उत्तराखंड: पीएम मोदी के सपने को पूरा करने में जुटा पीएमओ
- राष्ट्रपति शासन के तहत देवभूमि की जनता पर अमिट छाप छोड़ने की कवायद
- केंद्र से सूबे पर जल्द होगी धन की वर्षा
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उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लगने के बाद प्रधानमंत्री कार्यालय सूबे के विकास की कार्ययोजना बनाने में जुट गया है। विदेश दौरे से लौटने के बाद पीएम मोदी इन रणनीतिकारों के संग बैठक कर कार्ययोजना को अंतिम रूप देंगे।
दरअसल सूबे के सियासी संकट का लाभ उठाते हुए राष्ट्रपति शासन के दौरान पीएमओ के रणनीतिकार प्रदेश में बेहतर काम के जरिए देवभूमि की जनता पर मोदी के कामकाज की अमिट छाप छोड़ना चाहते हैं। कार्ययोजना बनाने में जुटे पीएमओ के एक अधिकारी का कहना है कि उत्तराखंड के विकास को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हमेशा से एक सपना रहा है। गुजरात का मुख्यमंत्री रहते हुए भी वे सूबे के विकास की चिंता करते थे।
इसलिए उनके मंशा को देखते हुए राज्य के विकास को लेकर एक वृहत कार्ययोजना बनाई जा रही है। सूबे के विकास के लिए अपने रोडमैप को जनता के सामने रखने के लिए पीएम मोदी खुद अप्रैल के अंत तक देहारादून जा सकते हैं। उनका कार्यक्रम भी तैयार हो रहा है। पीएम मोदी के उत्तराखंड प्रेम पर मुहर लगाते हुए भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता अनिल बलूनी का कहना है कि मोदीजी का देवभूमि से पुरान लगाव रहा है।
अमर उजाला से बातचीत में बलूनी ने कहा कि विकास के मामले को लेकर आज सूबे में जो हालात हैं। उसे पटरी पर लाने के लिए एक बडे प्रयास की आवश्यकता है। जोकि मोदी जैसा व्यक्ति ही कर सकता है। उत्तराखंड के विकास को लेकर मोदी की शुरू से ही स्पष्ट सोच रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की समस्याओं के पूर्ण समाधान के लिए केंद्र सरकार और भाजपा सदा प्रयासरत रहेगी।
विकास की कार्ययोजना बनाने में जुटा पीएमओ
सूत्र बताते हैं कि प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव नृपेंद्र मिश्र के नेतृत्व में पीएमओ के अधिकारियों का एक समूह उत्तराखंड के विकास की कार्ययोजना बनाने में इन दिनों युद्ध स्तर पर जुटा हुआ है। इन अधिकारियों के समक्ष कम समय में बेहत्तर परिणाम देने की चुनौती है।
इसे ध्यान में रखते हुए मुख्य रूप से 10 से 12 चीजों पर कार्ययोजना को फोकस किया जा रहा है। इसमें पीएम मोदी के केदारनाथ और चार धाम यात्रा प्रेम को विशेष रूप से शामिल किया जा रहा है। पीएम बनने से पहले गुजरात का मुख्यमंत्री रहते हुए ही मोदी ने केदारनाथ के जिर्णोद्दार का जिम्मा प्रदेश सरकार से मांगा था। तो लोकसभा चुनाव के दौरान भी सूबे के पर्यटन और यहां के प्राकृतिक संसाधनों को लेकर पीएम अपनी मंशा दर्शा चुके हैं। यही वजह है कि उत्तराखंड के विकास की कार्ययोजना बनाने में केदारनाथ मंदिर, चार धाम यात्रा मार्ग, सूबे के पर्यटन उद्योग को बढ़ावा देने और पलायन रोकने पर ज्यादा जोर है।
पीएमओ सूत्रों के अनुसार केदारनाथ धाम को गुजरात के सोमनाथ मंदिर की तर्ज पर संवारा जाएगा। तो पानी के प्राकृतिक संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल के लिए नई तकनीक पर जोर होगा। चार धाम यात्रा को पूरे साल जारी रखने की कवायद में पीएमओ का जोर चार धाम यात्रा मार्ग को इस तरीके से बनाने पर है कि ये सड़कें सभी मौसम में चालू रह सकें।
वहीं प्रदेश के पर्यटन विभाग को चमकाने के लिए भी गुजरात मॉडल का इस्तेमाल होगा। जैसे मुख्यमंत्री बनने के बाद मोदी ने अमिताभ बच्चन को ब्रांड एम्बेसडर बनाकर गुजरात के पर्यटन को दुनिया में नई पहचान दी, ठीक उसी तर्ज पर उत्तराखंड के लिए भी रणनीति बन रही है। पलायन रोकने के लिए उद्योग बढ़ाने पर जोर होगा। इसके लिए उद्योग नीति दुरूस्त की जाएगी। अहमदाबाद की तरह सूबे में गंगा के किनारों को चमकाया जाएगा।