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Happiness Index: रविशंकर बोले- कटघरे में ऑक्सफोर्ड सूचकांक, खुशियां गरीबी से जुड़ी नहीं; भारत में हुए कई सुधार

Sat, 22 Mar 2025 02:50 AM IST
ज्योति भास्कर वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन Published by: ज्योति भास्कर Updated Sat, 22 Mar 2025 02:50 AM IST
सार

विदेशी संस्था की तरफ से जारी हालिया हैप्पीनेस इंडेस्क में भारत की स्थिति पर विवाद हो रहा है। पाकिस्तान समेत कई ऐसे देशों को भारत से बेहतर बताया गया है, जहां बीते कुछ समय से हिंसक संघर्ष जैसे हालात हैं। ऐसे में इस सूचकांक की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े रहे हैं। ताजा घटनाक्रम में आध्यात्मिक गुरु श्रीश्री रविशंकर ने कहा है कि खुशी या नाखुशी गरीबी से जुड़ी नहीं है। बीते कुछ समय में भारत की स्थिति काफी बेहतर हुई है।

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Oxford Index India position row Art of living Sri Sri says poverty happiness unlinked last decade improvement
बिहार के मुंगेर में आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक श्री श्री रविशंकर (फाइल) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

विश्व खुशहाली सूचकांक 2025 की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। आध्यात्मिक गुरु और आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक ने इस संबंध में कहा, सूचकांक में भारत को 118वें नंबर पर दिखाया गया है। जिन देशों या इलाकों में संघर्ष हो रहा है, वैसे कई क्षेत्र भारत से काफी आगे हैं। ऐसे में सूचकांक काफी हैरान करने वाला है। फिलहाल अमेरिका दौरे पर गए रविशंकर ने वाशिंगटन में कई सवालों के जवाब दिए। उन्होंने भारत के मानवीय मूल्यों, समाज में रहन-सहन और समस्याओं पर भी अपनी राय रखी।
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भारत में बीते एक दशक में उल्लेखनीय सुधार हुए हैं
उन्होंने कहा कि  संघर्ष वाले क्षेत्रों में रह रहे लोगों के बीच अधिक जुड़ाव का तर्क दिया जा रहा है, लेकिन खुशहाली सूचकांक के लिए केवल जुड़ाव ही काफी नहीं है। रविशंकर के मुताबिक आज भारत की स्थिति काफी बेहतर है। बीते एक दशक में उल्लेखनीय सुधार हुए हैं।
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मानवीय मूल्य बहुत ऊंचे, लोग संसाधनों को साझा करते हैं
उन्होंने कहा, 'मैंने पूरी दुनिया की यात्रा की है और देखा है कि भारत में मानवीय मूल्य बहुत ऊंचे हैं। बात चाहे करुणा की हो, या जिस तरह से आप मेहमानों तक पहुंचना चाहते हैं, जिस तरह से लोग अपने संसाधनों को साझा करते हैं, सबकुछ अविश्वसनीय है।'

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भारत में संकट के समय पूरा गांव मदद करने के लिए खड़ा होगा

बकौल रविशंकर, भारत में अगर आपके परिवार के साथ कुछ होता है, तो पूरा गांव उनकी मदद करने के लिए खड़ा हो जाएगा। देश में इस तरह का सामाजिक जुड़ाव बहुत ज्यादा है। बेशक, देश में समस्याएं भी हैं, लेकिन... पिछले एक दशक में बहुत सुधार हुआ है। वास्तव में खुशी या नाखुशी गरीबी से जुड़ी नहीं है।

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कब और किसने जारी की रिपोर्ट? किस कारण हो रहा है विवाद
गौरतलब है कि ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की ओर से प्रकाशित वर्ल्ड हैप्पीनेस रिपोर्ट 2025 के अनुसार, खुशहाली सिर्फ आर्थिक विकास से तय नहीं होती, बल्कि इसमें लोगों का आपसी भरोसा और सामाजिक जुड़ाव भी बड़ी भूमिका निभाते हैं। इस रिपोर्ट में लगातार आठवीं बार फिनलैंड को दुनिया का सबसे खुशी देश माना गया है। इसमें भारत को पाकिस्तान समेत युद्धग्रस्त यूक्रेन व फलस्तीन से भी ज्यादा अवसादग्रस्त व असंतुष्ट बताया गया है। इस सूचकांक ने एक बार फिर इस बहस को जन्म दिया है कि क्या इस तरह के वैश्विक सूचकांक वाकई तथ्यों पर आधारित होते हैं? चौंकाने वाली बात यह भी है कि सकल खुशहाली सूचकांक का विचार देने वाला भूटान, जिसकी 2024 की रिपोर्ट में 79वीं रैंकिंग थी, इस वर्ष कोई रैंकिंग नहीं पा सका है।

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