Madras High Court: मद्रास हाईकोर्ट ने कहा- मानहानि का मामला स्वतः बंद नहीं हो सकता , जानें पूरा मामला
सुप्रीम कोर्ट ने 10 अगस्त 2021 को ही सीआरपीसी की धारा 321 का अभियोजन पक्ष द्वारा दुरुपयोग रोकने के लिए कुछ दिशा-निर्देश जारी किए थे।
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मद्रास हाईकोर्ट ने कहा है कि पूर्व मुख्यमंत्री, मंत्रियों, सांसदों, विधायकों या सरकारी अधिकारियों के खिलाफ चल रहे मानहानि के मामले अगली सरकार के आदेश जारी करने के बाद अपने आप बंद नहीं हो सकते। जस्टिस एम निर्मल कुमार ने 11 फरवरी को सलेम के डीएमके सांसद एसआर पर्तिबन की याचिका पर यह आदेश दिया। सांसद ने सलेम के जिला एवं सत्र न्यायाधीश के सामने अपने खिलाफ चल रहे मानहानि के मामले को समाप्त करने की याचिका लगाई थी। पर्तिबन पर आरोप था कि उन्होंने जून 2019 को एक भाषण दिया था जिससे तब के मुख्यमंत्री के पलनीस्वामी की अवमानना हुई थी।
राज्य में डीएमके की सरकार बनने के बाद 10 अगस्त 2021 को एक सामान्य आदेश (जीओ) जारी कर पर्तिबन के खिलाफ चल रहे मामले को वापस ले लिया गया। सरकार ने सीआपीसी की धारा 321 के तहत और राज्य के एडवोकेट जनरल आर षणमुगसुंदरम और राज्य के लोक अभियोजक हसन जिन्नाह की सिफारिश पर यह आदेश जारी किया। इस बारे में जस्टिस निर्मल कुमार ने विपक्षी तर्कों को सुनने और उपलब्ध तथ्यों का अवलोकन करने के बाद कहा कि आरोपी को सिर्फ जीओ के आधार पर स्वत: बरी नहीं किया जा सकता।
सुप्रीम कोर्ट ने 10 अगस्त 2021 को ही सीआरपीसी की धारा 321 का अभियोजन पक्ष द्वारा दुरुपयोग रोकने के लिए कुछ दिशा-निर्देश जारी किए थे। साथ ही इस धारा के अंदर मिली शक्तियों का इस्तेमाल पूरी तरह से नेक नीयत के साथ जनहित में किया जाना आवश्यक है और इसका इस्तेमाल असंगत और राजनीतिक महत्व के लिए नहीं किया जा सकता।