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नीति आयोग: सीईओ अमिताभ कांत बोले- सामाजिक क्षेत्रों में निवेश सतत आर्थिक वृद्धि के लिए अहम

Fri, 12 Nov 2021 04:12 AM IST
देव कश्यप पीटीआई, अहमदाबाद
पीटीआई, अहमदाबाद Published by: देव कश्यप Updated Fri, 12 Nov 2021 04:12 AM IST
सार

अमिताभ कांत ने बच्चों में पोषण की स्थिति के बारे में भी चिंता व्यक्त की और उन्होंने बताया कि यह विभिन्न विभागों के बीच "अभिसरण" की कमी के कारण हो रहा है। उन्होंने कहा, ‘‘स्वास्थ्य, शिक्षा, पोषण और कौशल विकास में निवेश आर्थिक सुधारों जितना ही जरूरी है।

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NITI Aayog CEO says Investment in social sectors crucial for sustained economic growth
नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत (फाइल फोटो) - फोटो : ANI

विस्तार

नीति आयोग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अमिताभ कांत ने गुरुवार को कहा कि स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे सामाजिक क्षेत्रों में निवेश निरंतर आर्थिक विस्तार के लिए महत्वपूर्ण है और भारत को "विकास के नए उदय वाले क्षेत्रों" में जाना चाहिए।

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कांत ने बच्चों में पोषण की स्थिति के बारे में भी चिंता व्यक्त की और उन्होंने बताया कि यह विभिन्न विभागों के बीच "अभिसरण" की कमी के कारण हो रहा है। उन्होंने कहा, ‘‘स्वास्थ्य, शिक्षा, पोषण और कौशल विकास में निवेश आर्थिक सुधारों जितना ही जरूरी है। भौतिक और डिजीटल बुनियादी ढांचे में निवेश के साथ ही इन क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करना दीर्घकाल तक सतत आर्थिक वृद्धि के लिए आवश्यक है।’’
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अमिताभ ‘‘भारत 2031 : बदलाव के दशक’’ विषय पर भारतीय प्रबंधन संस्थान अहमदाबाद (आईआईएमए) में बोल रहे थे। उन्होंने सुझाव दिया कि भारत को ‘‘वृद्धि के उभरते क्षेत्रों’’ जैसे कि इलेक्ट्रिक गतिशीलता, बैटरी स्टोरेज, कृत्रिम बुद्धिमता और डाटा का इस्तेमाल करते हुए मशीन लर्निंग में आगे बढ़ना चाहिए।
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उन्होंने कहा कि दक्षिण कोरिया मुख्य रूप से अपनी मानव पूंजी के कारण इतनी प्रभावशाली गति से आर्थिक रूप से विकसित होने में सक्षम हुआ, जो स्वास्थ्य, शिक्षा, स्कूली शिक्षा के स्तर और सामाजिक सुरक्षा के मामले में काफी बेहतर है।

कांत ने कहा कि सीखने के परिणामों, स्वास्थ्य परिणामों और पोषण पर ध्यान केंद्रित किए बिना भारत का विकास संभव नहीं है। यह इक्विटी के साथ बढ़ने की कुंजी है। यदि आप इन सामाजिक संकेतकों में अच्छा करते हैं, तो आप लंबे समय में अच्छा करेंगे और तीन दशक की अवधि में अपने विकास को बनाए रखेंगे।

नीति आयोग के सीईओ ने स्वास्थ्य क्षेत्र में बुनियादी ढांचे, जनशक्ति और वित्त पोषण की कमी के बारे में चिंता व्यक्त करते हुए बताया कि चीन के अस्पतालों में  4.3 बेड और दक्षिण कोरिया के 12.4 बेड के मुकाबले भारत का औसत प्रति 1,000 व्यक्तियों पर 0.5 बेड है।
 

कांत ने कहा कि "इसके अलावा, भारत को हरित हाइड्रोजन का उत्पादन करने के लिए नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए और हरित हाइड्रोजन और हरित अमोनिया के उत्पादन में एक चैंपियन बनना चाहिए। इससे हमें जीवाश्म ईंधन के आयात में कटौती करने में मदद मिलेगी, जो अब 160 बिलियन अमेरिकी डॉलर है और अगले दशक में 320 बिलियन अमेरिकी डॉलर से ऊपर जा सकता है।



उन्होंने कहा कि नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग जीवाश्म ईंधन के विकल्प के रूप में हरित हाइड्रोजन के उत्पादन के लिए किया जा सकता है। हरित हाइड्रोजन का उपयोग करके भारत 2047 तक, जब देश  स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे करेगा, जीवाश्म ईंधन पर अपनी निर्भरता को समाप्त कर सकता है।

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