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महाराष्ट्र में ओबीसी आरक्षण: पंचायत अध्यक्ष का पद आरक्षित करने पर सुप्रीम कोर्ट खफा, देगी दखल

Mon, 13 Dec 2021 08:44 PM IST
सुरेंद्र जोशी पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली Published by: सुरेंद्र जोशी Updated Mon, 13 Dec 2021 08:44 PM IST
सार

शीर्ष कोर्ट ने पंचायत समिति के अध्यक्ष पद के ओबीसी के लिए आरक्षण की चुनाव प्रक्रिया को गंभीरता से लिया है। कोर्ट ने कहा कि यह साफतौर पर उसके फैसले को चोट पहुंचाने जैसा है।

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OBC reservation: SC takes strong note of attempt to overreach its decision
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Social Media

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र में एक पंचायत समिति के अध्यक्ष का पद अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए आरक्षित करने पर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कड़ी आपत्ति जताई। कोर्ट ने कहा कि यह आरक्षण उसके द्वारा पूर्व में दिए गए एक फैसले का उल्लंघन है। यह गंभीर मामला है। वह मामले में दखल देगी। 

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शीर्ष कोर्ट ने पंचायत समिति के अध्यक्ष पद के ओबीसी के लिए आरक्षण की चुनाव प्रक्रिया को गंभीरता से लिया है। कोर्ट ने कहा कि यह साफतौर पर उसके फैसले को चोट पहुंचाने जैसा है। जस्टिस एएम खानविलकर व जस्टिस सीटी रविकुमार की पीठ ने कहा कि यह सुप्रीम कोर्ट के आदेश के परे जाने का प्रयास है। 
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पीठ ने संबंधित कलेक्टर को नोटिस जारी करते हुए उनसे पूछा है कि क्यों न उनके खिलाफ उपयुक्त कार्रवाई की जाना चाहिए? यह भी कहा कि शीर्ष कोर्ट की तीन सदस्यीय पीठ द्वारा पूर्व में दिए गए स्पष्ट फैसले के बावजूद पंचायत समिति में रिक्त पदों को भरने की चुनाव प्रक्रिया शुरू कर दी गई। 
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शीर्ष कोर्ट बॉम्बे हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी। सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने पाया कि तीन-न्यायाधीशों की पीठ ने इस साल मार्च में एक फैसला दिया था। उसमें अदालत ने इस तरह के आरक्षण का प्रावधान करने से पहले ट्रिपल टेस्ट के पालन का आदेश दिया था।  इस साल मार्च में शीर्ष कोर्ट ने कहा था कि महाराष्ट्र में संबंधित स्थानीय निकायों में अन्य पिछड़े वर्गों का आरक्षण अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और ओबीसी के लिए आरक्षण कुल मिला कर 50 प्रतिशत से ज्यादा नहीं हो सकता।


पीठ ने याचिका पर महाराष्ट्र सरकार समेत सभी प्रतिवादियों को भी नोटिस जारी किया। मामले में आगे सुनवाई 5 जनवरी को होगी। 

पिछले सप्ताह ओबीसी आरक्षण पर लगाई थी रोक
सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले 6 दिसंबर को महत्वपूर्ण आदेश जारी कर महाराष्ट्र में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को 27 प्रतिशत आरक्षण पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि अन्य सीटों के लिये चुनाव प्रक्रिया जारी रहेगी। शीर्ष अदालत ने दो याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया था। पीठ ने अपने आदेश में कहा था कि ओबीसी के लिए आरक्षित सीटों के संबंध में सभी संबंधित स्थानीय निकायों का चुनाव कार्यक्रम अगले आदेश तक स्थगित रहेगा। 

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