फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   OPS: NJCA convener Shiv Gopal Mishra warned to government, do not compel to go on a nationwide strike

OPS: पुरानी पेंशन पर सरकार को चेतावनी, न बनाएं 1974 की रेल हड़ताल का माहौल, यूं किया 'इंदिरा गांधी' का जिक्र

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Fri, 12 Jan 2024 07:10 PM IST
विज्ञापन
सार
नेशनल ज्वाइंट काउंसिल ऑफ एक्शन (एनजेसीए) के संयोजक शिवगोपाल मिश्रा ने गुरुवार को जंतर-मंतर पर सरकार को चेतावनी दे दी है। मिश्रा ने कहा, अब कोई धरना प्रदर्शन नहीं होगा। सरकार हमें, देशव्यापी हड़ताल करने के लिए मजबूर कर रही है। उन्होंने कहा, सरकार 1974 की रेल हड़ताल जैसा माहौल न बनाए...
loader
OPS: NJCA convener Shiv Gopal Mishra warned to government, do not compel to go on a nationwide strike
OPS: Shivgopal Mishra - फोटो : Amar Ujala/Sonu Kumar

विस्तार

देश में पुरानी पेंशन बहाली की मांग को लेकर सरकारी कर्मियों का धैर्य अब जवाब देता हुआ दिखाई पड़ रहा है। केंद्र सरकार को चेताने के लिए कर्मियों ने आठ जनवरी से 11 जनवरी तक 'रिले हंगर स्ट्राइक' की है। नेशनल ज्वाइंट काउंसिल ऑफ एक्शन (एनजेसीए) के संयोजक शिवगोपाल मिश्रा ने गुरुवार को जंतर-मंतर पर सरकार को चेतावनी दे दी है। मिश्रा ने कहा, अब कोई धरना प्रदर्शन नहीं होगा। सरकार हमें, देशव्यापी हड़ताल करने के लिए मजबूर कर रही है। उन्होंने कहा, सरकार 1974 की रेल हड़ताल जैसा माहौल न बनाए। मिश्रा ने सरकार को चेतावनी देते हुए कह दिया, 1974 की हड़ताल के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का क्या हाल हुआ था। देश में आपातकाल लगा और उसके बाद कांग्रेस पार्टी को करारी हार मिली थी। अब जल्द ही सभी कर्मचारी संगठनों की बैठक बुलाई जाएगी। देश भर में होने वाली अनिश्चितकालीन हड़ताल की तिथि तय होगी। हड़ताल की स्थिति में ट्रेनों व बसों का संचालन बंद हो जाएगा। केंद्र एवं राज्य सरकारों के दफ्तरों में कलम नहीं चलेगी।

गारंटी वाली 'पुरानी पेंशन' बहाली चाहिए

1974 में जॉर्ज फर्नांडीस की अगुआई में रेल हड़ताल हुई थी। उस वक्त कहा गया था कि सरकार अगर कर्मचारियों की मांगों को पूरा करती, तो उस पर मुश्किल से दो सौ करोड़ रुपये खर्च होने थे, लेकिन सरकार को हड़ताल तोड़ने के लिए करीब दो हजार करोड़ रुपये खर्च करने पड़े थे। इसके बाद रेल कर्मियों में असंतोष फैल गया था। वह हड़ताल 8 मई 1974 को प्रारंभ होकर 27 मई 1974 तक चली थी। इस दौरान रेलवे में सारा कामकाज ठप हो गया था। हजारों लोगों को जेल जाना पड़ा था। अनेक लोगों को नौकरियों से हाथ धोना पड़ा था। शिवगोपाल मिश्रा का कहना था, हमने सरकार के समक्ष कई बार आग्रह किया है कि पुरानी पेंशन लागू की जाए। सरकारी कर्मियों को बिना गारंटी वाली 'एनपीएस' योजना को खत्म करने और परिभाषित एवं गारंटी वाली 'पुरानी पेंशन योजना' की बहाली से कम कुछ भी मंजूर नहीं है। इसके लिए समय-समय पर ज्ञापन सौंपे गए हैं। कैबिनेट सचिव के साथ बैठक में यह मुद्दा उठाया गया है। रामलीला मैदान में सरकारी कर्मियों की कई रैलियां हो चुकी हैं। इनमें केंद्र और राज्यों के लाखों सरकारी कर्मियों ने हिस्सा लिया था। इतना कुछ होने पर भी केंद्र सरकार ने कर्मियों की इस मांग की तरफ कोई ध्यान नहीं दिया।

'ऐसी नौबत सरकार न लाए'

केंद्र सरकार, अड़ियल रवैया अख्तियार कर रही है। कर्मियों को हड़ताल के लिए मजबूर कर रही है। मिश्रा ने कहा, कोविड में हमने 11 हजार गाड़ियां चलाई थीं। हमारे 3000 कर्मी शहीद हुए थे। हर साल 400 से अधिक रेल कर्मी मारे जा रहे हैं। क्या कोविड में कोई मंत्री/एमपी/एमएलए शहीद हुआ। अब धरना खत्म है, हम हड़ताल पर जाएंगे। सरकार को ध्यान रखना चाहिए कि 1974 की रेल हड़ताल के बाद प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने इमरजेंसी लगाई थी। उसके बाद उन्हें मुंह की खानी पड़ी थी। मौजूदा सरकार, ऐसी नौबत सरकार न लाए। नेशनल मूवमेंट फॉर ओल्ड पेंशन स्कीम (एनएमओपीएस) के राष्ट्रीय अध्यक्ष विजय कुमार बंधु ने कहा, केंद्र सरकार एनपीएस में संशोधन करने जा रही है। हम संशोधन के लिए आंदोलन नहीं कर रहे हैं। अगर कोई भी कर्मचारी नेता या संगठन, सरकार के संशोधन प्रस्ताव पर सहमत होते हैं तो '2004' वाली गलतियां, '2024' में भी दोहराई जाएंगी। एनपीएस एक डस्टबीन है। करोड़ों कर्मियों का दस फीसदी पैसा और सरकार का 14 फीसदी पैसा, डस्टबीन में जा रहा है। यह स्वीकार्य नहीं है। पुरानी पेंशन बहाली तक, कर्मियों का आंदोलन जारी रहेगा। शिवगोपाल मिश्रा ने कहा, वित्त मंत्रालय की कमेटी अपनी रिपोर्ट दे या न दे। इससे कर्मियों को कोई मतलब नहीं है। वजह, यह कमेटी ओपीएस लागू करने के लिए नहीं, बल्कि एनपीएस में सुधार के लिए गठित की गई है।

अनिश्चितकालीन हड़ताल के लिए सहमति

एआईडीईएफ के महासचिव सी.श्रीकुमार का कहना है, लोकसभा चुनाव से पहले 'पुरानी पेंशन' लागू नहीं होती है, तो भाजपा को उसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा। कर्मियों, पेंशनरों और उनके रिश्तेदारों को मिलाकर यह संख्या दस करोड़ के पार चली जाती है। चुनाव में बड़ा उलटफेर करने के लिए यह संख्या निर्णायक है। यही वजह है कि कर्मचारी संगठन, अब विभिन्न राजनीतिक दलों से संपर्क करेंगे। अगर वे कर्मचारियों की मांग मान लेते हैं, तो दस करोड़ वोटों का समर्थन संबंधित राजनीतिक दल के पक्ष में जा सकता है। सरकार को चेताने के लिए देशभर में 11 जनवरी तक 'रिले हंगर स्ट्राइक' की जा रही है। देश के दो बड़े कर्मचारी संगठन, रेलवे और रक्षा (सिविल) ने अनिश्चितकालीन हड़ताल के लिए अपनी सहमति दी है। स्ट्राइक बैलेट में रेलवे के 11 लाख कर्मियों में से 96 फीसदी कर्मचारी ओपीएस लागू न करने की स्थिति में अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने के लिए तैयार हैं। इसके अलावा रक्षा विभाग (सिविल) के चार लाख कर्मियों में से 97 प्रतिशत कर्मी, हड़ताल के पक्ष में है।

केवल परिभाषित एवं गारंटीकृत ओपीएस मंजूर

कर्मियों के मुताबिक, केंद्र सरकार एनपीएस में ही ओपीएस जैसे कुछ प्रावधानों को शामिल कर सकती है। जैसे, रिटायरमेंट पर मिली बेसिक सेलरी का, एनपीएस में 40 से 45 फीसदी भुगतान बतौर पेंशन देने पर विचार हो रहा है। ऐसे किसी भी प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया जाएगा। ये बातें केवल 'ओपीएस' से ध्यान भटकाने का प्रयास हैं। सरकारी कर्मियों को बिना गारंटी वाली 'एनपीएस' योजना को खत्म करने और परिभाषित एवं गारंटी वाली 'पुरानी पेंशन योजना' की बहाली से कम कुछ भी मंजूर नहीं है। अगर सरकार पुरानी पेंशन की तर्ज पर एनपीएस में लाभ देना चाहती है, तो वह ओपीएस ही क्यों नहीं लागू कर देती। एनपीएस में कर्मियों का दस फीसदी हिस्सा कटता है। इस बात का जवाब कोई नहीं देता कि रिटायरमेंट पर क्या ब्याज सहित यह राशि मिलती है। क्या इस राशि पर डीए बढ़ोतरी का कोई असर होता है। एनपीएस में न तो डीए और न ही पे रिवाइज का लाभ मिलता है। नए वेतन आयोग के गठन का भी एनपीएस पर असर नहीं होगा। ऐसे में एनपीएस के तहत अंतिम सेलरी कभी रिवाइज ही नहीं होगी।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

Followed