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SC: शीर्ष कोर्ट में तत्काल सुनवाई के लिए मौखिक उल्लेख पर रोक, CJI खन्ना का ईमेल या लिखित पत्र भेजने का निर्देश

Wed, 13 Nov 2024 12:04 AM IST
शुभम कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शुभम कुमार Updated Wed, 13 Nov 2024 12:04 AM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायधिश संजीव खन्ना ने अब तत्काल लिस्टिंग और सुनवाई के लिए मौखिक उल्लेख पर रोक लगा दी है। जिसके बाद अब वकीलों को तत्काल सुनावाई के लिए ईमेल या लिखित पत्र में कारण के साथ भेजने होंगे कि आखिर उनके मामले को क्यों तुरंत सुना जाना चाहिए।

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Oral mention for urgent hearing in the apex court banned, CJI Khanna directed to send email or written letter
सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश संजीव खन्ना - फोटो : ANI

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव खन्ना ने अब मामलों की तत्काल लिस्टिंग और सुनवाई के लिए कोई मौखिक उल्लेख पर रोक लगाने का आदेश किया है। सीजेआई के इस निर्णय के बाद अब वकीलों को इसके लिए ईमेल या लिखित पत्र भेजने होंगे। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस खन्ना ने मंगलवार को स्पष्ट किया कि अब तात्काल कार्रवाई में मौखिक प्रस्तुतियां स्वीकार नहीं होंगी। सिर्फ ईमेल या लिखित पर्ची के जरिये ही ऐसा किया जा सकेगा।
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वकीलों को बताना होगा कारण
सीजेआई के इस आदेश के बाद वकील अपनी मांगों को ईमेल या लिखित आवेदन के माध्यम से भेदेंगे। जिसमें वे बताएंगे कि आखिर उनके मामले को क्यों तुरंत सुना जाना चाहिए। बता दें कि यह बदलाव पूर्व मुख्य न्यायाधीश डी. वाई. चंद्रचूड़ द्वारा शुरू की गई प्रणाली का हिस्सा है जो मौखिक उल्लेखों को सुनते थे।
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हालांकि यह प्रथा बहुत समय लेती थी और अक्सर न्यायिक समय का आधा घंटा खर्च होता था, जिससे बड़े आरोपी और वरिष्ठ अधिवक्ताओं को फायदा होता था क्योंकि वे बारी से पहले ही मामलों की सुनवाई सुनिश्चित कर सकते थे।
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वकीलों की प्रतिक्रिया
सीजेआई के इस निर्णय के बाद इस मामले पर वकिलों की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी है। जहां कुछ लोग इस कदम को सकारात्मक मानते हुए इसे न्यायिक समय की बचत करने वाला बताते हैं जबकि कुछ का मानना है कि अत्यंत आवश्यक मामलों में मौखिक उल्लेख की प्रथा जारी रहनी चाहिए।


सीजेआई ने सांविधानिक कर्तव्य का किया जिक्र
जस्टिस खन्ना ने न्यायिक सुधारों के लिए नागरिको केंद्रित एजेंडा की रूपरेखा बनाई है। जिसको लेकर उन्होंने कहा कि नागरिकों को उनकी स्थिति की परवाह किए बिना न्याय तक आसान पहुंच और समान व्यवहार - सुनिश्चित करना न्यायपालिका का सांविधानिक कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि आमतौर पर वकील दिन की कार्यवाही की शुरुआत में सीजेआई की अगुवाई वाली पीठ के समक्ष अपने मामलों का उल्लेख करते हैं, ताकि मामलों की बारी से पहले लिस्टिंग और सुनवाई की जा सके।
 
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