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Amartya Sen: अमर्त्य सेन के वकीलों ने ‘बेदखली नोटिस’ पर किया अदालत का रुख, 6 मई तक जमीन खाली करने को कहा गया

Sat, 29 Apr 2023 08:06 PM IST
देव कश्यप पीटीआई, शांतिनिकेतन (पश्चिम बंगाल)।
पीटीआई, शांतिनिकेतन (पश्चिम बंगाल)। Published by: देव कश्यप Updated Sat, 29 Apr 2023 08:06 PM IST
सार

केंद्रीय विश्वविद्यालय ने अपने आदेश में सेन को छह मई तक या 19 अप्रैल के प्रकाशित आदेश के 15 दिनों के भीतर कथित रूप से अनधिकृत तरीके से कब्जा की गई भूमि को खाली करने के लिए कहा है।

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Nobel Laureate Amartya Sen lawyers move court over eviction notice
प्रसिद्ध अर्थशास्त्री प्रोफेसर अमृत्य सेन। - फोटो : PTI (फाइल फोटो)

विस्तार

नोबेल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन के वकीलों ने बंगाल की बीरभूम जिला अदालत में विश्व भारती के एक नए 'बेदखली आदेश' को चुनौती दी है। जिसमें प्रसिद्ध अर्थशास्त्री को विश्वविद्यालय परिसर में स्थित उनकी पैतृक संपत्ति के अंदर ‘अतिक्रमित भूमि’ का एक हिस्सा खाली करने के लिए कहा गया है।

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केंद्रीय विश्वविद्यालय ने अपने आदेश में सेन को छह मई तक या 19 अप्रैल के प्रकाशित आदेश के 15 दिनों के भीतर कथित रूप से अनधिकृत तरीके से कब्जा की गई भूमि को खाली करने के लिए कहा है। इस दावे का विरोध करते हुए सेन के वकीलों ने शुक्रवार को जिला अदालत का रुख किया और विश्व भारती के आदेश को चुनौती देते हुए बेदखली के आदेश को अवैध करार दिया।
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सेन के वकील गोराचंद चक्रवर्ती ने शनिवार को संवाददाताओं से कहा, हमने विश्व भारती के अधिकारियों द्वारा जारी आदेश के प्रति अदालत का ध्यान आकर्षित किया है। उनका आदेश अवैध है। हमें यह भी पता चला है कि विश्व भारती ने एक ‘कैविएट’ याचिका (अपना पक्ष सुने जाने के लिए एक याचिका) दायर की है। हमने बेदखली आदेश मामले में दी गई छह मई की समय सीमा से पहले सुनवाई की अपील की है।
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चक्रवर्ती ने कहा, हमें उम्मीद है कि अदालत स्थिति पर विचार करेगी और मामले की शीघ्र सुनवाई करेगी। वकील ने कहा कि बीरभूम कार्यकारी दंडाधिकारी का एक आदेश भी है, जिसमें पुलिस को छह जून तक संपत्ति के संदर्भ में यथास्थिति रखने के लिए कहा गया है, जब वह दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 145 (भूमि या जल से जुड़े विवाद की प्रक्रिया से शांति भंग होने की संभावना हो) से जुड़ी एक याचिका पर सुनवाई करेंगे।


सेन के ‘केयरटेकर’ गीतिकांत मजूमदार ने भूमि विवाद के चलते शांति भंग होने की आशंका को लेकर यह याचिका दायर की थी। सेन अभी अमेरिका में हैं और उनके जून में भारत लौटने की उम्मीद है। विश्व भारती के प्रवक्ता ने कहा कि विश्वविद्यालय को इस मुद्दे पर कोई टिप्पणी नहीं करनी है।



पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बुधवार को कहा था कि अगर सेन को जबरन बेदखल करने की कोई कोशिश की गई तो वह बुलडोजर को रोकने के लिए सेन के शांतिनिकेतन आवास के बाहर धरना देने वाली पहली व्यक्ति होंगी। मुख्यमंत्री ने कहा, मैं देखना चाहती हूं कि कौन अधिक शक्तिशाली है-बुलडोजर या मानवता।’

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