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Hindi News ›   India News ›   No PM Modi Donald Trump call between Apr 22 to Jun 17: Jaishankar rejects mediation claim on Operation Sindoor

Jaishankar: '22 अप्रैल से 17 जून तक PM मोदी और ट्रंप के बीच कोई बातचीत नहीं हुई', लोकसभा में जयशंकर की दो टूक

Mon, 28 Jul 2025 06:57 PM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Mon, 28 Jul 2025 06:57 PM IST
सार

विदेश मंत्री एस. जयशंकर संसद के निचले सदन यानी लोकसभा में 'ऑपरेशन सिंदूर' पर चर्चा में हिस्सा लिया। उन्होंने कहा कि पहलगाम के बाद भारत का रुख आतंकवाद के प्रति शून्य सहिष्णुता (जीरो टॉलरेंस), आत्मरक्षा का अधिकार का है। विदेश मंत्री ने लोकसभा में बोलते हुए पहलगाम आतंकवादी हमले के बाद भारत की कूटनीतिक रणनीति का जिक्र किया।

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No PM Modi Donald Trump call between Apr 22 to Jun 17: Jaishankar rejects mediation claim on Operation Sindoor
Jaishankar - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने लोकसभा में साफ किया कि 22 अप्रैल से 17 जून के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच कोई सीधी बातचीत नहीं हुई। जयशंकर ने यह भी खुलासा किया कि पाकिस्तान पर भारत के जवाबी हमलों के बाद भारत को ऐसे फोन कॉल आए, जिनसे संकेत मिलने लगे थे कि पाकिस्तान अब हार मान चुका है। हालांकि, भारत ने साफ किया कि ऐसा कोई भी अनुरोध पाकिस्तान के सैन्य अभियान महानिदेशक (DGMO) की ओर से औपचारिक रूप से आना चाहिए था। इसलिए हमने पाकिस्तान की ओर से गुहार लगाए जाने के बाद ही अपनी कार्रवाई पर ब्रेक लगाया।

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सदन में ऑपरेशन सिंदूर पर बोलते हुए विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने कहा कि पहलगाम हमले के बाद एक स्पष्ट, मजबूत और दृढ़ संदेश भेजना जरूरी था। हमारी धैर्य की सीमाएं पार की गई थीं, सीमा लांघ दी गई थी और हमें यह स्पष्ट करना था कि इसके गंभीर परिणाम होंगे। पहला कदम- जो उठाया गया, वह यह था कि 23 अप्रैल को सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति की बैठक हुई। उस बैठक में यह निर्णय लिया गया कि-
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1. 1960 की सिंधु जल संधि तत्काल प्रभाव से तब तक स्थगित रहेगी जब तक कि पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद को अपना समर्थन विश्वसनीय और अपरिवर्तनीय रूप से त्याग नहीं देता।
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2. एकीकृत चेक पोस्ट अटारी को तत्काल प्रभाव से बंद कर दिया जाएगा।
3. एसएआरसी वीजा छूट योजना के तहत यात्रा कर रहे पाकिस्तानी नागरिकों को अब ऐसा करने की अनुमति नहीं होगी।
4. पाकिस्तानी उच्चायोग के रक्षा, नौसेना और वायु सलाहकारों को अवांछित व्यक्ति घोषित किया जाएगा।
5. उच्चायोग की कुल संख्या 55 से घटाकर 30 कर दी जाएगी।



विदेश मंत्री ने यह भी कहा, 'यह बिल्कुल स्पष्ट था कि सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति की ओर से अनुमोदित पहले कदमों के बाद पहलगाम हमले पर भारत की प्रतिक्रिया यहीं नहीं रुकेगी। कूटनीतिक दृष्टिकोण से, विदेश नीति के दृष्टिकोण से, हमारा काम पहलगाम हमले की वैश्विक समझ को आकार देना था। हमने जो करने की कोशिश की, वह यह था कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने पाकिस्तान की ओर से सीमा पार आतंकवाद के लंबे समय से इस्तेमाल को उजागर किया जाए। हमने पाकिस्तान में आतंकवाद के इतिहास को उजागर किया और बताया कि कैसे इस हमले का उद्देश्य जम्मू-कश्मीर की अर्थव्यवस्था को निशाना बनाना और भारत के लोगों के बीच सांप्रदायिक कलह फैलाना था।'



विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने कहा, 'हमारी कूटनीति का केंद्र बिंदु संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद था। हमारे लिए चुनौती यह थी कि इस विशेष समय में पाकिस्तान सुरक्षा परिषद का सदस्य है। सुरक्षा परिषद में हमारे दो लक्ष्य थे, पहला- सुरक्षा परिषद से जवाबदेही के लिए समर्थन पाना और दूसरा- इस हमले को अंजाम देने वालों को न्याय के कटघरे में लाना। मुझे यह कहते हुए खुशी हो रही है कि यदि आप 25 अप्रैल के सुरक्षा परिषद के बयान को देखें तो सुरक्षा परिषद के सदस्यों ने इस आतंकवादी हमले की कड़े शब्दों में निंदा की थी। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आतंकवाद अपने सभी रूपों और अभिव्यक्तियों में अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए सबसे गंभीर खतरों में से एक है। सबसे महत्वपूर्ण बात परिषद ने आतंकवाद के इस निंदनीय कृत्य के अपराधियों, आयोजकों, वित्तपोषकों और प्रायोजकों को जवाबदेह ठहराने और उन्हें न्याय के कटघरे में लाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

No PM Modi Donald Trump call between Apr 22 to Jun 17: Jaishankar rejects mediation claim on Operation Sindoor
Jaishankar - फोटो : ANI

जयशंकर ने यह भी कहा कि पहलगाम हमले के बाद भारत की कूटनीति का नतीजा यह हुआ कि संयुक्त राष्ट्र के 190 देशों में से केवल तीन ने ही ऑपरेशन सिंदूर का विरोध किया। इस बात का भारी समर्थन था कि जिस देश पर हमला हुआ है, उसे अपनी रक्षा करने का अधिकार है। विदेश मंत्री ने कहा, 'हमने ऑपरेशन सिंदूर शुरू करने के लिए एक विचार गढ़ने और कूटनीति तैयार करने की कोशिश की। उस कूटनीति का नतीजा यह हुआ कि संयुक्त राष्ट्र के 190 देशों में से पाकिस्तान के अलावा केवल तीन देशों ने ऑपरेशन सिंदूर का विरोध किया।

जयशंकर ने कहा, 'आम तौर पर यह माना गया कि आतंकवाद अस्वीकार्य है और जिस देश पर हमला हुआ है, उसे अपनी रक्षा करने का अधिकार है और भारत ठीक यही कर रहा था।' उन्होंने कहा, 'जब ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया गया था, तो हमने अपने उद्देश्य सामने रखे थे कि यह पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकी ढांचे पर हमला करेगा। हमारी कार्रवाई केंद्रित, सोची-समझी और बिना उकसावे वाली थी और हम इस प्रतिबद्धता पर खरे उतरे कि उन हमलों के लिए जिम्मेदार लोगों को जिम्मेदार ठहराया जाएगा।'



जयशंकर ने बताया कि भारतीय कूटनीति के कारण ही अमेरिका ने द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) समूह को एक वैश्विक आतंकवादी संगठन घोषित किया था। उन्होंने कहा, '10 मई को हमें फोन कॉल आए, जिनमें अन्य देशों की यह धारणा साझा की गई कि पाकिस्तान लड़ाई रोकने के लिए तैयार है। जयशंकर ने कहा, 'हमारा रुख यह था कि अगर पाकिस्तान तैयार है, तो हमें डीजीएमओ के जरिए पाकिस्तानी पक्ष से यह अनुरोध मिलना चाहिए। यह अनुरोध ठीक इसी तरह आया।'

उन्होंने कहा, 'मैं दो बातें बिल्कुल स्पष्ट कर देना चाहता हूं, पहली बात- अमेरिका के साथ किसी भी बातचीत में किसी भी स्तर पर व्यापार या जो कुछ चल रहा था, उससे उनका कोई संबंध नहीं था। दूसरी बात- 22 अप्रैल से जब राष्ट्रपति ट्रंप ने अपनी संवेदना व्यक्त करने के लिए फोन किया था, 17 जून तक, जब उन्होंने कनाडा में मौजूद प्रधानमंत्री मोदी को फोन किया, दोनों के बीच कोई बातचीत नहीं हुई।'

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Jaishankar - फोटो : ANI

जयशंकर ने कहा कि भारतीय कूटनीति ने तब पाकिस्तान की ओर से आतंकवाद को लंबे समय से दिए जा रहे समर्थन को सामने लाने की कोशिश की और यह भी बताया कि कैसे पहलगाम हमले का लक्ष्य जम्मू-कश्मीर की अर्थव्यवस्था थी और इसने सांप्रदायिक कलह को जन्म दिया। दो संदेश थे- आतंकवाद के प्रति शून्य सहिष्णुता और आतंकवादियों से अपने लोगों की रक्षा करने का अधिकार। उन्होंने कहा, 'सभी राजनयिक ब्रीफिंग इन्हीं दो उद्देश्यों पर केंद्रित थीं।'

जयशंकर की यह टिप्पणी सदन में कांग्रेस के उपनेता गौरव गोगोई की ओर से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 26 बार किए गए दावे पर सरकार की आलोचना के बाद आई है। इसमें उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच युद्धविराम के लिए व्यापार का इस्तेमाल करने की बात कही थी। कांग्रेस ट्रंप की इस टिप्पणी को लेकर सरकार पर लगातार हमला बोल रही है।



भारत ने पहलगाम हमले में 26 नागरिकों को खो दिया था। इसके जवाब में 7 मई को पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकवादी ढांचों को निशाना बनाते हुए ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया गया। भारत और पाकिस्तान के बीच चार दिनों तक सीमा पार से ड्रोन और मिसाइल हमलों के बाद 10 मई को संघर्ष समाप्त करने पर सहमति बनी थी।

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