदन में स्मृति ईरानी उन्नाव दुष्कर्म पीड़िता को जलाने की घटना पर जवाब दे रही थीं, उसी वक्त कांग्रेस के सांसद उनके सामने आक्रामक भाव मुद्रा में पहुंच गए। इससे पहले ईरानी ने कहा था कि वह कांग्रेस के दोनों सांसदों के कथित दुर्व्यवहार से दुखी हैं।
हर कीमत पर विरोध करेंगे-अखिलेश
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और आजमगढ़ से सांसद अखिलेश यादव ने कहा, 'हम नागरिकता संशोधन विधेयक के खिलाफ हैं। पार्टी हर कीमत पर इसका विरोध करेगी।'
दिल्ली अग्निकांड पर हंगामा
वहीं राज्यसभा में दिल्ली के अनाज मंडी में लगी आग का मुद्दा उठाया। भाजपा सांसद विजय गोयल ने कहा कि उपहार कांड से भी कोई सीख नहीं ली गई। वहीं आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने कहा कि इसपर राजनीति नहीं होनी चाहिए।
मनीष तिवारी ने शिक्षा ऋण पर पूछा सवाल
कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने लोकसभा में शिक्षा ऋण की माफी के सवाल पर कहा, 'बेरोजगारी की दर आज 45 साल के उच्चतम स्तर पर है। वर्तमान आर्थिक मंदी को देखते हुए, सरकार केंद्रीय डेटाबेस को बनाए रखने पर विचार करेगी, जहां उन्हें जानकारी हो कि किसी व्यक्ति ने शिक्षा ऋण का लाभ उठाया है या नहीं?'
नागरिकता विधेयक का समर्थन करेगी शिवसेना
सामना के जरिए शिवसेना ने इस बात के संकेत दिए हैं कि वह इस विधेयक को लेकर सरकार का समर्थन करेगी। हालांकि उसने इसमें बदलाव की मांग की है। शिवसेना सांसद संजय राउत ने पूछा है कि क्या कश्मीरी पंडित वापस कश्मीर जा पाएंगे। उनका कहना है कि अप्रवासी हिंदुओं को नागरिकता दी जानी चाहिए।
बदरुद्दीन अजमल ने किया विरोध
असम के धुबरी से लोकसभा सांसद बदरुद्दीन अजमल ने नागरिक संशोधन विधेयक पर कहा, 'यह विधेयक संविधान और हिंदू-मुस्लिम एकता के खिलाफ है। हम इस विधेयक को खारिज करते हैं और इस मामले में विपक्ष हमारे साथ है। हम इस विधेयक को पास नहीं होने देंगे।' वहीं उनकी पार्टी एआईयूडीएफ जंतर-मंतर पर बिल के विरोध में प्रदर्शन कर रही है।
नागरिकता विधेयक के समर्थन में आई एआईएडीएमके
एआईएडीएमके नागरिकता संशोधन विधेयक के समर्थन में आ गई है। पार्टी के राज्यसभा में 11 सांसद हैं।
क्या है नागरिकता संशोधन विधेयक
इस बिल के पारित होते ही छह दशक पुराना नागरिकता कानून-1955 बदल जाएगा और तीन पड़ोसी देशों पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानस्तिान से आने वाले गैरमुस्लिम शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता देने की प्रक्रिया बेहद सहज हो जाएगी। सरकार की योजना सोमवार को लोकसभा में यह बिल पारित कराने के बाद मंगलवार को राज्यसभा में भी इस पर मंजूरी की मुहर लगवा लेने की है।
बीते शुक्रवार को लोकसभा में केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी के साथ कथित अभद्रता मामले में अपने दो सांसदों के खिलाफ सरकार की ओर से लाए गए निलंबन संबंधी प्रस्ताव पर सोमवार को कांग्रेस भड़क गई। इस प्रस्ताव का तीखा विरोध करते हुए पार्टी के संसदीय दल के नेता अधीर रंजन चौधनी ने कहा कि लोकसभा किसी राजा का राजमहल नहीं है। उन्होंने इस प्रस्ताव के जरिये विपक्ष को डराने की कोशिश करने का भी आरोप लगाया। गृह मंत्री अमित शाह ने महिला मंत्री के साथ हुई अभद्रता का आरोप लगाते हुए कार्रवाई को जरूरी बताया।
दरअसल शुक्रवार को महिलाओं के खिलाफ बढ़ती दुष्कर्म की घटनाओं पर चर्चा के दौरान ईरानी और कांग्रेस के दो सांसदों टीएन प्रथापन-डीन कुरियाकोस से तीखी बहस हुई। इसी दौरान ये सांसद आक्रामक अंदाज में बाहें चढ़ाए आगे बढ़ते देखे गए। तब सरकार और भाजपा के साथ कई विपक्षी दलों ने दोनों सांसदों से माफी मांगने की मांग रखी थी। जबकि दोनों सांसदों ने दोपहर बाद कार्यवाही में हिस्सा नहीं लिया था।
आयुध संशोधन विधेयक 2019 को मंजूरी
लोकसभा ने सोमवार को आयुध संशोधन विधेयक 2019 को मंजूरी दे दी जिसमें नए अपराधों को परिभाषित करने और अवैध हथियारों के निर्माण, विक्रय, आयात-निर्यात से जुड़े अपराधों में दंड में वृद्धि करने का प्रावधान किया गया है। विधेयक पर चर्चा का जवाब देते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, 1959 के अधिनियम में कई विसंगतियां थीं और इस विधेयक के माध्यम से उनको दूर किया जा रहा है। इसमें विसंगतियों को खत्म किया जा रहा है तथा खिलाड़ियों को रियायतें दी जा रही हैं।
उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों को अभ्यास के लिये हथियारों में कोई कटौती नहीं की गई है। पूर्व सैनिकों के हितों को भी ध्यान में रखा गया है क्योंकि वे जिम्मेदार नागरिक हैं। उन्होंने कहा कि पहले के कानून में अवैध हथियार रखने और बनाने वालों दोनों के लिए समान सजा का प्रावधान था और छोटे और बड़े हथियारों को लेकर भेद नहीं किया गया था।
देश के वाहन उद्योग में पिछले एक साल से जारी सुस्ती के बीच सोमवार को भारी उद्योग राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि वाहन क्षेत्र में नौकरियों के जाने का खतरा नहीं है और न ही चिंता की कोई बात है। राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान उन्होंने कहा कि वर्तमान में देश का वाहन क्षेत्र बदलाव के दौर में है।
सुप्रीम कोर्ट की ओर से दी गई समय-सीमा के अनुसार एक अप्रैल, 2020 से देशभर में बीएस-6 मानक लागू होने हैं। इस कारण वाहन कंपनियां बीएस-4 से बीएस-6 को लागू करने की प्रक्रिया से गुजर रही हैं।ऐसे में नौकरियों को लेकर चिंता का कोई कारण नहीं है। कोई भी नौकरी खतरे में नहीं है और सरकार ने हितधारकों से बात करने के बाद सुधार के लिए सभी जरूरी उपाय किए हैं। उन्होंने आगे कहा कि हम इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने की ओर बढ़ रहे हैं।
निकट भविष्य में एंग्लो इंडियन समुदाय को लोकसभा में मिलने वाला आरक्षण जारी नहीं नहीं होगा। सरकार ने सोमवार को लोकसभा में संविधान का 126वां संशोधन बिल पेश किया। इस बिल में संसद और विधानसभाओं में अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग के आरक्षण को 10 साल बढ़ाने और एंग्लो इंडियन समुदाय का आरक्षण खत्म करने का प्रावधान है।
टीएमसी के सौगत राय ने इस बिल का विरोध करते हुए इसे संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन बताया। राय ने कहा कि एंग्लो इंडियन समुदाय को बीते 70 साल से लोकसभा में आरक्षण दिया जा रहा है। हर लोकसभा में इस समुदाय के दो सदस्यों को मनोनीत किया जाता रहा है। अब सरकार रातोरात इस प्रावधान को खत्म करने की तैयारी कर रही है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार को राज्यसभा में कहा कि आयुध कारखानों के निजीकरण का सवाल ही नहीं उठता और सरकार इन कारखानों में कार्यरत कामगारों के हित किसी भी स्थिति में प्रभावित नहीं होने देगी। सिंह ने राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान एक पूरक प्रश्न के उत्तर में बताया कि आम तौर पर लोग आयुध कारखानों को पेशेवर बनाने के पक्षधर हैं। इस बारे में कारखानों के श्रमिक संगठनों से बातचीत भी हुई है।
राज्यसभा में विधेयक पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए पोत परिवहन मंत्री मनसुख मांडविया ने कहा कि मौजूदा समय में दुनिया के पोत रिसाइकलिंग उद्योग में भारत की 30 फीसदी हिस्सेदारी है और इस विधेयक के कानून का रूप लेने के बाद इसमें और बढ़ोतरी होगी।