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Money Laundering Case: 'जमानत के लिए एक साल जेल में रहना जरूरी नहीं...', सुप्रीम कोर्ट ने कारोबारी को दी राहत

Tue, 20 May 2025 03:47 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: निर्मल कांत Updated Tue, 20 May 2025 03:47 PM IST
सार

Money Laundering Case: सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मनी लॉन्ड्रिंग में जमानत के लिए एक साल जेल में रहना जरूरी नहीं है। कारोबारी अनवर ढेबर को 2,000 करोड़ के कथित शराब घोटाले में शर्तों के साथ जमानत मिली। ईडी के विरोध के बावजूद कोर्ट ने रिहाई का आदेश दिया।

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'No rule one must spend a year in jail for relief': SC grants bail in money laundering case
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : एएनआई (फाइल)

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि धनशोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) के मामलों में जमानत पाने के लिए यह कोई नियम नहीं है कि आरोपी को पहले एक साल जेल में रहना होगा। शीर्ष कोर्ट ने कारोबारी अनवर ढेबर को राहत देते हुए यह टिप्पणी की।

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जस्टिस अभय एस ओका और उज्ज्वल भुइयां की बेंच ने कारोबारी अनवर ढेबर को मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में जमानत दी। यह मामला करीब 2,000 करोड़ रुपये के कथित शराब घोटाले से जुड़ा है। बेंच ने टिप्पणी की, ऐसा कोई नियम नहीं है कि जमानत पाने के लिए आरोपी को एक साल तक जेल में रहना होगा।
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आरोपी को शर्तों के साथ मिली जमानत
ढेबर को 8 अगस्त 2024 को गिरफ्तार किया गया था और वह 9 महीने से अधिक समय से जेल में थे। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मामले में 40 गवाह हैं और जांच अभी भी जारी है। दूसरे (मुख्य) मामले में 450 गवाह हैं और अभी तक उसमें आरोप तय नहीं हुए हैं, इसलिए जल्द मुकदमा शुरू होने की संभावना नहीं है। मामले में अधिकतम सजा 7 साल है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ढेबर को कड़ी शर्तों के साथ जमानत दी जाएगी। उन्हें अपना पासपोर्ट जमा करना होगा।

ईडी ने किया जमानत का विरोध
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि अभी आरोपी को जेल में एक साल भी नहीं हुआ है और वह एक प्रभावशाली व्यक्ति है, जिससे मुकदमा प्रभावित हो सकता है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि निचली कोर्ट एक हफ्ते के अंदर तय शर्तों के मुताबिक आरोपी को रिहा करे।

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क्या है पूरा मामला
अनवर ढेबर, कांग्रेस नेता और रायपुर के मेयर एजाज ढेबर के भाई हैं। उन्हें आयकर विभाग की जांच के आधार पर हुई मनी लॉन्ड्रिंग जांच में सबसे पहले गिरफ्तार किया गया था। ईडी का आरोप है कि छत्तीसगढ़ और कुछ अन्य राज्यों में 2019 से चल रहे इस कथित शराब घोटाले में 2,161 करोड़ रुपये की अवैध कमाई हुई, जो राज्य सरकार को मिलनी चाहिए थी। ईडी ने कहा कि इस घोटाले में बड़े अफसर, नेता, उनके सहयोगी और आबकारी विभाग के अधिकारी शामिल हैं।

धोखाधड़ी मामले में आंशिक रूप से नेत्रहीन बुजुर्ग को भी राहत
सुप्रीम कोर्ट ने धोखाधड़ी के एक मामले में गिरफ्तार आंशिक रूप से नेत्रहीन व्यक्ति (65 वर्षीय) को जमानत दी और कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि ऐसे मामलों में आरोपी को जमानत के लिए शीर्ष कोर्ट तक आना पड़ता है। जस्टिस ओका और जस्टिस भुइयां की बेंच ने 19 मई के आदेश में कहा, याचिकाकर्ता की उम्र 65 वर्ष है और वह 50 फीसदी दृष्टिहीनता से पीड़ित है। दुर्भाग्य है कि ऐसे मामलों में भी व्यक्ति को सुप्रीम कोर्ट तक आना पड़ता है। 

आरोपी सात महीने से ज्यादा समय से जेल में बंद था और मामले में आरोपपत्र दाखिल हो चुका है। सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि आरोपी को एक हफ्ते के अंदर निचली कोर्ट में पेश किया जाए। निचली कोर्ट उचित शर्तों के साथ उसे जमानत पर रिहा करे। इनमें यह शर्त शामिल हो कि वह हर तारीख पर कोर्ट में पेश हो और मुकदमे में सहयोग करे। व्यक्ति के खिलाफ धारा 420 (धोखाधड़ी), 467, 468, 471 और आपराधिक साजिश (धारा 120बी) के तहत मामला दर्ज है। ये सभी अपराध मजिस्ट्रेट कोर्ट में सुनवाई योग्य हैं।

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