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Opposition Meeting: आप की शर्त मानने की इनसाइड स्टोरी, केजरीवाल की जिद पर कांग्रेस ने ली 'अपनों' की नाराजगी

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Mon, 17 Jul 2023 04:10 PM IST
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सार
Opposition Meeting: 23 जून को पटना में विपक्षी दलों की पहली बैठक हुई थी। उससे पहले आम आदमी पार्टी के भीतर से ऐसी आवाजें सुनाई पड़ी कि पटना की बैठक में कांग्रेस सहित दूसरे विपक्षी दलों ने अगर दिल्ली सरकार के लिए लाए गए केंद्र के अध्यादेश पर चर्चा नहीं की तो 'आप' बैठक से किनारा कर सकती है...
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Opposition Meeting: Read inside story, how congress agreed on terms and conditions of Arvind Kejriwal
Bengaluru Opposition Meeting - फोटो : Amar Ujala/ Himanshu Bhatt

विस्तार

विपक्षी दलों की दो दिवसीय बैठक बेंगलुरु में सोमवार से शुरू हो रही है। सोनिया गांधी सहित 26 विपक्षी पार्टियों के शीर्ष नेता, एकता बैठक में शिरकत कर रहे हैं। ये सभी नेता 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को टक्कर देने की पुख्ता रणनीति तैयार करेंगे। इस बैठक में विपक्षी दलों के बीच सीटों के बंटवारे को लेकर किसी फॉर्मूले पर सहमति बन सकती है। इससे पहले पटना में हुई विपक्षी दलों की पहली बैठक में करीब डेढ़ दर्जन पार्टियों के नेता ही पहुंचे थे। हालांकि दूसरी बैठक के लिए तिथि और स्थल, दोनों में बदलाव किया गया। पहले यह बैठक, 13 और 14 जुलाई को शिमला में होनी थी, लेकिन बाद में इसे बेंगलुरु में शिफ्ट कर दिया गया। तिथि भी 17 और 18 जुलाई हो गई। पहली बैठक के बाद एक समय ऐसा भी आया, जब 'विपक्षी कुनबा' बिखराव की राह पर आ पहुंचा। वजह, अरविंद केजरीवाल इस जिद पर अड़े रहे कि कांग्रेस पार्टी को दिल्ली सरकार में ट्रांसफर पोस्टिंग के लिए केंद्र द्वारा लाए गए 'अध्यादेश' के खिलाफ 'आप' का साथ देना होगा। इस मुद्दे पर 'आप' ने पटना की बैठक में अपने तेवर दिखा दिए थे। एकता की इनसाइड स्टोरी में एक समय वह भी आया, जब विपक्षी कुनबा टूटते-टूटते बचा। कांग्रेस पार्टी ने अपने नेताओं की नाराजगी मोल लेकर 'विपक्षी कुनबे' में 'केजरीवाल' का साथ देने की घोषणा कर दी।

तब दबाव में नहीं आई 'राहुल और खरगे' की जोड़ी

23 जून को पटना में विपक्षी दलों की पहली बैठक हुई थी। उससे पहले आम आदमी पार्टी के भीतर से ऐसी आवाजें सुनाई पड़ी कि पटना की बैठक में कांग्रेस सहित दूसरे विपक्षी दलों ने अगर दिल्ली सरकार के लिए लाए गए केंद्र के अध्यादेश पर चर्चा नहीं की तो 'आप' बैठक से किनारा कर सकती है। विपक्षी दलों को इस विषय पर अपना रुख स्पष्ट करना होगा। हालांकि ऐसा नहीं हुआ। दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल और पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान, दोनों ने बैठक में शिरकत की। ये बात अलग रही कि जब विपक्षी दलों के नेताओं ने प्रेसवार्ता की, तो उसमें 'आप' नेता शामिल नहीं हुए। बैठक खत्म होने के बाद ही केजरीवाल और मान, दिल्ली के लिए रवाना हो गए। इसके बाद 'कांग्रेस और आप' के नेताओं के कई ऐसे बयान सामने आए, जिससे विपक्षी एकता मुश्किल में पड़ती हुई दिखाई दी। उस वक्त कांग्रेस पार्टी के नेताओं ने धैर्य से काम लिया। राहुल गांधी ने पटना की बैठक से पहले कहा, हम सब मिलकर 'मोदी' से लड़ेंगे। कांग्रेस का मतलब देश के गरीबों के साथ खड़े होना और उनके लिए काम करना है। मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा, अध्यादेश का विरोध तो सदन में होता है। अभी से इसका प्रचार क्यों हो रहा है। विपक्ष को मिलकर, भाजपा के खिलाफ लड़ना है। इस बयान से स्पष्ट हो गया कि कांग्रेस पार्टी किसी के दबाव में आकर कोई फैसला नहीं लेगी। विपक्षी एकता महत्वपूर्ण है, उस पर कांग्रेस आगे बढ़ती रहेगी।

कांग्रेस के रुख से वाकिफ थे केजरीवाल

अध्यादेश को लेकर कांग्रेस का रूख क्या रहेगा, इससे केजरीवाल वाकिफ थे। पटना की बैठक से पहले उन्होंने विपक्षी दलों के कई मुख्यमंत्रियों और शीर्ष नेताओं से मुलाकात कर अध्यादेश के मामले में समर्थन मांगा था। इनमें बिहार के सीएम नीतिश कुमार, उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव, तेलंगाना के सीएम के. चंद्रशेखर राव, तमिलनाडु के सीएम एमके स्टालिन, पश्चिम बंगाल की सीएम और टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी, शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के प्रमुख उद्धव ठाकरे और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के प्रमुख शरद पवार आदि शामिल हैं। ऐसा बताया गया कि केजरीवाल ने राहुल गांधी से मिलने के लिए भी समय मांगा था। इन मुलाकातों के दौरान कांग्रेस के समर्थन बाबत चर्चा हुई थी। केजरीवाल और भगवंत मान का कहना था कि प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस, अगर अध्यादेश के मामले में उनका साथ नहीं देती है, तो विपक्षी एकता मुश्किल में पड़ सकती है। इस बीच 15 जून को आप सरकार में मंत्री सौरभ भारद्वाज ने कहा, अगर कांग्रेस पार्टी विपक्षी एकता को मन से आगे बढ़ाना चाहती है, तो वह दिल्ली-पंजाब को छोड़ दे, आम आदमी पार्टी, राजस्थान में नहीं लड़ेगी। इस बयान से दोनों दलों के बीच तल्लखी बढ़ गई। दिल्ली में कांग्रेस नेता अजय माकन, प्रदेशाध्यक्ष अनिल चौधरी व दूसरे सीनियर नेताओं ने पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को स्प्ष्ट तौर से बता दिया कि कांग्रेस को, अध्यादेश के मामले में 'आप' के दबाव में आने की जरूरत नहीं है। अध्यादेश के मुद्दे पर पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग की तरफ से भी कांग्रेस हाईकमान को कुछ ऐसा ही जवाब मिला। उन्होंने पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को अवगत करा दिया कि कांग्रेस को आम आदमी पार्टी के दबाव में नहीं आना चाहिए। अगर ऐसा होता है तो पंजाब में पार्टी को नुकसान झेलना पड़ेगा। विपक्षी दलों की दूसरी बैठक की जगह और तिथि बदलने के पीछे यह भी एक कारण रहा।

खरगे तैयार थे, मगर राजी नहीं हुई राहुल टीम

अध्यादेश के मामले में 'आप' का समर्थन करने को लेकर कांग्रेस पार्टी के भीतर सहमति नहीं बन पा रही थी। हालांकि पार्टी अध्यक्ष खरगे इसके लिए तैयार थे, लेकिन राहुल टीम राजी नहीं हुई। अजय माकन ने तो साफ कह दिया था कि ये फायदे का सौदा नहीं है। यही वजह रही कि पटना की बैठक से पहले राहुल ने विपक्षी एकता को लेकर बयान दिया, तो खरगे ने दिल्ली में अध्यादेश को लेकर कह दिया कि अध्यादेश का विरोध तो सदन में होता है। अभी से इसका प्रचार क्यों हो रहा है। इसके बाद कांग्रेस पार्टी की दिल्ली और पंजाब इकाई के वरिष्ठ नेताओं की बैठक हुई। इन दोनों प्रदेशों में राहुल टीम काम कर रही हैं, तो उन्होंने सिरे से अध्यादेश का समर्थन करने से इनकार कर दिया। दिल्ली और पंजाब, इन दोनों राज्यों में 'आप' ने कांग्रेस को सत्ता से बाहर किया है। मल्लिकार्जुन खरगे ने इस मुद्दे पर अलग से सोनिया गांधी, राहुल और प्रियंका से बात की। हालांकि उस वक्त तक विपक्षी एकता का हवाला देकर बिहार के सीएम नीतिश कुमार, तमिलनाडु के सीएम एमके स्टालिन और पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने खरगे तक यह बात पहुंचा दी कि विपक्षी एकता के लिए दूसरे दलों की तरह केजरीवाल का साथ रहना जरूरी है। अगर वे यानी केजरीवाल, विपक्षी एकता से बाहर जाते हैं तो इसका नुकसान सभी को उठाना पड़ेगा। कई राज्यों में 'आप' ने मजबूत संगठन खड़ा कर लिया है। इसके बाद खरगे ने दोबारा से सोनिया गांधी और राहुल गांधी के साथ बैठक की। उसमें तय हुआ कि विपक्षी एकता बनाए रखने के लिए अध्यादेश के मामले में, कांग्रेस पार्टी केजरीवाल का साथ देगी।

यूं बनीं बात तो भाजपा ने किया पलटवार

कांग्रेस पार्टी की संसदीय रणनीति ग्रुप की बैठक में भी इस पर सहमति बन गई कि अध्यादेश को लेकर आम आदमी पार्टी का साथ दिया जाएगा। पार्टी नेता जयराम रमेश बोले, मैंने साफ कहा है कि संघीय ढांचे पर जो आक्रमण हो रहा है, मोदी सरकार के नियुक्त किए गए व्यक्तियों द्वारा चुनी हुई राज्य सरकारों को निशाना बनाया जा रहा है, कांग्रेस पार्टी इसके खिलाफ है। कांग्रेस अपनी संवैधानिक भूमिका का बखूबी निर्वहन करेगी। केंद्र सरकार के ऐसे प्रयासों के खिलाफ हम रहेंगे। संसद के अंदर और संसद के बाहर कांग्रेस पार्टी लड़ती रहेगी। इसके बाद आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली अध्यादेश पर कांग्रेस का समर्थन मिलने के बाद अपने ट्वीट में कहा, कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे का धन्यवाद। उन्होंने कांग्रेस नेता खरगे का एक वीडियो भी रीट्वीट किया है, जिसमें वे एनसीसीएसए पर कांग्रेस का रुख स्पष्ट कर रहे हैं। कांग्रेस ने जब अध्यादेश के मामले में आप का साथ देने की बात कही तो भाजपा नेता जयवीर शेरगिल ने कहा, बेंगलुरु में खंडित विपक्ष की बैठक कर रही कांग्रेस को पहले अपने भीतर जारी मतभेदों को स्पष्ट करना चाहिए। कांग्रेस ने ऐसा कर अपनी राज्य इकाइयों के हितों से समझौता किया है।

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