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Pahalgam Attack: पाकिस्तान की गीदड़भभकी का मुंहतोड़ जवाब; सिंधु जल संधि पर रोक के बाद अमित शाह ने बुलाई बैठक

Fri, 25 Apr 2025 09:25 AM IST
बशु जैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: बशु जैन Updated Fri, 25 Apr 2025 09:25 AM IST
सार

पहलगाम में पर्यटकों पर आतंकी हमले के बाद भारत सरकार ने 1960 की सिंधु जल संधि को तत्काल प्रभाव से रोकने का फैसला लिया। इसे लेकर पाकिस्तान ने भारत को गीदड़भभकी दी थी। अब केंद्र सरकार ने सिंधु जल संधि पर रोक लगाने की अधिसूचना जारी कर दी है। वहीं गृह मंत्री अमित शाह ने इस मुद्दे को लेकर बैठक बुलाई है।

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Pahalgam Attack: India gave a befitting reply to Pakistan, notification issued to ban Indus Water Treaty
Indus Water treaty - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

भारत ने पाकिस्तान की गीदड़भभकी का मुंहतोड़ जवाब दिया है। पहलगाम आतंकी हमले के बाद सिंधु जल संधि पर रोक लगाने को लेकर केंद्र सरकार ने अधिसूचना जारी कर दी है। वहीं केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सिंधु जल संधि पर रोक को लेकर बैठक बुलाई है। इस बैठक में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल समेत कई वरिष्ठ अधिकारी भाग लेंगे। 
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गुरुवार को ही केंद्र सरकार ने पाकिस्तान को पत्र लिखकर समझौते पर रोक लगाने की जानकारी दे दी थी। भारत के जल शक्ति मंत्रालय की सचिव देवश्री मुखर्जी ने पाकिस्तान के जल संसाधन सचिव सैयद अली मुर्तजा को भेजे पत्र में लिखा था कि सच्ची भावना से किसी संधि का सम्मान करने का उत्तरदायित्व ही उस संधि की बुनियाद होती है। मगर पाकिस्तान लगातार भारत के संघ शासित क्षेत्र जम्मू-कश्मीर में सीमा पार से आतंकवाद को जारी रखे हुए है। पाकिस्तान की इन कार्रवाइयों ने सुरक्षा अनिश्चितताएं पैदा की हैं। 
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मुखर्जी ने कहा, संधि की शर्तों के उल्लंघन के अलावा पाकिस्तान ने संधि के तहत परिकल्पित वार्ता में शामिल होने के भारत के अनुरोध पर प्रतिक्रिया देने से मना कर दिया है और इस प्रकार वह संधि का उल्लंघन कर रहा है। ऐसे में भारत सरकार ने निर्णय किया है कि सिंधु जल संधि, 1960 को तत्काल प्रभाव से स्थगित रखा जाएगा।

पहलगाम में पर्यटकों पर आतंकवादी हमले के बाद भारत सरकार की सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति (सीसीएस) की बैठक में 1960 की सिंधु जल संधि को तत्काल प्रभाव से रोकने का फैसला लिया गया था। कश्मीर में ताजा आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान के खिलाफ इसे सबसे बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है। 


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क्या है सिंधु जल समझौता 
सिंधु जल समझौता, 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच हस्ताक्षरित एक जल-बंटवारा समझौता है। इसमें विश्व बैंक ने मध्यस्थता की थी। इस समझौते का उद्देश्य सिंधु नदी और उसकी सहायक नदियों के पानी के उपयोग को लेकर दोनों देशों के बीच विवादों को रोकना था। इस संधि के तहत, हिमालय के सिंधु नदी बेसिन की छह नदियों को दो भागों में बांटा गया है। पूर्वी नदियों ब्यास, रावी और सतलुज का पानी भारत को मिलता है जबकि पश्चिमी नदियों सिंधु, झेलम और चिनाब का कंट्रोल पाकिस्तान के पास आया।

अब भारत सिंधु नदी पर बांध बनाकर पानी रोकने के लिए स्वतंत्र
भारत सरकार ने पाकिस्तान के साथ सिंधु जल संधि को स्थगित करने का जो फैसला किया है वह पाकिस्तान की आर्थिक कमर तोड़ सकता है। दरअसल समझौता स्थगित होने का यह अर्थ नहीं है कि पाकिस्तान को तत्काल सिंधु नदी का पानी नहीं मिलेगा बल्कि इसके तहत भारत पर से अब यह बाध्यता खत्म हो जाएगी कि वह पाकिस्तान को सिंधु के पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करे। भारत भविष्य में सिंधु नदी पर बांध बनाकर पानी रोकने के लिए स्वतंत्र होगा। ऐसा हुआ तो पाकिस्तान के लिए सही मायनों में संकट पैदा होगा।

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