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Gurajat: 'घटनाओं का सबसे ज्यादा असर बच्चों पर',दुनिया में चल रहे युद्धों पर कैलाश सत्यार्थी ने कही यह बात

Fri, 15 Dec 2023 11:02 PM IST
आदर्श शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद Published by: आदर्श शर्मा Updated Fri, 15 Dec 2023 11:02 PM IST
सार

यूक्रेन-रूस और इस्राइल-हमास के बीच चल रहे युद्ध पर नोबेल विजेता कैलाश सत्यार्थी ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इन युद्धों का सबसे ज्यादा असर मासूम बच्चों पर पड़ता है। भारत को अब करुणा का वैश्वीकरण करना होगा।

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Nobel laureate Kailash Satyarthi said In a broken world, time for India to globalize compassion
कैलाश सत्यार्थी - फोटो : Social Media

विस्तार

नोबेल शांति पुरस्कार विजेता और बच्चों के अधिकारों के प्रचारक कैलाश सत्यार्थी ने शुक्रवार को बयान देते हुए कहा कि समय आ गया है कि भारत को करुणा का वैश्वीकरण करना होगा। उन्होंने कहा कि पश्चिम ने व्यापार, ज्ञान, विनिर्माण, डेटा और पूंजीवाद का वैश्वीकरण किया। सत्यार्थी गुजरात में सहयोगात्मक परोपकार पर केंद्रित संगठन सोशल वेंचर पार्टनर्स इंडिया (एसवीपी इंडिया) की पांचवीं वर्षगांठ समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हुए थे। 
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सत्यार्थी बोले, युद्ध में सबसे ज्यादा बच्चे पीड़ित
पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि हम तेजी से टूटती, खंडित और अन्यायपूर्ण दुनिया में रह रहे हैं। पहले रूस-यूक्रेन युद्ध छिड़ा और अब इस्राइल-हमास लड़ रहे हैं। ऐसी स्थितियों में हमेशा बच्चे सबसे ज्यादा पीड़ित होते हैं। नोबेल पुरस्कार विजेता ने कहा, युद्ध के मैदानों से बच्चों के पीड़ित होने की खबरें आ रही हैं और संयुक्त राष्ट्र ने कई बार युद्धविराम के लिए कहा है, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला है। साथ ही उन्होंने कहा कि सरकार ने बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए कानूनों में संशोधन किया है और उन्हें ईमानदारी से लागू किया जाना चाहिए।
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सिर्फ सरकार या संगठनों की जिम्मेदारी नहीं-सत्यार्थी
सत्यार्थी ने कहा कि यह सिर्फ सरकार या किसी संगठन की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि बच्चों, खासकर लड़कियों के खिलाफ अपराधों पर अंकुश लगाना और बच्चों के अनुकूल समाज का निर्माण करना लोगों की सामूहिक जिम्मेदारी है।कैलाश सत्यार्थी ने कहा कि यह भारत के लिए करुणा का वैश्वीकरण करने का समय है। पश्चिम जगत ने व्यापार, डेटा, पूंजीवाद का वैश्वीकरण किया।
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बता दें कैलाश सत्यार्थी को बच्चों के शोषण पर ध्यान केंद्रित करने के लिए 2014 में नोबेल शांति पुरस्कार से दिया गया था। बता दें सत्यार्थी ने बाल श्रम के खिलाफ अभियान चलाने वाले संगठन बचपन बचाओ आंदोलन और गुडवेव संगठन की स्थापना की। साथ ही उन्होंने कहा कि जब मैंने पांच वर्ष की उम्र में स्कूली शिक्षा शुरू की, तो मैंने देखा कि एक बच्चा स्कूल नहीं जाता था, सड़कों पर काम करता था। मैंने शिक्षक और माता-पिता से पूछा कि वह स्कूल क्यों नहीं जा रहा है, उस समय वह उत्तर नहीं दे पाएं। 
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