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कोरोना काल में बचपन: अमर उजाला पर तीन बजे लाइव होंगे नोबेल शांति विजेता कैलाश सत्यार्थी

Thu, 09 Apr 2020 02:09 PM IST
आसिम खान न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: आसिम खान Updated Thu, 09 Apr 2020 02:09 PM IST
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Nobel Peace Prize winner Kailash Satyarthi Live on Amar Ujala: Childhood in Coronavirus era
Kailash Satyarthi Live on Amar Ujala - फोटो : Amar Ujala

नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित कैलाश सत्यार्थी आज दोपहर तीन बजे 'कोरोना काल में बचपन' विषय पर अमर उजाला पर लाइव आने वाले हैं। आप लोग भी कोरोना काल और लॉकाडउन के बीच 'बच्चों कैसे संभाले और कैसे ख्याल रखें' के बारे में उनसे सवाल कर सकते हैं जिनका वो जवाब देंगे। कैलाश सत्यार्थी ने लॉकडाउन के दौरान चाइल्ड पोर्नोग्राफी के खिलाफ ऑनलाइन अभियान शुरू किया है। 

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उन्होंने अभियान के जरिए लोगों से आह्वान किया है कि वे अपने बच्चों को घरों में सुरक्षित रखें। क्योंकि, संकट की इस अवधि में बाल यौन शोषण, डिजिटल चाइल्ड पोर्नोग्राफी और ट्रैफिकिंग का खतरा बढ़ जाता है। कैलाश सत्यार्थी ने रविवार को इस अभियान की शुरुआत करते हुए आगाह किया कि कोविड-19 के खतरे के चलते हम अपने घरों में सुरक्षित महसूस कर सकते हैं, लेकिन घरों, आश्रय गृहों और इंटरनेट पर हमारे बच्चों को गंभीर खतरा है। 
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उन्होंने कहा कि मौजूदा समय यौन शोषण, ऑनलाइन दुर्व्यवहार और ट्रैफिकिंग की आशंका कहीं ज्यादा बढ़ गई है। आइए एक साथ मिलकर हम यह प्रण करें कि हमारे बच्चे अपने घरों में पूरी तरह सुरक्षित रहेंगे। कैलाश सत्यार्थी चिल्ड्रेन्स फाउंडेशन (केएससीएफ) के इस अभियान को सोशल मीडिया के माध्यम से ऑनलाइन चलाया जा रहा है, लेकिन लॉकडाउन हटने पर इसे जमीनी स्तर पर चलाया जाएगा।
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कौन हैं कैलाश सत्यार्थी?
कैलाश सत्यार्थी मध्यप्रदेश के रहने वाले हैं। उनका जन्म विदिशा में 11 जनवरी 1954 को हुआ। कैलाश सत्यार्थी 'बचपन बचाओ आंदोलन' चलाते हैं। उन्हें बच्चों और युवाओं के दमन के खिलाफ और सभी को शिक्षा के अधिकार के लिए शांति के नोबेल पुरस्कार से नवाजा गया। 

उन्होंने पाकिस्तान की मलाला युसुफजई के साथ नोबेल पुरस्कार साझा किया। कैलाश सत्यार्थी पेशे से इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियर हैं। 26 वर्ष की उम्र में ही उन्होंने करियर छोड़कर बच्चों के लिए काम करना शुरू कर दिया था। उन्हें बाल श्रम के खिलाफ अभियान चलाकर हजारों बच्चों की जिंदगियां बचाने का श्रेय दिया जाता है।

कई बार हो चुके हैं जानलेवा हमले
कैलाश सत्यार्थी की वेबसाइट के अनुसार बाल श्रमिकों को छुड़ाने के दौरान उनपर कई बार जानलेवा हमले भी हुए हैं। 17 मार्च 2011 में दिल्ली की एक कपड़ा फैक्ट्री पर छापे के दौरान उनपर हमला हुआ था। इससे पहले 2004 में ग्रेट रोमन सर्कस से बाल कलाकारों को छुड़ाने के दौरान भी उनपर हमला हुआ।

मिल चुके हैं कई पुरस्कार
नोबेल पुरस्कार से पहले उन्हें 1994 में जर्मनी का 'द एयकनर इंटरनेशनल पीस अवॉर्ड', 1995 में अमरीका का 'रॉबर्ट एफ कैनेडी ह्यूमन राइट्स अवॉर्ड', 2007 में 'मेडल ऑफ इटेलियन सीनेट' और 2009 में अमरीका के 'डिफेंडर्स ऑफ डेमोक्रेसी अवॉर्ड' सहित कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय अवॉर्ड मिल चुके हैं।
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