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शाह ने नहीं दिया चैंपियन को भाव, महज एक मिनट की मुलाकात कर लौटे उत्तराखंड के बागी विधायक 

Tue, 13 Feb 2018 10:34 PM IST
संजय मिश्र, नई दिल्ली
संजय मिश्र, नई दिल्ली Updated Tue, 13 Feb 2018 10:34 PM IST
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only one minute meeting with Shah returned rebel MLA from Uttarakhand
Amit shah
उत्तराखंड सरकार के खिलाफ आक्रोश निकालने दिल्ली पहुंचे बागी विधायक प्रणव सिंह चैंपियन को आलाकमान से भाव नहीं मिला है। बल्कि भाजपा आलाकमान ने उनकी हरकतों को गंभीरता से लिया है। देर सवेर उन्हें इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है। उत्तराखंड में अपनी ही सरकार के खिलाफ बयानबाजी कर रहे हरिद्वार जिले की लंडौर सीट से विधायक प्रणव सिंह चैंपियन मंगलवार को भाजपा अध्यक्ष अमित शाह से मिलने पार्टी मुख्यालय पहुंचे थे। 
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पार्टी विधायक होने के नाते शाह उनसे मिलने को तैयार तो हो गए लेकिन उन्हें भाव नहीं दिया। मात्र एक मिनट की मुलाकात के बाद शाह ने चैंपियन को चलता कर दिया। सूत्र बताते हैं कि चैंपियन के अलावा पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा के बेटे सौरभ बहुगुणा ने भी शाह से मुलाकात की है। उन्हें भी शाह ने करीब दो से तीन मिनट में हालचाल पूछकर निपटा दिया। इसके बाद इन दोनों ही नेताओं चैंपियन और बहुगुणा ने मीडिय़ा से बातचीत की। जिसे लेकर भाजपा आलाकमान की भौंहे इनके खिलाफ तनी हुई हैं। जब ये नेता भाजपा मुख्यालय में मीडिय़ा से बातचीत कर रहे थे। तब शाह खुद मुख्यालय में मौजूद थे। उन्हें इन नेताओं खासतौर से चैंपियन की हरकत नागवार गुजरी है। 
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शाह ने जाजू से की मंत्रणा  

only one minute meeting with Shah returned rebel MLA from Uttarakhand
Amit Shah in Himachal
सूत्र बताते हैं कि चैंपियन की बयानबाजी के बाद अमित शाह ने प्रदेश प्रभारी श्याम जाजू को बुलाकर उनसे मामले की जानकारी ली। मुलाकात के बाद इन नेताओं की भाजपा मुख्यालय में मीडिया के साथ चहलकदमी के मामले को लेकर शाह बेहद गंभीर नजर आए। चैंपियन के हरकतों पर पार्टी के एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि उनका कल्चर पहले से ही जाहिर है। वे स्थिर स्वभाव के व्यक्ति नहीं है। जहां भी रहे उनका मनमुटाव जारी रहता है। दरअसल चैंपियन की नाराजगी हरिद्वार जिले में जिला पंचायत सदस्य की नियुक्ति को लेकर है। 

पहले तो उन्होंने प्रदेश सरकार के स्थानीय मंत्री मदन कौशिक पर दबाव बनाया। उसके बाद वे मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत पर दबाव बनाने में जुट गए। जब प्रदेश के मुख्यमंत्री और मंत्री पर उनकी दाल नहीं गली तो दबाव बनाने की रणनीति के तहत उन्होंने दिल्ली की ओर शाह से मिलने के लिए रूख किया। लेकिन शाह से भी उन्हें भाव नहीं मिला है। हालांकि मीडिया से चैंपियन ने कहा है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष ने उनकी बात विस्तार से सुनी है। उनका आरोप है कि सूबे में भ्रष्टाचार बढ़ रहा है और जिला पंचायत सदस्य के रूप में गलत व्यक्ति की नियुक्ति हुई है। तो सौरभ बहुगुणा ने कहा है कि उनके इलाके की समस्याओं को उन्होंने शाह के समक्ष रखा है। 

उत्तराखंड भाजपा में फूट दिखाने की चल रही है कोशिश 

दरअसल उत्तराखंड में राजनीतिक अस्थिरता का इतिहास रहा है। नारायण दत्त तिवारी को छोड़ किसी भी नेता ने मुख्यमंत्री के पद पर पांच वर्ष का अपना कार्यकाल पूरा नहीं किया है। बीते वर्ष 2017 के राज्य विधानसभा चुनाव में प्रदेश की जनता ने भाजपा को दो तिहाई से ज्यादा सीटों का बहुमत दिया है। इसलिए राजनीति अस्थिरता का सवाल पैदा होने की स्थिति नहीं है। मगर जीत की रणनीति बनाते वक्त भाजपा ने कांग्रेस के नेताओं पर ज्यादा दांव खेल दिया था।

आज वहीं नेता ही पार्टी की परेसानी बढ़ा रहे हैं। कांग्रेस से भाजपा में आए कुछ नेता ही सूबे की राजनीति में अस्थिरता का संदेश दे रहे हैं। मगर भाजपा के एक शीर्ष नेता ने ऐसी किसी संभावना को सिरे से खारिज किया है। पार्टी के उक्त नेता का कहना है कि नाराज विधायकों की संख्या महज 1 से 2 हैं। और इनका स्वभाव सबको मालूम है। 
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