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कृषि कानून: किसानों के विरोध प्रदर्शन पर सख्त हुआ मानवाधिकार आयोग, इन चार राज्यों को नोटिस भेज मांगी रिपोर्ट

Tue, 14 Sep 2021 04:03 PM IST
संजीव कुमार झा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: संजीव कुमार झा Updated Tue, 14 Sep 2021 04:03 PM IST
सार

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने सोमवार को दिल्ली, राजस्थान, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और अन्य अधिकारियों को नोटिस जारी कर किसानों के विरोध प्रदर्शन की रिपोर्ट मांगी है।

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Kisan Andolan: NHRC Issued Notice To Delhi, Rajasthan, Haryana, Uttar Pradesh, Asking For Reports Of Farmers Protest
किसान आंदोलन(फाइल) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने सोमवार को दिल्ली, राजस्थान, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और अन्य अधिकारियों को नोटिस जारी कर किसानों के विरोध प्रदर्शन की रिपोर्ट मांगी है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के मुताबिक उन्हें शिकायत मिली हैं कि इन राज्यों में चल रहे किसान आंदोलन की वजह से नौ हजार से अधिक उद्योग बंद हो चुके हैं। यातायात व्यवस्था चरमरा गई है। जिसकी वजह से लोगों को, मरीजों,बुजुर्गों और दिव्यांगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है साथ ही बोर्डरों के बंधक होने की वजह से लोगों को ज्यादा दूरी तय करनी पड़ रही है।

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इतना ही नहीं राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को यह भी शिकायत मिली है कि इस आंदोलन की वजह से कुछ जगहों पर लोगों को  उनके घरों से भी नहीं निकलने दिया जा रहा। इसके अलावा आन्दोलन स्थलों पर कोविड प्रोटोकॉल की भी धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। राज्यों और अधिकारियों को नोटिस देने के अलावा राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने आर्थिक विकास संस्थान से भी 10 अक्तूबर तक इस आंदोलन की वजह से उद्द्योग पर पड़े प्रभाव पर एक रिपोर्ट मांगी है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने राष्ट्रीय आपदा प्रबन्धन प्राधिकरण (NDMA) और गृह मंत्रालय से इस आंदोलन में हो रहे कोविड नियमो के उल्लंघन पर भी रिपोर्ट मांगी है।
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इसके अलावा मानवाधिकार आयोग ने कहा है कि प्रदर्शन स्थल पर एक मानवाधिकार कार्यकर्ता के कथित सामूहिक दुष्कर्म के मामले में झज्जर के डीएम से मृतक के परिजन को मुआवजे के भुगतान के संबंध में कोई रिपोर्ट प्राप्त नहीं हुई थी। इसलिए झज्जर के डीएम 10 अक्टूबर तक रिपोर्ट दाखिल करें।
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मानवाधिकार आयोग ने आगे कहा कि दिल्ली स्कूल ऑफ सोशल वर्क और दिल्ली विश्वविद्यालय से अनुरोध है कि वे सर्वेक्षण करने के लिए टीमों की प्रतिनियुक्ति करें और एक रिपोर्ट प्रस्तुत करें, जिसमें किसानों द्वारा लंबे समय तक आंदोलन के कारण आजीविका, लोगों के जीवन, वृद्ध और दुर्बल व्यक्तियों पर प्रभाव का आकलन किया जाए, अधिकार पैनल कहा।

बता दें कि पिछले साल 25 नवंबर से विभिन्न राज्यों के किसान दिल्ली-हरियाणा के सिंघू बॉर्डर और टिकरी बॉर्डर, दिल्ली-उत्तर प्रदेश के गाजीपुर बॉर्डर पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं और तीन नए कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग को लेकर अपना डेरा डाले हुए हैं।


 

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