OPS: पुरानी पेंशन पर कांग्रेस की धड़ाधड़ गारंटी, लेकिन सियासी जोखिम से घबरा नहीं रही BJP, किसके पाले में गेंद?
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विस्तार
कांग्रेस पार्टी 'पुरानी पेंशन बहाली' की मांग को धड़ाधड़ अपनी चुनावी गारंटी की सूची में शामिल कर रही है। हालांकि विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस पार्टी ने छत्तीसगढ़ और राजस्थान में सरकारी कर्मियों के लिए पुरानी पेंशन लागू कर दी थी। मध्यप्रदेश में इस मुद्दे को चुनावी गारंटी में शामिल किया गया है। राजस्थान की चुनावी गारंटी में भी ओपीएस को जगह मिल गई है। कांग्रेस ने गारंटी दी है कि राजस्थान में दूसरी बार सरकार बनते ही कर्मचारियों के लिए 'ओपीएस' को कानून के जरिए पक्का कर दिया जाएगा। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा, तो वेट नहीं, वोट कीजिए और पोस्टल बैलेट से ओल्ड पेंशन स्कीम (ओपीएस) को लॉक कीजिए। केंद्र और राज्यों के सरकारी कर्मचारी संगठनों के नेता भी कह चुके हैं कि ओपीएस का विरोध कर भाजपा, सियासत में एक बड़ा जोखिम ले रही है। दूसरी तरफ भाजपा, इस जोखिम से चिंतित नजर नहीं आ रही। कर्मचारी नेता बताते हैं कि इसके पीछे एक अहम वजह एनपीएस का पैसा है। वही पैसा जो 'पेंशन फंड एंड रेगुलेटरी अथॉरिटी' (पीएफआरडीए) में जमा है। यह केंद्र सरकार के नियंत्रण में है। केंद्र की मर्जी के बिना, एनपीएस का पैसा राज्यों को नहीं दिया जा सकता। केंद्र सरकार, इसे देने से साफ इनकार कर चुकी है। यानी ओपीएस के मुद्दे पर बॉल अभी केंद्र के पाले में ही है।
पीएफआरडीए एक्ट में संशोधन के लिए हुई रैली
'पुरानी पेंशन' बहाली के लिए तीन नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में सरकारी कर्मियों ने चेतावनी रैली आयोजित की थी। कॉन्फेडरेशन ऑफ सेंट्रल गवर्नमेंट एम्प्लाइज एंड वर्कर्स के बैनर तले आयोजित हुई इस रैली में ऑल इंडिया स्टेट गवर्नमेंट एम्प्लाइज फेडरेशन सहित करीब 50 कर्मचारी संगठनों ने हिस्सा लिया था। कर्मियों का कहना था कि केंद्र सरकार को ओपीएस सहित दूसरी मांगों पर सकारात्मक विचार करना होगा। अगर केंद्र सरकार, एनपीएस की समाप्ति और ओपीएस की बहाली जैसी अन्य मागें नहीं मानती है तो कर्मचारी, अनिश्चितकालीन हड़ताल जैसा कठोर कदम भी उठा सकते हैं। कर्मियों की मुख्य मांगों में पीएफआरडीए एक्ट में संशोधन करना या उसे पूरी तरह खत्म करना भी शामिल था। रामलीला मैदान में इस बाबत पोस्टर और बैनर लगाए गए थे। उन पर लिखा था कि सरकार, पीएफआरडीए और एफएसईटीओ को वापस ले। कर्मचारी संगठनों के नेताओं का कहना था कि जब तक इस एक्ट को खत्म नहीं किया जाता, तब तक विभिन्न राज्यों में लागू हो रही ओपीएस की राह मुश्किल ही बनी रहेगी। वजह, एनपीएस के तहत कर्मियों का जो पैसा कटता है, वह पीएफआरडीए के पास जमा है। केंद्र सरकार, कह चुकी है कि वह पैसा राज्यों को नहीं लौटाया जाएगा। ऐसे में जहां भी ओपीएस लागू हो रहा है, वहां पर सरकार बदलते ही दोबारा से एनपीएस लागू किया जा सकता है। ऐसे में राज्यों द्वारा की जा रही ओपीएस बहाली में कई पेंच फंसे रहेंगे। कांग्रेस ने हिमाचल प्रदेश और कर्नाटक में भी ओपीएस लागू करने का वादा किया था।
इसलिए बॉल, केंद्र के पाले में है
कर्मचारी नेताओं का कहना है कि भले ही राजस्थान या किसी दूसरे राज्य में ओपीएस लागू हो गई है। अब कांग्रेस पार्टी ने राजस्थान में सरकारी कर्मचारियों के लिए 'ओपीएस' को कानून के जरिए पक्का करने की गारंटी दे दी है। इससे यह मामला खत्म नहीं हो जाता। राज्य में बिल पास होने से क्या होगा। दूसरी सरकार आने पर वह बिल रद्द भी हो सकता है। उस कानून में कोई बदलाव हो सकता है। बिना केंद्र की सहमति या हस्तक्षेप के, एनपीएस का पैसा राज्यों को नहीं मिल सकता। ऐसे में राज्यों के कानून का कोई फायदा नहीं होगा। केंद्र सरकार पहले ही एनपीएस का पैसा लौटाने से मना कर चुकी है। जब तक पीएफआरडीए एक्ट को खत्म नहीं किया जाता, तब तक विभिन्न राज्यों में लागू हो रही ओपीएस की राह मुश्किल ही बनी रहेगी। यही वजह है कि भाजपा, इस मुद्दे को लेकर ज्यादा चिंतित नहीं है। जो राज्य बाद में ओपीएस लागू कर रहे हैं, उन्हें आर्थिक दिक्कतों का सामना करना ही पड़ेगा। देश में पश्चिम बंगाल ही एकमात्र ऐसा राज्य है, जहां पर एनपीएस लागू ही नहीं किया गया।
आर्थिक परेशानी का सामना
अब जो राज्य, पुरानी पेंशन योजना को लागू करने का एलान कर रहे हैं, उन्हें आने वाले दिनों में आर्थिक तौर पर परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। वजह, केंद्र सरकार ने कई नियमों में बदलाव किया है। संभव है कि जो प्रदेश, ओपीएस लागू कर रहे हैं, उनके लिए केंद्र से अतिरिक्त कर्ज मिलने की राह मुश्किल हो जाए। एनपीएस के तहत राज्य सरकारें, अपना और कर्मचारी की सैलरी का एक तय हिस्सा पेंशन फंडिंग रेगुलेटरी डेवलपमेंट अथॉरिटी को देती हैं। इसे बाद में कर्मचारी को पेंशन के रूप में दिया जाता है। इसके तहत पेंशन फंडिंग एडजस्टमेंट के तहत राज्य सरकारें, केंद्र से अतिरिक्त कर्ज ले सकती हैं। यह अतिरिक्त कर्ज राज्य के सकल घरेलू उत्पाद का तीन फीसदी तक हो सकता है।
यह पैसा राज्यों को नहीं दिया जा सकता
पुरानी पेंशन योजना को दोबारा से लागू करने वाली राज्य सरकारों और केंद्र के बीच ठन गई है। जिन गैर-भाजपा शासित राज्यों ने अपने कर्मियों को पुरानी पेंशन के दायरे में लाने की घोषणा की है, उन्हें 'एनपीएस' में जमा कर्मियों का पैसा वापस नहीं मिलेगा। केंद्र ने साफ कर दिया है कि यह पैसा 'पेंशन फंड एंड रेगुलेटरी अथारिटी' (पीएफआरडीए) के पास जमा है। नई पेंशन योजना 'एनपीएस' के अंतर्गत केंद्रीय मद में जमा यह पैसा राज्यों को नहीं दिया जा सकता। वह पैसा केवल उन कर्मचारियों के पास जाएगा, जो इसका योगदान कर रहे हैं। छत्तीसगढ़, राजस्थान, पंजाब और हिमाचल प्रदेश की सरकारों ने केंद्र से 'पीएफआरडीए' के पास जमा पैसे को लौटाने का आग्रह किया था। केंद्र सरकार में 'स्टाफ साइड' की राष्ट्रीय परिषद (जेसीएम) के सचिव शिव गोपाल मिश्रा के मुताबिक, वे केंद्र सरकार की गीदड़ भभकी से नहीं डरेंगे। यह कर्मियों का पैसा है, उन्हें मिलेगा। सरकार कुछ नहीं करेगी तो सुप्रीम कोर्ट में जाएंगे। जो राज्य सरकारें, पुरानी पेंशन लागू कर रही हैं, अब वहां के कर्मचारियों का पैसा 'पीएफआरडीए' के पास नहीं जा रहा है। कर्मचारियों का पैसा एनपीएस के लिए नहीं कटेगा। राज्य सरकार, उसे अपने खाते में जमा कर रही हैं, क्योंकि कर्मचारी को राज्य के खजाने से पेंशन मिलेगी। एनपीएस या किसी अन्य योजना के तहत कर्मियों का जो पैसा 'पीएफआरडीए' में जमा है, वह कर्मचारी का ही रहेगा। केंद्र सरकार को आज नहीं तो कल, उसे वापस करना ही पड़ेगा। केंद्र सरकार और 'पीएफआरडीए', कर्मियों का पैसा राज्यों को न लौटाकर गलत कर रहे हैं।
कोई मैकेनिज्म तो बनाना ही पड़ेगा
छत्तीसगढ़ और राजस्थान सरकार ने पीएफआरडीए से पैसा वापस लेने के लिए केंद्र सरकार से आग्रह किया था। छत्तीसगढ़ में सरकारी कर्मियों ने पीएफआरडीए में 17 हजार करोड़ रुपये से अधिक राशि जमा कराई है। इस राशि की वापसी के लिए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, पीएम मोदी को पत्र लिख चुके हैं। भारतीय प्रतिरक्षा मजदूर संघ के महासचिव मुकेश कुमार के अनुसार, एनपीएस का पैसा तो केंद्र सरकार के नियंत्रण में है। अगर वह पैसा वापस नहीं आता है, तो राज्य सरकारों के खजाने पर इसका अतिरिक्त भार पड़ेगा। सरकारी खाते में उस पैसे का डिस्पोजल क्या होगा, यह एक अहम सवाल है। एनपीएस में जमा पैसा तो मार्केट में लगा है, उसे कैसे वापस लाएंगे, इसका कोई मैकेनिज्म तो बनाना ही पड़ेगा। केंद्र सरकार एनपीएस का पैसा दे सकती है, बशर्ते कि इसके लिए पीएफआरडीए एक्ट में संशोधन करना पड़ेगा। इस बाबत केंद्र सरकार को तैयार रहना चाहिए।