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जम्मू-कश्मीर में आम जनता के खातों से आतंकवाद को फंडिग, जांच शुरु
एजेंसी, नई दिल्ली
Updated Thu, 18 Aug 2016 05:38 AM IST
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- फोटो : PTI
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राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी गतिविधियों के लिए धन उपलब्ध कराने में सामान्य जनता के बैंक खातों के इस्तेमाल की जांच शुरू कर दी है। भारतीय खुफिया और सुरक्षा एजेंसियों की पकड़ से बचने के लिए आतंकवादी संगठनों और उनसे सहानुभूति रखने वालों ने धन उपलब्ध कराने के लिए हवाला चैनल अपनाने की बजाय खाड़ी के देशों में आने वाले कश्मीरी लोगों से उनके खाते के इस्तेमाल का अनुरोध कर रहे हैं।
आम कश्मीरी जनता का पूरी तरह से दिमाग बदलने के बाद उनके बैंक खाते में पैसा जमा किया जाता है, जिसे बाद आतंकवादी गतिविधियों के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इसके बदले उक्त व्यक्ति के खाते में कुल प्राप्त राशि का एक फीसदी छोड़ दिया जाता है। अक्सर ऐसा होता है बैंक खाते में जिस दिन धम जमा करवाया जाता है उसी दिन उसे निकाल लिया जता है। जांच एजेंसी के सूत्रों ने बताया कि कई ऐसे मामले देखे गए हैं जिसमें खाताधारक का जमाकर्ता से कोई संबंध नहीं होता और 48 घंटे के भीतर उस राशि को निकाल लिया जाता है।
भारतीय रिजर्व बैंक की नजर से बचने के लिए इन खातों में धन छोटी-छोटी मात्रा में डाली जाती है। यानी एक लाख रुपये से अधिक की राशि नहीं डाली जाती। भारत में बैंक सामान्य तौर पर उन्हीं लेनदेन को संदिग्ध मानते हैं जिसमें किसी खाते में 10 लाख रुपये से अधिक जमा किए जाते हैं।
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आम कश्मीरी जनता का पूरी तरह से दिमाग बदलने के बाद उनके बैंक खाते में पैसा जमा किया जाता है, जिसे बाद आतंकवादी गतिविधियों के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इसके बदले उक्त व्यक्ति के खाते में कुल प्राप्त राशि का एक फीसदी छोड़ दिया जाता है। अक्सर ऐसा होता है बैंक खाते में जिस दिन धम जमा करवाया जाता है उसी दिन उसे निकाल लिया जता है। जांच एजेंसी के सूत्रों ने बताया कि कई ऐसे मामले देखे गए हैं जिसमें खाताधारक का जमाकर्ता से कोई संबंध नहीं होता और 48 घंटे के भीतर उस राशि को निकाल लिया जाता है।
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भारतीय रिजर्व बैंक की नजर से बचने के लिए इन खातों में धन छोटी-छोटी मात्रा में डाली जाती है। यानी एक लाख रुपये से अधिक की राशि नहीं डाली जाती। भारत में बैंक सामान्य तौर पर उन्हीं लेनदेन को संदिग्ध मानते हैं जिसमें किसी खाते में 10 लाख रुपये से अधिक जमा किए जाते हैं।
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