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Old Pension: पुरानी पेंशन के लिए इस माह तय होगी हड़ताल की तारीख, 8 जनवरी से रिले हंगर स्ट्राइक की तैयारी

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Sat, 06 Jan 2024 02:38 PM IST
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सार
ओपीएस के लिए गठित नेशनल ज्वाइंट काउंसिल ऑफ एक्शन (एनजेसीए), की संचालन समिति के वरिष्ठ सदस्य और एआईडीईएफ के महासचिव सी. श्रीकुमार ने बताया, स्ट्राइक नोटिस और अनिश्चितकालीन हड़ताल को लेकर इस माह अंतिम निर्णय ले लिया जाएगा। मार्च में देशभर के सरकारी कार्यालयों और प्रतिष्ठानों में अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू हो सकती है...
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Old Pension: strike date for OPS will be decided this month, preparation for relay hunger strike from Jan 8
Old Pension - फोटो : Amar Ujala/Sonu Kumar

विस्तार

केंद्र एवं राज्य सरकारों के कर्मचारी संगठन, पुरानी पेंशन बहाली की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने की तैयारी कर रहे हैं। इस हड़ताल के लिए देश के दो बड़े कर्मचारी संगठन, रेलवे और रक्षा (सिविल) ने अपनी सहमति दी है। स्ट्राइक बैलेट में रेलवे के 11 लाख कर्मियों में से 96 फीसदी कर्मचारी ओपीएस लागू न करने की स्थिति में अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने के लिए तैयार हैं। इसके अलावा रक्षा विभाग (सिविल) के चार लाख कर्मियों में से 97 फीसदी कर्मी हड़ताल के पक्ष में हैं। कर्मचारी संगठनों के पदाधिकारियों का कहना है कि जनवरी में हड़ताल की तिथि की घोषणा की जाएगी। इससे पहले 8 जनवरी से देशभर के सरकार कर्मचारी, 'रिले हंगर स्ट्राइक' पर बैठेंगे।

ओपीएस के लिए गठित नेशनल ज्वाइंट काउंसिल ऑफ एक्शन (एनजेसीए), की संचालन समिति के वरिष्ठ सदस्य और एआईडीईएफ के महासचिव सी. श्रीकुमार ने बताया, स्ट्राइक नोटिस और अनिश्चितकालीन हड़ताल को लेकर इस माह अंतिम निर्णय ले लिया जाएगा। मार्च में देशभर के सरकारी कार्यालयों और प्रतिष्ठानों में अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू हो सकती है। इस हड़ताल की स्थिति में रेल थम जाएंगी और रक्षा क्षेत्र के उद्योगों में कामकाज बंद हो जाएगा। केंद्र ही नहीं, बल्कि में भी सरकारी कामकाज प्रभावित होगा। इससे पहले केंद्र और राज्य सरकार के विभागों, संगठनों एवं प्रतिष्ठानों के सामने आठ जनवरी से 11 जनवरी तक 'रिले हंगर स्ट्राइक' होगी। विभिन्न कर्मचारी संगठन, भूखे रह कर सरकार से 'पुरानी पेंशन बहाली' की मांग करेंगे। रिले हंगर स्ट्राइक में एक निर्धारित अवधि के बाद कर्मियों की दूसरी टोली, भूख हड़ताल स्थल पर पहुंचेगी।

इसके बाद जेएफआरओपीएस की बैठक होगी। उसमें कन्वीनर शिव गोपाल मिश्रा सहित केंद्र एवं राज्य सरकारों के कर्मचारी संगठनों के अनेक प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे। उस बैठक में राष्ट्रव्यापी हड़ताल की तिथि की घोषणा की जाएगी। बतौर श्रीकुमार, स्ट्राइक नोटिस और अनिश्चितकालीन हड़ताल की तिथि तय होने के बाद सरकार को अवगत कराया जाएगा। कैबिनेट सेक्रेटरी को जेएफआरओपीएस के निर्णयों की जानकारी देने के लिए पत्र जारी होगा।

देश में पुरानी पेंशन बहाली को लेकर केंद्र एवं राज्यों के सरकार कर्मचारी आंदोलन कर रहे हैं। इस मांग को लेकर दिल्ली और दूसरे प्रदेशों में कई रैलियां हो चुकी हैं। कर्मचारी संगठनों की एक ही मांग है, गारंटीकृत पुरानी पेंशन व्यवस्था की बहाली। केंद्र सरकार ने इस बाबत एक कमेटी का गठन किया है। हालांकि उसमें ओपीएस का कहीं भी जिक्र नहीं है। कमेटी, केवल एनपीएस में सुधार को लेकर अपनी रिपोर्ट देगी। पिछले संसद सत्र में लोकसभा सदस्य नव कुमार सरनीया, दीपक बैज और कृपाल बालाजी तुमाने द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने बताया था कि ओपीएस बहाली को लेकर केंद्र सरकार के विचाराधीन कोई प्रस्ताव नहीं है।

गारंटीकृत पुरानी पेंशन योजना बहाल करनी होगी

शिव गोपाल मिश्रा के मुताबिक, ओपीएस पर केंद्र और सरकार के कर्मचारी लगातार अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं। कर्मचारी संगठनों ने रामलीला मैदान में रैलियां की हैं। सरकार के समक्ष कई प्लेटफॉर्म के माध्यम से ओपीएस की मांग उठाई गई है। हमने सरकार को स्पष्ट तौर पर बता दिया है कि कर्मचारियों को ओपीएस के अलावा कुछ भी मंजूर नहीं है। सरकार को एनपीएस खत्म करना होगा और गारंटीकृत पुरानी पेंशन योजना बहाल करनी पड़ेगी। ओपीएस एक गैर राजनीतिक मुद्दा है। केंद्र या राज्यों में सरकार चाहे जिस भी दल की हो, हमारा आंदोलन जारी रहेगा। रेलवे के 11 लाख कर्मियों में से 96 फीसदी कर्मचारी ओपीएस लागू न करने की स्थिति में अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने के लिए तैयार हैं। इसके अलावा रक्षा विभाग (सिविल) के चार लाख कर्मियों में से 97 फीसदी कर्मी, हड़ताल के पक्ष में हैं। स्ट्राइक बैलेट, पूरी तरह निष्पक्ष तरीके से हुआ था। ज्वाइंट फोरम में केंद्रीय संगठनों के अलावा राज्यों के भी 36 संगठन भी शामिल हैं।

पीएफआरडीए में संशोधन के बिना ओपीएस संभव नहीं ...

कन्फेडरेशन ऑफ सेंट्रल गवर्नमेंट एम्प्लाइज एंड वर्कर्स के महासचिव एसबी यादव ने कहा, पुरानी पेंशन योजना को दोबारा से लागू करने वाली राज्य सरकारों और केंद्र के बीच विवाद है। जिन गैर-भाजपा शासित राज्यों ने अपने कर्मियों को पुरानी पेंशन के दायरे में लाने की घोषणा की थी, उन्हें केंद्र सरकार ने 'एनपीएस' में जमा कर्मियों का पैसा वापस देने से मना कर दिया था। केंद्र सरकार की तरफ से यह बात साफ कर दी गई थी कि यह पैसा 'पेंशन फंड एंड रेगुलेटरी अथॉरिटी' (पीएफआरडीए) के पास जमा है। नई पेंशन योजना 'एनपीएस' के अंतर्गत केंद्रीय मद में जमा यह पैसा राज्यों को नहीं दिया जा सकता। वह पैसा केवल उन कर्मचारियों के पास जाएगा, जो इसका योगदान कर रहे हैं। कॉन्फेडरेशन ऑफ सेंट्रल गवर्नमेंट एम्प्लाइज एंड वर्कर्स, बड़े स्तर पर 'रिले हंगर स्ट्राइक' में हिस्सा लेगा।

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