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अब 'जीका' की दस्तक: केरल में गर्भवती महिला समेत 13 में मिला, जानिए कैसे होता है संक्रमण व क्या हैं लक्षण
Thu, 08 Jul 2021 08:43 PM IST
सुरेंद्र जोशी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, तिरुवनंतपुरम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, तिरुवनंतपुरम
Published by: सुरेंद्र जोशी
Updated Thu, 08 Jul 2021 08:43 PM IST
सार
डब्ल्यूएचओ के अनुसार जीका वायरस एडीज मच्छरों के काटने से फैलता। ये मच्छर दिन के समय या शाम को सक्रिय होते हैं। केरल में एक गर्भवती महिला समेत 13 लोगों में यह वायरस मिला है। तिरुवनंतपुरम से लिए गए सैंपल्स को जांच के लिए नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी पुणे भेजा गया था।
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डेमो पिक
विस्तार
कोरोना महामारी के बीच अब जीका वायरस ने दस्तक दे दी है। केरल में एक गर्भवती महिला समेत 13 लोगों में यह वायरस मिला है। तिरुवनंतपुरम से लिए गए सैंपल्स को जांच के लिए नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी पुणे भेजा गया था। जांच में 13 लोगों में इसकी पुष्टि हुई है।
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तिरुवनंतपुरम के एक निजी अस्पताल में 28 जून को 24 साल की गर्भवती महिला को बुखार, सिरदर्द, शरीर पर लाल चकत्ते की शिकायत के बाद भर्ती कराया गया था। जीका के लक्षणों के बाद पुणे लैब में परीक्षण कराया गया था। केरल की स्वास्थ्य मंत्री वीणा जॉर्ज ने बताया कि यह महिला अब स्वस्थ है।
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सात जुलाई को दिया बच्चे को जन्म
गर्भवती महिला ने 7 जुलाई को बच्चे को जन्म दिया है। वह राज्य से कहीं बाहर नहीं गई थी। उसका घर तमिलनाडु से सटे केरल के सीमावर्ती क्षेत्र में है। इस वायरस के लक्षण दिखने में 3 से 14 दिनों का वक्त लगता है। अधिकतर लोगों में कोई वास्तविक लक्षण नहीं दिखता है। कुछ लोगों में बुखार, चकत्ते, सिरदर्द, मांशपेशियों और जोड़ों में दर्द की शिकायतें आती हैं। जीका वायरस गुलियन बैरी सिड्रोम पैदा करने के लिए भी जाना जाता है। यह नवजात बच्चों में पैदाइशी असामान्यता भी पैदा करता है।
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पहली बार युगांडा के बंदरों में मिला था
विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, जीका वायरस एडीज मच्छरों के काटने से फैलता है जो कि दिन व शाम के वक्त सक्रिय होते हैं। यह पहली बार 1947 में युगांडा के बंदरों में पाया गया था। इसके बाद 1952 में युगांडा और तंजानिया में मानवों में पाया गया था। जीका वायरस की मौजूदगी एशिया, अफ्रीका, अमेरिका पैसिफिक आइलैंड में पाई जा चुकी है।
भारत में 2017 में मिला था पहला केस
2015 में जीका वायरस ब्राजील में बड़े पैमाने पर फैल गया था। इससे 1600 से अधिक बच्चे विकृति के साथ पैदा हुए थे। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी ने पहली बार नवंबर 2018 में जीका वायरस को अलग करने में सफलता पाई थी। भारत में पहली बार जनवरी 2017 में जीका वायरस का केस मिला था। इसके बाद जुलाई 2017 में तमिलनाडु में भी केस मिले थे।