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Constitution Day: विपक्ष का लोकसभा अध्यक्ष को पत्र, कहा- राष्ट्रपति के भाषण और संविधान पर संसद में हो चर्चा

Tue, 26 Nov 2024 04:51 PM IST
बशु जैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: बशु जैन Updated Tue, 26 Nov 2024 04:51 PM IST
सार

कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने संविधान की प्रस्तावना पढ़ने के बाद सवाल किया कि क्या इसका अक्षरशः पालन हो रहा है। क्या लोगों को न्याय, स्वतंत्रता मिल रही है? क्या अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है? भाईचारा कहां है? केवल संविधान के आगे झुकने से इसका पालन नहीं होगा। यह तब होगा जब हर नागरिक में आत्मविश्वास पैदा होगा।

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Opposition's letter to LS Speaker, said- President's speech and Constitution should be discussed in Parliament
संसद भवन - फोटो : ANI

विस्तार

संविधान दिवस पर पुराने सेंट्रल हॉल में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के भाषण के बाद विपक्ष ने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखा है। डीएमके सांसद ने पत्र में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर संसद में चर्चा किए जाने की मांग की है। वहीं कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने भी ओम बिरला को पत्र लिखकर संविधान पर चर्चा करने की मांग की है। 
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कांग्रेस अध्यक्ष खरगे और राहुल गांधी ने लिखा पत्र
राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने दोनों सदनों में अध्यक्ष को पत्र लिखकर कहा कि दोनों सदनों में दो दिनों के लिए संविधान पर चर्चा होनी चाहिए। खरगे ने कहा कि इसके लिए समय आवंटित किया जाना चाहिए ताकि संविधान की अच्छी बातों पर चर्चा हो सके और आज जो गलत चीजें हो रही हैं, उन पर भी चर्चा हो सके। हम सरकार के जवाब का इंतजार कर रहे हैं।
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संविधान का अक्षरश: पालन हो रहा है क्या: दिग्विजय सिंह
कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने संविधान की प्रस्तावना पढ़ने के बाद सवाल किया कि क्या इसका अक्षरशः पालन हो रहा है। क्या लोगों को न्याय, स्वतंत्रता मिल रही है? क्या अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है? भाईचारा कहां है? केवल संविधान के आगे झुकने से इसका पालन नहीं होगा। यह तब होगा जब हर समुदाय के हर नागरिक में आत्मविश्वास पैदा होगा। प्रधानमंत्री जो कह रहे हैं, उसका पालन करें। उपदेश देने से पहले अभ्यास करें।
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सिंह ने कहा कि संभल जैसी घटनाएं बार-बार हो रही हैं। सुप्रीम कोर्ट के जज और हमारे सेवानिवृत्त जस्टिस चंद्रचूड़ भी इस देश के कानूनों की अनदेखी करते हैं और कहते हैं कि सर्वेक्षण की अनुमति है क्योंकि यह आस्था का मामला है।  इस देश में हर व्यक्ति को अपने धर्म और आस्था का पालन करने का समान अधिकार है। बढ़ती वैमनस्यता राष्ट्र के लिए खतरा है।

कांग्रेस नेता गौरव गोगोई ने कहा कि बीआर आंबेडकर की 125वीं जयंती और भारत छोड़ो आंदोलन की 75वीं वर्षगांठ जैसे अवसरों पर संसद में बहस आयोजित करने की मिसाल है। हम चाहते हैं कि दोनों सदनों में संविधान पर दो दिन तक बहस हो, ताकि सभी सांसदों को संविधान के प्रति अपना समर्पण दिखाने का मौका मिले और देश इसे देख सके। इसलिए दोनों सदनों में विपक्ष के नेताओं ने इस पर अध्यक्ष को पत्र लिखा है। इससे देश में अच्छा संदेश जाएगा। हमने सभी विपक्षी नेताओं से चर्चा की है।


डीएमके सांसद ने पत्र में की ये मांग
डीएमके सांसद टीआर बालू ने लोकसभा अध्यक्ष को लिखे पत्र में कहा कि संविधान दिवस समारोह में देश के नाम राष्ट्रपति के संबोधन का उद्देश्य देश के सभी नागरिकों तक सांविधानिक मूल्यों का प्रसार करना था। उन्होंने लिखा कि राष्ट्रपति के संबोधन के बाद विद्वानों और आम जनता ने यह महसूस किया कि संविधान प्रमुख विशेषता जिनमें समाजवादी और धर्मनिरपेक्ष शब्द शामिल है का राष्ट्रपति के अभिभाषण में उल्लेख नहीं किया गया। उम्मीद है सरकार ने इस अभिभाषण को तैयार और मंजूर किया होगा। संसद की प्रक्रिया के तहत इस बारे में राष्ट्र को और अधिक जानकारी देने के लिए राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा की अनुमति दी जानी चाहिए। अध्यक्ष महोदय मौजूदा सत्र में ही लोकसभा के कार्य एजेंडे में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा को शामिल करें।
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