OPS: पुरानी पेंशन, 8वां वेतन आयोग, आयुद्ध कारखाने और CGHS सेंटर, क्या इन मांगों पर राजी होगा I.N.D.I गठबंधन?
नेशनल मूवमेंट फॉर ओल्ड पेंशन स्कीम (एनएमओपीएस) के अध्यक्ष विजय बंधु ने भी पिछले दिनों कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से मुलाकात कर उनसे अपील की थी कि वे पुरानी पेंशन बहाली एवं निजीकरण की समाप्ति के विषय को पार्टी के चुनावी घोषणा पत्र में शामिल करें। देश में करीब एक करोड़ सरकारी कर्मचारी, एनपीएस में शामिल हैं।
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लोकसभा चुनाव से पहले केंद्रीय कर्मचारी संगठनों ने अपनी मांगों की सूची I.N.D.I गठबंधन को सौंप दी है। इन्हें उम्मीद है कि I.N.D.I गठबंधन अपने चुनावी एजेंडे में कर्मचारी संगठनों की मांगों को शामिल करेगा। 'अखिल भारतीय ट्रेड यूनियन कांग्रेस' (एआईटीयूसी) ने I.N.D.I गठबंधन के सामने अपनी 27 मांगें रखी हैं। इन्हें चुनावी घोषणा पत्र में शामिल करने का आग्रह किया गया है। स्टाफ साइड की राष्ट्रीय परिषद (जेसीएम) के सदस्य और अखिल भारतीय रक्षा कर्मचारी महासंघ (एआईडीईएफ) के महासचिव सी. श्रीकुमार का कहना है, कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में आयुद्ध कारखानों को दोबारा से पहले वाली स्थिति में लाना, एनपीएस की समाप्ति और ओपीएस की बहाली, आठवें वेतन आयोग के गठन की गारंटी, 18 माह के डीए का एरियर देने और हर जिले में सीजीएसएच अस्पताल/वैलनेस सेंटर खोलना आदि शामिल है।
12 लाख रिक्त पदों को भरने की मांग
गुरुवार को श्रीकुमार ने बताया, आयुध कारखानों के निगमीकरण को वापस लेकर उन्हें आयुध निर्माणी बोर्ड के रूप में एक सरकारी उद्योग के रूप में आयुध कारखानों की स्थिति को बहाल करना, राजनीतिक दलों से यह मांग की गई है। इसके अलावा सामरिक आयुध कारखानों की बेहतरी के लिए ट्रेड यूनियनों द्वारा दिए गए वैकल्पिक और मजबूत प्रस्तावों को लागू करना, केंद्र सरकार में 12 लाख रिक्त पदों को भरना, संसद द्वारा पारित चार श्रमिक विरोधी श्रम संहिताओं को वापस लेना और सभी योजना आधारित श्रमिकों को वर्कमैन का दर्जा देना एवं उनकी सेवाओं को स्थायी सरकारी कर्मचारियों के रूप में नियमित करना, मांगों में शामिल हैं। हर जिले में सीजीएसएच अस्पताल या वैलनेस सेंटर हो, इस बाबत संसदीय समिति ने भी सिफारिश की है। मौजूदा व्यवस्था में पेंशनरों के लिए यह प्रावधान है कि उनकी पेंशन में 80 साल की आयु में बीस फीसदी का इजाफा होता है। इसके लिए उन्हें बीस वर्ष का इंतजार करना पड़ता है।
हर पांच वर्ष में पेंशन में 5 फीसदी की बढ़ोतरी
बतौर श्रीकुमार, पेंशनरों के मामले में संसदीय कमेटी ने भी सिफारिश की थी कि 65 साल के बाद हर पांच वर्ष में पेंशन में पांच फीसदी की बढ़ोतरी की जाए। इससे पहले 'अखिल भारतीय ट्रेड यूनियन कांग्रेस' (एआईटीयूसी) ने भी I.N.D.I गठबंधन के सामने अपनी 27 मांगें रखी थीं। उन मांगों में सभी आवश्यक वस्तुओं और आवश्यक वस्तुओं जैसे पेट्रोल, डीजल, एलपीजी आदि की मूल्य वृद्धि को नियंत्रित कर सार्वजनिक वितरण प्रणाली को मजबूत करना, सभी योजना आधारित श्रमिकों को वर्कमैन का दर्जा देना और उनकी सेवाओं को स्थायी सरकारी कर्मचारियों के रूप में नियमित करना, आदि शामिल है। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में 600 रुपये की मजदूरी के साथ न्यूनतम 200 दिनों का रोजगार सुनिश्चित करना और सार्वभौमिक न्यूनतम वेतन 26,000 रुपये तय करना भी, एआईटीयूसी की मांगों में शामिल है।
कॉर्पोरेट अस्पतालों में चिकित्सा उपचार शुल्क तय करना
कर्मचारी संगठनों ने सामरिक आयुध कारखानों की बेहतरी के लिए ट्रेड यूनियनों द्वारा दिए गए वैकल्पिक और मजबूत प्रस्तावों को लागू करना, यह मांग भी प्रमुखता से उठाई है। रेलवे, रक्षा, बीएसएनएल, बैंक, सामान्य बीमा, एलआईसी, कोयला और खदान, औषधि और फार्मास्यूटिकल्स, हवाई अड्डे, बंदरगाह और बंदरगाह, बिजली, इस्पात, तेल, भारी इंजीनियरिंग और निर्माण, आदि में निजीकरण को वापस लेना। रोजगार व पदोन्नति के मामले में सशस्त्र बलों और तटरक्षक बल में लैंगिक समानता सुनिश्चित करना। देश के सभी निजी एवं कॉर्पोरेट अस्पतालों में चिकित्सा उपचार शुल्क तय करने के लिए नियामक प्राधिकरण नियुक्त करना।
पुरानी पेंशन बहाली एवं निजीकरण की समाप्ति
नेशनल मूवमेंट फॉर ओल्ड पेंशन स्कीम (एनएमओपीएस) के अध्यक्ष विजय बंधु ने भी पिछले दिनों कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से मुलाकात कर उनसे अपील की थी कि वे पुरानी पेंशन बहाली एवं निजीकरण की समाप्ति के विषय को पार्टी के चुनावी घोषणा पत्र में शामिल करें। देश में करीब एक करोड़ सरकारी कर्मचारी, एनपीएस में शामिल हैं। वे खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। विजय बंधु ने खरगे को सौंपे अपने पत्र में कहा था, देश में सरकारी कर्मचारी ओपीएस बहाली की मांग कर रहे हैं। एनपीएस में एक करोड़ कर्मचारी हैं। अगर इन कर्मियों के साथ इनके परिवार और पेंशनर फैमिली की भी गिनती करें, तो यह संख्या पांच करोड़ के पार पहुंच जाती है। कर्मचारियों का मानना है कि एनपीएस, सुरक्षित एवं विभेदकारी है। देश के समस्त कर्मचारी, जिनमें शिक्षक समुदाय प्रमुख है, वे इसका विरोध कर रहे हैं।