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भारतीय इंजीनियर से नेपाल ने कहा फतह करो एवरेस्ट, लेकिन अपनों ने दी मायूसी

Fri, 03 Feb 2017 03:44 AM IST
एजेंसी/ ब्यूरो/ काठमांडू / फतेहपुर
एजेंसी/ ब्यूरो/ काठमांडू / फतेहपुर Updated Fri, 03 Feb 2017 03:44 AM IST
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Nepal government selected Rajesh Choudhary to hoist the Indian flag on Mount Everest
- फोटो : amar ujala

दुनिया की दुर्गम पहाड़ी चोटियों पर फतह हासिल कर चुके भारत के एमटैक इंजीनियर राजेश चौधरी को नेपाल सरकार ने माउंट एवरेस्ट पर भारत का झंडा फहराने के लिए चुन लिया है लेकिन अपनों की अनदेखी और प्रशासनिक बेरुखी के चलते उसका यह सपना पूरा नहीं हो पा रहा है। एवरेस्ट पर चढ़ने वाले चुनिंदा लोगों को ही नेपाल सरकार इस बार क्लीन चिट दी है जो राजेश को मिल चुकी है। 

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राजेश चौधरी हरियाणा में अंबाला के नारायणगढ़ में फतेहपुर गांव का रहने वाला है और दुनिया की सबसे ऊंची चोटी पर तिरंगा फहराने की सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद उसके सामने आर्थिक तंगी आड़े आ रही है। एवरेस्ट फतह करने के लिए उसे 25 लाख रुपयों की दरकार है, जिसके लिए राजेश केंद्र और राज्य सरकार से मदद पाने के लिए भटक रहा है। 
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इस पर्वतारोही ने हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहरलाल, राज्यपाल कप्तान सिंह सोलंकी और राज्यमंत्री नायब सैनी को भी पत्र लिखा है। नेपाल सरकार ने उसे अप्रैल में एवरेस्ट की चोटी फतह करने की अनुमति दी है, लेकिन अब तक अपने ही देश में उसे कोई तवज्जो नहीं मिली है। 
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नेपाल सरकार ने इस साल बहुत कम लोगों को एवरेस्ट पर चढ़ाई की मंजूरी दी है, क्योंकि प्राय: देखा गया है कि दुर्गम पहाड़ी इलाकों में अकुशल पर्वतारोही हादसों का शिकार हो जाते हैं। इसके लिए नेपाल सरकार ने कड़े मापदंड से होकर गुजरने वाले चुनिंदा लोगों को ही इस साल एवरेस्ट फतह की मंजूरी दी है। 

पीएम मोदी से भी लगाई मदद की गुहार

Nepal government selected Rajesh Choudhary to hoist the Indian flag on Mount Everest

राजेश को नेपाल ने इसलिए अनुमति दी है क्योंकि उसका ट्रैक रिकॉर्ड जबरदस्त है। राजेश ने मात्र 14 घंटे के भीतर 21 हजार फुट ऊंची लद्दाख की स्टॉक कांगड़ी की पहाड़ी पर विजय पताका फहराई है। नेपाल सरकार उसके द्वारा 16 हजार फुट ऊंची दुर्गम सेती धार और साढ़े सत्रह हजार फुट ऊंची फ्रेंडशिप चोटी पर फतह हासिल करने की क्षमता से भी प्रभावित थी।

बचपन से शौक रहा है चोटियां फतह करना
राजेश चौधरी का गांव शिवालिक हिल्स की तलहटी में स्थित है, इसलिए बचपन से ही स्कूल के बाद राजेश इन पहाड़ियों के पथरीले रास्तों पर चलकर अपना शौक पूरा करता था। पिता सतपाल सिंह ने भी बेटे के इस शौक को हमेशा प्रोत्साहित किया।

इसी के चलते राजेश ने इंजीनियरिंग के साथ साथ माउंटेनियरिंग (पर्वतारोहण) का कोर्स भी पूरा किया। उसने एमटैक भी किया लेकिन पर्वतारोहण के प्रति उसका लगाव कम नहीं हुआ। उसने 17 हजार 353 फीट की मनाली फ्रेंडशिप चोटी को 10 घंटे में फतह किया। यह मुश्किल काम था क्योंकि यहां जमीन पर बर्फ बहुत सख्त व खतरनाक हो जाती है।

पीएम मोदी से भी लगाई मदद की गुहार
इंजीनियर राजेश ने हरियाणा सरकार और प्रधानमंत्री मोदी से भी गुहार लगाई है कि यदि वे उसकी आर्थिक मदद कर दें तो वह माउंट एवरेस्ट को फतह कर देश और प्रदेश का नाम रोशन करेगा। इसका सपना है कि वह माउंट एवरेस्ट को विपरीत परिस्थितियों में फतह कर वहां तिरंगा फहराए। राजेश ने अपने गुर्जर समाज और क्षेत्रवासियों से भी मांग की है कि वे भी उसकी इस सहासिक यात्र में मददगार बने।


 
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