फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   number of women judges in country's courts has increased in last five years, reaching 27 to 34 percent

Judiciary: देश की अदालतों में पिछले पांच साल में बढ़ी महिला न्यायाधीशों की संख्या, 27 से 34 फीसदी पर पहुंची

Sat, 11 May 2024 05:21 AM IST
शिव शरण शुक्ला अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Sat, 11 May 2024 05:21 AM IST
सार

स्टेट ऑफ द ज्यूडिशियरी’ रिपोर्ट के मुताबिक, 2018 से 2023 तक महिला जजों की संख्या 27 फीसदी से 34 फीसदी पहुंच गई है। 

विज्ञापन
number of women judges in country's courts has increased in last five years, reaching 27 to 34 percent
अदालत। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भारत की अदालतों में पिछले पांच साल में महिला न्यायाधीशों का प्रतिनिधित्व बढ़ा है। अदालतों में महिला न्यायाधीशों की संख्या 27 फीसदी (2018) से बढ़कर 34.6 फीसदी (2023) हुई है। सुप्रीम कोर्ट की ‘स्टेट ऑफ द ज्यूडिशियरी’ की एक रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई है। 

विज्ञापन

देश के सर्वोच्च न्यायालय में दिसंबर 2023 तक 32 न्यायाधीशों में से केवल तीन महिलाएं थीं। हालांकि, 2018 में यह चार फीसदी कम था। 2018 में, उच्च न्यायालयों में 696 न्यायाधीशों में से केवल 10% महिलाएं थीं। 2023 तक उच्च न्यायालयों में कुल 737 न्यायाधीशों में से महिला न्यायाधीशों का अनुपात बढ़कर 13.4% हो गया है।

विज्ञापन


दिल्ली और बॉम्बे हाईकोर्ट में संख्या अधिक
आंकड़ों के अनुसार, पंजाब और हरियाणा, दिल्ली और बॉम्बे हाईकोर्ट में महिला न्यायाधीशों की संख्या क्रमशः 13, 10 और 9 (सबसे अधिक) है। ओडिशा, झारखंड और छत्तीसगढ़ जैसे उच्च न्यायालयों में महिला न्यायाधीशों का प्रतिनिधित्व उल्लेखनीय रूप से कम है। इन राज्य उच्च न्यायालयों में से प्रत्येक में केवल एक महिला न्यायाधीश है। वहीं, पटना, उत्तराखंड, त्रिपुरा, मेघालय और मणिपुर में कोई महिला जज नहीं है।
विज्ञापन
विज्ञापन


अधीनस्थ न्यायालयों में 27.6% महिला जज  
अधीनस्थ न्यायालयों में स्थिति काफी बेहतर है। 2018 में, देश की अधीनस्थ अदालतों में 27.6 फीसदी महिला न्यायाधीश थीं। 2023 तक, यह संख्या बढ़कर 36.3 प्रतिशत हो गई थी। सुप्रीम कोर्ट की स्वतंत्र अधिवक्ता तन्वी दुबे ने कहा, न्यायपालिका में महिलाओं का प्रतिनिधित्व बहुत ही महत्वपूर्ण है। इसलिए नियमों और प्रक्रियाओं को विकसित करने या बदलने की प्रक्रिया के लिए विविधता, सकारात्मकता और परिवर्तन लाने की आवश्यकता है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed