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कोविड-19 मौतों में फॉरेंसिक शव परीक्षण के दौरान आक्रामक तकनीक को नहीं अपनाया जाएगा: आईसीएमआर
Wed, 20 May 2020 11:13 AM IST
अनवर अंसारी
पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली
Published by: अनवर अंसारी
Updated Wed, 20 May 2020 11:13 AM IST
सार
- कोरोना वायरस से होने वाली मौत के मामलों में शव परीक्षण के दौरान आक्रामक तकनीक को नहीं अपनाया जाएगा
- स्वास्थ्य कर्मियों को संक्रमण से बचाने के लिए उठाया कदम
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coronavirus
- फोटो : PTI
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विस्तार
भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने कहा है कि कोरोना वायरस से होने वाली मौत के मामलों में फॉरेंसिक शव परीक्षण के दौरान आक्रामक तकनीक को नहीं अपनाया जाएगा। संस्थान ने यह फैसला इसलिए लिया है क्योंकि अधिक सावधानी बरतने के बाद भी स्वास्थ्य कर्मियों को अंग के तरल पदार्थ और स्रावों के कारण संभावित संक्रमण का खतरा बना हुआ है।
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आईसीएमआर ने अपने 'भारत में कोविड-19 की मौतों में मेडिको-लीगल शव परीक्षा के लिए मानक दिशानिर्देश' में कहा है कि इससे डॉक्टरों, शवगृह कर्मचारियों, पुलिस कर्मियों और शव निपटान की श्रृंखला में शामिल सभी लोगों में संक्रमण को फैलने से रोका जा सकेगा।
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दिशानिर्देश के अनुसार, कोरोना वायरस संक्रमण के कारण अस्पताल में और चिकित्सा देखभाल के तहत होने वाली मौतें एक गैर-एमएलसी मामला है और इसके लिए पोस्टमॉर्टम की आवश्यकता नहीं होती है। इसमें कहा गया है कि इलाज कर रहे डॉक्टरों द्वारा मृत्यु का आवश्यक प्रमाणीकरण किया जाएगा।
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अस्पताल में लाए गए कोविड-19 संदिग्ध मरीजों के शवों को आपातकालीन स्थिति में डॉक्टर द्वारा मेडिको लीगल मामलों के रूप में लेबल किया जा सकता है। ऐसे शव को मुर्दाघर भेजा जाएगा और पुलिस को इसकी जानकारी दी जाएगी, जो मौत के कारण की स्पष्टता के लिए शव परीक्षा की आवश्यकता को लेकर आदेश दे सकती है। दिशानिर्देशों में कहा गया है कि इन मामलों की फोरेंसिक शव परीक्षा में छूट भी दी सकती है।
हत्या, आकस्मिक निधन या आत्महत्या जैसे कुछ मामलों में, यदि मृतक कोविड-19 संक्रमित या संदिग्ध है। यदि मरीज की मौत अस्पताल में होती है, तो चिकित्सीय रिकॉर्ड और अन्य सभी प्रासंगिक दस्तावेज फॉरेंसिक शव परीक्षा के लिए शव के साथ भेजे जा सकते हैं।
पुछताछ की प्रक्रिया के बाद, यदि किसी अपराध पर संदेह नहीं किया जाता है, तो पुलिस के पास मेडिको-लीगल शव परीक्षण को माफ करने का अधिकार है, भले ही वह मेडिको-लीगल मामला हो। दिशानिर्देश में कहा गया है कि जांच करने वाले पुलिस अधिकारी को ऐसी महामारी की स्थिति के दौरान अनावश्यक शवों के शव परीक्षण को कम करने के लिए लगातार कदम उठाने चाहिए।