कैंपस हिंसा पर बोले राष्ट्रपतिः भारत में असहिष्णुता के लिए जगह नहीं
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पिछले दिनों दिल्ली के रामजस कॉलेज में हुए विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि विश्वविद्यालयों में पढ़ने वाले छात्रों को केवल डिबेट और वार्ता से ऐसे मुद्दों का समाधान करना चाहिए। उन्होने कहा कि छात्रों को इन मुद्दों पर लड़ाई-झगड़ा करके विवाद पैदा करना गलत तरीका है।
There should be no room in India for intolerant Indian.India has been since ancient times a bastion of free thought,speech & expression-Pres pic.twitter.com/Fo8NBmXMvP
विज्ञापन विज्ञापन— ANI (@ANI_news) March 2, 2017
भारत में हमेशा से रही है अभिव्यक्ति की आजादी
केरल के कोच्चि में आयोजित एक कार्यक्रम में बोलते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि भारत में हमेशा से अभिव्यक्ति की आजादी रही है। इसके बारे में देश के संविधान में भी स्पष्ट रुप से बताया गया है। देश के लिए उसके लोग जरूरी होते हैं और अब समय आ गया है कि लोगों को देशभक्ति के बारे में फिर से जागरुक किया जाए। राजनेताओं और पॉलिटिकल एक्टिविस्ट को नसीहत देते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि उन्हें पक्ष-विपक्ष की बातें भी खुले मन से सुननी चाहिए और उनके साथ रहकर के कुछ सीखना चाहिए। इसके साथ ही कानूनविदों को भी जनता को हल्के में नहीं लेना चाहिए।
रामजस कॉलेज में हुआ था विवाद
जेएनयू के दो छात्रों उमर खालिद और शेहला मसूद के दिल्ली विश्वविद्यालय के रामजस कॉलेज में बुलावे के बाद बुधवार को जमकर हंगामेबाजी हुई। इस बीच पुलिस ने इन दोनों के साथ कुछ छात्रों को मोरिस नगर थाने में हिरासत में ले लिया जिसके बाद छात्रों ने थाने के बाहर जमकर हंगामा किया।
असल में उमर खालिद और शेहला मसूद को आईसा ने आमंत्रित किया था जिसे एबीवीपी ने रद्द कर दिया था।मालूम हो कि खालिद का नाम उन छात्रों में शामिल है जिन पर जेएनयू के एक कार्यक्रम के दौरान देश विरोधी नारे लगाने का आरोप है।
जबकि शेहला राशिद छात्र संघ की पूर्व सदस्य हैं और छात्रों की गिरफ्तारी के विरोध में आंदोलन चलाने में शामिल थीं। जबकि शेहला राशिद छात्र संघ की पूर्व सदस्य हैं और छात्रों की गिरफ्तारी के विरोध में आंदोलन चलाने में शामिल थीं।