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Pollution: 'बच्चों को बाहर खेलने के लिए मास्क पहनना पड़े, ये अस्वीकार्य'; प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट के जज सख्त

Sat, 29 Mar 2025 03:37 PM IST
पवन पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: पवन पांडेय Updated Sat, 29 Mar 2025 03:37 PM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट के जज न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने शनिवार को प्रदूषण से निपटने के लिए उत्सर्जन को विनियमित करने और स्वच्छ प्रौद्योगिकियों में निवेश करने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि बच्चों का ऐसे वातावरण में बड़ा होना अस्वीकार्य है, जहां उन्हें खुले में खेलने के लिए मास्क पहनने की जरूरत पड़े।

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Not acceptable that children need to wear masks to play outside: SC judge Justice Vikram Nath
जस्टिस विक्रम नाथ, सुप्रीम कोर्ट के जज - फोटो : ANI

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट के जज विक्रम नाथ ने प्रदूषण को चिंता जाहिर करते हुए कहा कि, जहां बच्चों को बाहर खेलने के लिए मास्क पहनना पड़े, ऐसा माहौल अस्वीकार्य है। विज्ञान भवन में पर्यावरण पर राष्ट्रीय सम्मेलन - 2025 के उद्घाटन सत्र के दौरान न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने यह भी कहा कि ऐसे समाधान तलाशने की आवश्यकता है जो आर्थिक विकास और पर्यावरणीय भलाई के बीच संतुलन बनाए रखें और सरकार की नीतियों को हरित प्रौद्योगिकियों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। बता दें कि, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि थीं। 
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प्रदूषण के खिलाफ हमें साथ आना चाहिए- विक्रम नाथ
इस मौके पर न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने कहा, 'भारत की राजधानी में नियमित रूप से उच्च स्तर का प्रदूषण होता है। मेरा मानना है कि हम सभी इस बात से सहमत हो सकते हैं कि हमारे बच्चों का ऐसे वातावरण में बड़ा होना स्वीकार्य नहीं है, जहां उन्हें बाहर खेलने के लिए मास्क की आवश्यकता हो या कम उम्र में श्वसन संबंधी बीमारियों की चिंता हो।' उन्होंने कहा, 'यह कार्रवाई के लिए एक तत्काल आह्वान है, एक संकेत है कि हमें उत्सर्जन को विनियमित करने, स्वच्छ प्रौद्योगिकियों में निवेश करने और टिकाऊ परिवहन विकल्पों के बारे में सोचने के लिए एक साथ आना चाहिए, जो हमारे द्वारा सांस लेने वाली हवा से समझौता किए बिना आर्थिक प्रगति की अनुमति देता है।'
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'पवित्र और प्राचीन नदियां अपशिष्ट से भरी हुई हैं'
उन्होंने जल प्रदूषण को एक अन्य प्रमुख चिंता के रूप में चिन्हित किया, उन्होंने कहा कि कई पवित्र और प्राचीन नदियां अनुपचारित अपशिष्ट से भरी हुई हैं। 'जब मैं इन नदियों के किनारों को देखता हूं, तो मुझे पुरानी यादों और चिंता का मिश्रण महसूस होता है... पुरानी यादों के लिए कि ये जल कितने जीवंत और शुद्ध थे और हमारी असमर्थता के लिए चिंता कि हम उन्हें उनके प्राकृतिक गौरव में संरक्षित कर सकें। औद्योगिक अपशिष्ट का उपचार करना, सीवेज अवसंरचना को बढ़ाना और स्थानीय समुदायों को नदी के किनारों पर स्वच्छता बनाए रखने के लिए प्रोत्साहित करना आवश्यक कदम हैं।'

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एनजीटी की भूमिका की सराहना
राष्ट्रीय हरित अधिकरण की भूमिका की सराहना करते हुए, सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश ने कहा कि हरित निकाय 2010 में अपनी स्थापना के बाद से आशा की किरण के रूप में उभरा है और पर्यावरण विवादों के समाधान को सुव्यवस्थित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि प्रदूषणकर्ता भुगतान करें और एहतियाती सिद्धांतों की वकालत करके, न्यायाधिकरण ने उद्योगों, सरकारी निकायों और नागरिकों को प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग पर पुनर्विचार करने के लिए प्रेरित किया है।

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