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पैराडाइज पेपर्स: पनामा के लिए गठित मल्टी एजेंसी ग्रुप के हवाले जांच का जिम्मा

Mon, 06 Nov 2017 07:35 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो/ नई दिल्ली Updated Mon, 06 Nov 2017 07:35 PM IST
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Paradise Papers: Sebi lens on firms for fund diversion
- फोटो : pti

पैराडाइज पेपर्स में में जिन 714 भारतीय कंपनियों और शख्सियतों के नाम उजागर किए गए हैं, उनके खिलाफ जांच की निगरानी वही मल्टी एजेंसी ग्रुप जांच करेगा, जिसे पनामा पेपर्स की जांच का जिम्मा सौंपा गया है। एजेंसियों के इस समूह को इस मामले में ‘त्वरित कार्रवाई’ करने का भी अधिकार होगा। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने सोमवार को यह जानकारी दी है।

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सीबीडीटी के अनुसार आयकर विभाग की देश भर की जांच यूनिटों को सतर्क कर दिया गया है ताकि वे पैराडाइज पेपर्स के खुलासे के आधार पर फौरन कार्रवाई कर सकें। विदेश स्थित कंपनियों के संदिग्ध लेन-देन की पहले से भी जांच चल रही है। जैसे-जैसे नए खुलासे सामने आते जाएंगे, कानून के अनुसार त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
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 सरकार ने कहा है कि इसके लिए मल्टी एजेंसी ग्रुप का पुनर्गठन किया जाएगा जिसमें सीबीडीटी, आयकर विभाग, प्रवर्तन निदेशालय, फाइनेंशियल इंटेलीजेंस यूनिट और रिजर्व बैंक के अधिकारी शामिल हैं। याद रहे कि इस समूह का गठन पिछले साल अप्रैल में पनामा पेपर्स लीक की जांच के लिए किया गया था।

एजेंसियों का समूह सबसे पहले पैराडाइज पेपर्स में शामिल सभी 714 व्यक्तियों और कंपनियों के आयकर रिटर्न की जांच करेगा। इसके बाद केस-दर-केस के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। देश में कमाई गई दौलत को गलत ढंग से विदेश भेजने के मामले में इन व्यक्तियों और कंपनियों की मिलीभगत साबित हुई तो उन्हें नोटिस भी भेजा जाएगा। हालांकि सीबीडीटी ने कहा है कि उसे अभी इस ताजा खुलासे से संबंधित पूरा ब्योरा हासिल नहीं हुआ है। अभी तक उसे मीडिया के जरिए कुछ भारतीय कंपनियों और व्यक्तियों के बारे में पता चला है।

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सेबी भी करेगा जांच 

सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (सेबी) ने सोमवार को कहा है कि इस मामले की जांच करेगी। इसमें विजय माल्या सहित जिन लोगों और सूचीबद्ध कंपनियों के नाम उजागर किए गए हैं, उनके खिलाफ विदेश में कंपनी खोलकर फंडों की हेरफेर करने और कॉरपोरेट गवर्नेंस के नियमों के उल्लंघन की जांच की जाएगी।

माल्या की कई कंपनियों के खिलाफ पहले से जांच जारी है। अधिकारियों के अनुसार किसी टैक्स हैवन (जहां टैक्स नहीं वसूली जाता) देश में महज कंपनी खोलना कोई अपराध नहीं है लेकिन उनके बारे में जानकारी छुपाना या उनके जरिए देश से फंड बाहर भेजना गैरकानूनी है। हालांकि इसे साबित करने से पहले सेबी को गहराई से जांच करनी होगी।

क्या है पैराडाइज पेपर्स

Paradise Papers: Sebi lens on firms for fund diversion

दुनिया भर के अमीर और ताकतवर लोग अपने देश में कमाई दौलत का निवेश टैक्स हैवन देशों में करते हैं। इस काम में अंतरराष्ट्रीय लॉ फर्में उनकी मदद करती हैं। बरमुडा की एपलबाई और सिंगापुर की एशियासिटी भी ऐसी ही दो लॉ फर्में हैं, जिनके जरिए लीक हुए दस्तावेजों ने तलहका मचा रहा रखा है। 

इन दस्तावेजों को ही पैराडाइज पेपर्स के नाम से जाना जाता है। इन दस्तावेजों को लीक कराने में इंटरनेशनल कंसोर्टियम ऑफ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट्स (आईसीआईजे) की उल्लेखनीय भूमिका है। 

आईसीआईजे के अनुसार पैराडाइज पेपर्स में 182 देशों की कंपनियों और व्यक्तियों से संबंधित 1.34 करोड़ दस्तावेज लीक किए गए हैं। नामों की संख्या के हिसाब से इन देशों में भारत का 19वां स्थान है। पत्रकारों की इसी अंतरराष्ट्रीय संस्था ने पनामा पेपर्स को भी उजागर किया था।

भारतीय कंपनियां और शख्सियतें

Paradise Papers: Sebi lens on firms for fund diversion

- शराब कारोबारी विजय माल्या
- नागर विमानन राज्यमंत्री जयंत सिन्हा
- भाजपा के राज्यसभा सदस्य आरके सिन्हा
- अभिनेता अमिताभ बच्चन
- अभिनेता संजय दत्त की पत्नी मान्यता
- जिंदल स्टील
- वीडियोकॉन समूह
- अपोलो टायर्स
- जीएमआर समूह
- सन टीवी नेटवर्क
- हैवल्स
- हिंदूजा

विदेशी शख्सियतें
- ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ द्वितीय
- पाकिस्तान के पूर्व पीएम शौकत अजीज
- अमेरिकी वाणिज्य मंत्री विल्बर रॉस
- कनाडा के पीएम के वरिष्ठ सलाहकार 

कंपनियों के शेयर गिरे
इस खुलासे में शामिल जिंदल स्टील एंड पावर के शेयरों में 2.32 फीसदी, एस्सार शिपिंग में दो फीसदी, वीडियोकॉन इंडस्ट्रीज में 1.82 फीसदी, सन टीवी नेटवर्क में 1.74 फीसदी, अपोलो टायर्स में 0.88 फीसदी और जीएमआर इन्फ्रस्ट्रक्चर्स के शेयरों में 1.57 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई।

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