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तीसरे फ्रंट की गुंजाइश कम, सरकार बनाने के विकल्पों पर विपक्षी दलों की बैठक
Fri, 10 May 2019 12:39 AM IST
Jitendra Bhardwaj
जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली
जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली
Published by: Jitendra Bhardwaj
Updated Fri, 10 May 2019 12:39 AM IST
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महागठबंधन (फाइल फोटो)
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लोकसभा चुनाव में अभी दो चरणों का मतदान बाकी है, लेकिन यूपीए के घटक दलों ने सरकार का गठन करने के मकसद से सभी मौजूद विकल्पों पर बातचीन करने के लिए तैयारी शुरु कर दी है। कांग्रेस का दावा है कि देश में तीसरे फ्रंट की गुंजाइश न के बराबर है। राजनीतिक दल दो हिस्सों में ही विभाजित रहेंगे, एक यूपीए और दूसरा एनडीए। अगर किसी पार्टी की कोई नाराजगी है तो उसे मिल बैठकर दूर कर लेंगे, लेकिन तीसरे धड़े या मोर्चे के गठन जैसी संभावना नहीं होगी।
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19 मई को अंतिम चरण का मतदान है, लिहाजा उसी दिन शाम को एग्जिट पोल आ जाएंगे। किस पार्टी को कितनी सीटें मिली हैं, यह गुणा-भाग कर 21 मई की शाम को कांग्रेस के नेतृत्व में यूपीए की बैठक होगी। इसमें कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और सोनिया गांधी सहित विभिन्न पार्टियों के अध्यक्ष, संस्थापक और नेता उपस्थित रहेंगे।
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कांग्रेस पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने वीरवार को बताया कि पांच चरणों के चुनाव की जो बूथ रिपोर्ट है, उसके मुताबिक कांग्रेस पार्टी और उसके सहयोगी दल अच्छी स्थिति में हैं।
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जिन राज्यों में कांग्रेस का किसी के साथ कोई गठबंधन नहीं है, वहां एनडीए के अलावा जो दल चुनाव लड़ रहे हैं, उनकी भी शानदार रिपोर्ट है। कांग्रेस नेता ने कहा, यूपी में ही भाजपा को बड़ा नुकसान हो रहा है। यूपी, पश्चिम बंगाल, बिहार, राजस्थान, मध्यप्रदेश, तमिलनाडु, आंधप्रदेश, उड़ीसा, झारखंड, छत्तीसगढ़, हरियाणा और उत्तर पूर्व के कई राज्यों में यूपी के सहयोगी दलों को खासी बढ़त मिलेगी।
कांग्रेस नेता डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी का मानना है कि चुनाव के बाद यह दिक्कत बिल्कुल नहीं आएगी कि कौन किस तरफ जा रहा है। चर्चा होगी तो केवल इस पर कि प्रधानमंत्री कौन बनेगा। कांग्रेस पार्टी इस बाबत अपने सभी सहयोगियों के साथ बहुत खुली और विस्तारपूर्वक चर्चा करेगी। सत्ता पक्ष की ओर से लोगों को गुमराह करने के लिए समय-समय पर ऐसी बातें की जाती है, जिससे यह लगे कि यूपीए एक नहीं है।
एनडीए को 21 मई के बाद पता चल जाएगा कि कौन कितना मजबूत है। अखिलेश यादव द्वारा यह कहा जाना कि इस बार जो प्रधानमंत्री होगा, वह यूपी से होगा, इस बाबत सिंघवी का कहना था कि लोकतंत्र में अपनी बात रखने का अधिकार सभी को है। इसमें गलत क्या है। सपा या बसपा जैसे दल भले ही अपनी पार्टी के बैनर पर चुनाव लड़ रहे हैं, लेकिन वे भी हमारे सहयोगी हैं। हम उनका सहयोग करें या वे हमारी मदद करें, एक ही बात है।
कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता अहमद पटेल कहते हैं कि ऐसा कोई राज्य ही नहीं बचा है, जहां पर भाजपा को शिकस्त न मिल रही हो। कांग्रेस पार्टी और हमारे सहयोगी दल, भाजपा को सत्ता में दोबारा आने से रोकने में कामयाब हो गए हैं। पटेल और सिंघवी, दोनों ने दावा किया है कि उत्तरप्रदेश में 2014 के मुकाबले भाजपा की सीटें आधे से भी कम रहने की संभावना है।