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P20: उपसभापति ब्राजील में G20 संसदों के 10वें सम्मेलन में हुए शामिल, विकास में संसदों की भूमिका पर कहीं ये बात
Fri, 08 Nov 2024 07:44 PM IST
राहुल कुमार
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: राहुल कुमार
Updated Fri, 08 Nov 2024 07:44 PM IST
सार
P20 Brazil: उपसभापति हरिवंश ने दक्षिण अफ्रीका गणराज्य की नेशनल असेंबली की उपाध्यक्ष एनेलिस लोट्रिएट से भी मुलाकात की। इस दौरान उन्हें अगले वर्ष दक्षिण अफ्रीका में होने वाले पी-20 के सफल आयोजन के लिए भारत का समर्थन व्यक्त किया।
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राज्य सभा के उपसभापति हरिवंश
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
राज्य सभा के उपसभापति हरिवंश के नेतृत्व में जी 20 संसदों के 10वें सम्मेलन में भाग लेने के लिए भारतीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल वर्तमान में ब्राजील में है। 7 नवंबर को उपसभापति हरिवंश का सीनेट के अध्यक्ष रोड्रिगो पाचेको और ब्राजील कांग्रेस में प्रतिनिधि सभा के अध्यक्ष आर्थर लीरा द्वारा ब्रासीलिया में पी-20 बैठकों के लिए स्वागत किया गया। उपसभापति ने रूस के फेडरेशन काउंसिल के उपाध्यक्ष कॉन्स्टेंटिन कोशेचेव के साथ द्विपक्षीय बैठक की। इस दौरान उन्होंने अन्य बातों के साथ-साथ द्विपक्षीय व्यापार, रक्षा और संसदीय सहयोग में भारत और रूस के बीच साझेदारी का उल्लेख किया।
उपसभापति हरिवंश ने दक्षिण अफ्रीका गणराज्य की नेशनल असेंबली की उपाध्यक्ष एनेलिस लोट्रिएट से भी मुलाकात की। इस दौरान उन्हें अगले वर्ष दक्षिण अफ्रीका में होने वाले पी-20 के सफल आयोजन के लिए भारत का समर्थन व्यक्त किया। हरिवंश का ब्राजील के सीनेटरों और कांग्रेस के सदस्यों द्वारा गर्मजोशी से स्वागत किया गया। इसके अलावा उन्होंने दक्षिण कोरिया, तुर्की, सिंगापुर, इटली, पुर्तगाल, फ्रांस के प्रतिनिधिमंडलों के नेताओं और आईपीयू के अध्यक्ष और तंजानिया की नेशनल असेंबली की अध्यक्ष तुलिया एक्सन से मुलाकात की।
'भूख, गरीबी और असमानता के खिलाफ लड़ाई में संसदों का योगदान' विषय पर पहले कार्य सत्र में बोलते हुए उपसभापति हरिवंश ने वैश्विक खाद्य सुरक्षा को बढ़ाने के लिए भारत द्वारा उठाए गए विभिन्न उपायों जैसे पीएमजीकेवाई, पोषण अभियान, मातृ वंदन योजना, पीएम जन धन योजना, पीएम आवास योजना, स्वच्छ भारत अभियान और आयुष्मान भारत योजना का उल्लेख किया, जिससे भूख और गरीबी का उन्मूलन करने के साथ-साथ स्वास्थ्य को विशेषाधिकार के बजाय नागरिकों का मूल अधिकार बनाने में मदद मिली है।
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उपसभापति ने 'सतत विकास को बढ़ावा देने में संसदों की भूमिका' विषय पर दूसरे कार्य सत्र में वनों और वन्यजीवों की सुरक्षा करते हुए पर्यावरण के संरक्षण और सुधार के लिए भारत की प्रतिबद्धता के बारे में भी बात की। उन्होंने वन संरक्षण अधिनियम, पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, शिक्षा का अधिकार अधिनियम, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, बांध सुरक्षा अधिनियम और प्रधानमंत्री के मिशन लाइफ अर्थात पर्यावरण हेतु जीवन शैली का उल्लेख किया।
उपसभापति ने विश्व की 17 प्रतिशत आबादी के बावजूद भारत द्वारा मात्र 4 प्रतिशत उत्सर्जन करने, 2030 की समय-सीमा से 11 वर्ष पहले एनडीसी लक्ष्य प्राप्त करने, 100 गीगावाट हरित ऊर्जा स्थापित करने, आईएसए, आईआरआईएस और सीडीआरआई जैसी पहलों का भी उल्लेख किया। उपसभापति ने कहा कि भारत में अब 96.35 प्रतिशत घरों में खाना पकाने का स्वच्छ ईंधन है। 99.29 प्रतिशत ग्रामीण परिवारों की पेयजल के बेहतर स्रोतों तक पहुंच है और 100 प्रतिशत घरों में बिजली उपलब्ध है। उन्होंने सतत विकास को आगे बढ़ाने के लिए मानव केंद्रित दृष्टिकोण, सामूहिक प्रयासों और मजबूत कार्रवाई का आह्वान किया।
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उपसभापति हरिवंश ने दक्षिण अफ्रीका गणराज्य की नेशनल असेंबली की उपाध्यक्ष एनेलिस लोट्रिएट से भी मुलाकात की। इस दौरान उन्हें अगले वर्ष दक्षिण अफ्रीका में होने वाले पी-20 के सफल आयोजन के लिए भारत का समर्थन व्यक्त किया। हरिवंश का ब्राजील के सीनेटरों और कांग्रेस के सदस्यों द्वारा गर्मजोशी से स्वागत किया गया। इसके अलावा उन्होंने दक्षिण कोरिया, तुर्की, सिंगापुर, इटली, पुर्तगाल, फ्रांस के प्रतिनिधिमंडलों के नेताओं और आईपीयू के अध्यक्ष और तंजानिया की नेशनल असेंबली की अध्यक्ष तुलिया एक्सन से मुलाकात की।
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'भूख, गरीबी और असमानता के खिलाफ लड़ाई में संसदों का योगदान' विषय पर पहले कार्य सत्र में बोलते हुए उपसभापति हरिवंश ने वैश्विक खाद्य सुरक्षा को बढ़ाने के लिए भारत द्वारा उठाए गए विभिन्न उपायों जैसे पीएमजीकेवाई, पोषण अभियान, मातृ वंदन योजना, पीएम जन धन योजना, पीएम आवास योजना, स्वच्छ भारत अभियान और आयुष्मान भारत योजना का उल्लेख किया, जिससे भूख और गरीबी का उन्मूलन करने के साथ-साथ स्वास्थ्य को विशेषाधिकार के बजाय नागरिकों का मूल अधिकार बनाने में मदद मिली है।
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उपसभापति ने 'सतत विकास को बढ़ावा देने में संसदों की भूमिका' विषय पर दूसरे कार्य सत्र में वनों और वन्यजीवों की सुरक्षा करते हुए पर्यावरण के संरक्षण और सुधार के लिए भारत की प्रतिबद्धता के बारे में भी बात की। उन्होंने वन संरक्षण अधिनियम, पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, शिक्षा का अधिकार अधिनियम, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, बांध सुरक्षा अधिनियम और प्रधानमंत्री के मिशन लाइफ अर्थात पर्यावरण हेतु जीवन शैली का उल्लेख किया।
उपसभापति ने विश्व की 17 प्रतिशत आबादी के बावजूद भारत द्वारा मात्र 4 प्रतिशत उत्सर्जन करने, 2030 की समय-सीमा से 11 वर्ष पहले एनडीसी लक्ष्य प्राप्त करने, 100 गीगावाट हरित ऊर्जा स्थापित करने, आईएसए, आईआरआईएस और सीडीआरआई जैसी पहलों का भी उल्लेख किया। उपसभापति ने कहा कि भारत में अब 96.35 प्रतिशत घरों में खाना पकाने का स्वच्छ ईंधन है। 99.29 प्रतिशत ग्रामीण परिवारों की पेयजल के बेहतर स्रोतों तक पहुंच है और 100 प्रतिशत घरों में बिजली उपलब्ध है। उन्होंने सतत विकास को आगे बढ़ाने के लिए मानव केंद्रित दृष्टिकोण, सामूहिक प्रयासों और मजबूत कार्रवाई का आह्वान किया।