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Parliament: 58000 करोड़ का निजी कोचिंग उद्योग बन रहा परिवारों पर भारी बोझ; सवाल पर संसद में क्या बोली सरकार?

Sun, 07 Dec 2025 11:53 AM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: निर्मल कांत Updated Sun, 07 Dec 2025 11:53 AM IST
सार

Parliament: सरकार ने एक सवाल के लिखित जवाब में राज्यसभा में बताया कि शिक्षा समवर्ती विषय होने के कारण केंद्र और राज्य मिलकर शिक्षा की गुणवत्ता और विकास पर काम कर रहे हैं। अनियमित निजी कोचिंग केंद्रों के बढ़ते मामले और उच्च शुल्क को देखते हुए केंद्र ने 16 जनवरी 2024 को विनियमन के दिशानिर्देश जारी किए।

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संसद (फाइल) - फोटो : अमर उजाला प्रिंट

विस्तार

सरकार ने राज्यसभा में बताया कि शिक्षा समवर्ती सूची का विषय है। केंद्र व राज्य सरकारें मिलकर शिक्षा क्षेत्र में गुणवत्ता और विकास सुनिश्चित करने के लिए काम कर रही हैं। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने कहा कि अनियमित निजी कोचिंग केंद्रों की संख्या में वृद्धि और छात्रों से अत्यधिक शुल्क वसूलने की घटनाओं को देखते हुए 16 जनवरी 2024 को राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को कोचिंग केंद्रों के विनियमन हेतु दिशानिर्देश जारी किए गए। 
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सरकार ने बताया कि इन दिशानिर्देशों में कोचिंग केंद्रों का पंजीकरण, शुल्क पारदर्शिता, सुरक्षा मानक, आचार संहिता, छात्र सहायता, शिकायत निवारण तंत्र और पंजीकरण रद्द करने की प्रक्रिया जैसी कई महत्वपूर्ण बातें शामिल हैं। कई राज्यों ने अपने स्तर पर भी कोचिंग केंद्रों को विनियमित करने के लिए दिशानिर्देश और कानून बनाए हैं।
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केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार लिखित जवाब में राज्यसभा को बताया कि स्कूल आधारित शिक्षा को मजबूत करने के लिए कई पहलें की गई हैं। समग्र शिक्षा और राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत बच्चों में बुनियादी साक्षरता, संख्याज्ञान, अवधारणा समझ और महत्वपूर्ण चिंतन पर जोर दिया जा रहा है।


उन्होंने बताया कि 'निपुण भारत', 'परख', 'समग्र प्रगति कार्ड', 'विद्यांजलि', 'विद्या शक्ति' और डिजिटल प्लेटफॉर्म जैसी पहलों के माध्यम से छात्रों को गुणवत्ता वाली शिक्षा, करियर परामर्श और प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए निःशुल्क सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है। अब तक 17 लाख से अधिक छात्र इन प्लेटफॉर्म पर पंजीकृत हो चुके हैं और 400 मेंटर्स प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हैं।

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राज्यसभा सदस्य विवेक के. तन्खा ने शिक्षा मंत्री से सवाल पूछा था कि क्या सरकार को जानकारी है कि भारत का निजी कोचिंग उद्योग परिवारों पर भारी वित्तीय बोझ डालता है, जिसका मूल्य 58,000 करोड़ रुपये (एनएसएसओ 2022-23) से अधिक है? उन्होंने यह भी पूछा था कि क्या ऐसे आंकड़े मौजूद हैं जो दर्शाते हैं कि परिवार अपनी आय का 15-20 फीसदी तक निजी ट्यूशन पर खर्च करते हैं? जिसके लिखित जवाब में सरकार ने यह जानकारी दी। 


 
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