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किसान आंदोलन: दो जून की रोटी के लिए करना पड़ता है पलायन

Sat, 01 Dec 2018 06:59 AM IST
अरुण कुमार, अमर उजाला, नई दिल्ली
अरुण कुमार, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sat, 01 Dec 2018 06:59 AM IST
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On the brink of starvation people left this tribal area of Gujarat
महिला किसान - फोटो : amar ujala
दो जून की रोटी भी ठीक से नहीं कमा पाते, खेती के लिए जमीन नहीं, खाने को अन्न और रहने के लिए पक्के घर नहीं। जिंदगी की जंग लड़ने के जज्बे पर सरकारों की वादाखिलाफी भारी पड़ रही है। ऐसी हालत है प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के घर गुजरात के आदिवासी क्षेत्र कांटू की। कर्ज माफी और फसल के न्यूनतम समर्थन मूल्य की मांग को लेकर जंतर मंतर पहुंचीं गुजरात की महिला किसानों ने आपबीती सुनाई।  उन्होंने कहा कि मोदी अपने घर में ही किसानों की सुध नहीं ले रहे, जिस कारण महिला किसानों को आधे साल से ज्यादा समय तक खानाबदोशों का जीवन बिताना पड़ता है।  
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केन्द्र सरकार के खिलाफ संसद मार्ग पर दो दिवसीय किसान मुक्ति मार्च में शामिल होने गुजरात से आई काशी ने बताया कि वह पंचमहल जिले के घोघांबा तहसील के आदिवासी क्षेत्र कांटू गांव की निवासी हैं। उनके यहां न तो किसानी करने के लिए पर्याप्त जमीनें हैं और ना ही अन्य सरकारी सुविधाएं। उनके पास रहने के लिए पक्के घर भी नहीं हैं। इनके साथ 23 महिलाएं अपने बच्चों को घर पर छोड़कर दिल्ली पहुंचंी। उन्होंने कहा कि उन पर खेती के कारण काफी कर्ज है और सरकार ने वादा किया था कि किसानों का कर्ज माफ होगा, लेकिन नहीं हुआ, जिससे उनकी हालत और खराब हो गई। उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी ने प्रधानमंत्री बनने के बाद उनकी कोई सुध नहीं ली। उनके घर गुजरात में ही किसानों की ऐसी हालत है कि उन्हें दो जून की रोटी भी टाइम पर नसीब नहीं हो रही।      
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वहीं इन महिलाओं का नेतृत्व कर रही समाजसेविका नीता ने बताया कि वह इनके साथ पिछले चार सालों से काम कर रही हैं और इनकी मांगों के मुद्दों को सरकार तक पहुंचाने का काम कर रही हैं। उन्होंने बताया कि गुजरात का करीब 15 फीसदी हिस्सा आदिवासी क्षेत्र है, जिसमें रहने वाले आदिवासी किसानों को वे सुविधाएं भी नहीं मिल पाती जो अन्य राज्यों के किसानों के पास हैं। महिला किसान सुर्ती बेन नायक ने बताया कि उनके परिवारों के हालत इतने खराब हैं कि उन्हें 6-8 महीनों तक घर छोड़कर अन्यत्र जाना पड़ता है। सरकार ने मांगे नहीं मानी तो हमारे परिवारों की हालत और खराब हो जाएगी।
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